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साइरस मिस्त्री का पलटवारः टाटा के शेयरधारकों, निदेशकों और सरकार तक पहुंचाई मन की बात

अश्विन अघोर | Updated on: 12 December 2016, 7:41 IST
(दिब्यांग्शू सरकार/एएफ़पी)
QUICK PILL
  • टाटा संस से बर्ख़ास्त पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री और अंतरिम चेयरमैन रतन टाटा के बीच जारी टकराव बढ़ता जा रहा है. 
  • जहां रतन टाटा ने कहा है कि साइरस ने चेयरमैन बनने के लिए भ्रमित किया, वहीं साइरस ने शेयरधारकों से अगली आमसभा में होने वाली विशेष बैठक में समर्थन की अपील की है. 

टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री और रतन टाटा के बीच की लड़ाई खत्म होती नहीं दिख रही है. टाटा समूह से बर्खास्तगी के बाद मिस्त्री ऐसा कोई मौका नहीं गंवाते जहां से वे अपना पक्ष लोगों के सामने रख सकें और टाटा कम्पनियों के निदेशक और शेयरधारकों का समर्थन हासिल कर सकें.

मिस्त्री ने टाटा समूह की सभी कम्पनियों के शेयरधारकों से भावुक अपील की है कि अगली आमसभा में होने वाली विशेष बैठकों में उनका समर्थन करें क्योंकि हो सकता है इन बैठकों में रतन टाटा उन्हें दूसरी कम्पनियों के चेयरमैन के पद से भी हटाने का प्रस्ताव लाएं.

निकट भविष्य में होने वाली वार्षिक आम सभा की बैठकों में इस आशय का प्रस्ताव लाया जा सकता है. कथित तौर पर मिस्त्री ने सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है, क्योंकि उन्हें लगता है सरकार के दखल के बिना टाटा समूह बर्बाद हो जाएगा.

कड़ी बातें

मिस्त्री के करीबी सूत्रों के मुताबिक टाटा समूह के चेयरमैन पद से मिस्त्री को इसलिए हटाया गया क्योंकि वे समूह में अनुशासन और सुशासन लाना चाहते थे. उन्होंने कहा, 'समूह में पुराने लोग इस परिवर्तन को अपनाने के लिए तैयार नहीं थे. नई पीढ़ी के साथ तालमेल बिठाने के लिए जो बदलाव किए जा रह थे, उन्होंने उसका विरोध किया. इसलिए उन्होंने समूह के बाकी लोगों को भी मिस्त्री के खिलाफ भड़काया. हमने शेयरहोल्डरों से अपील की है कि वे अपनी अंतरआत्मा की आवाज पर वोट दें.

मिस्त्री के करीबी सहयोगियों ने बताया कोरस स्टील के अधिग्रहण का निर्णय सबसे बड़ा ब्लंडर था. काफी बड़ी लागत के चलते टाटा स्टील का यूरोप का कामकाज ठप हो गया. सूत्रों ने कहा, कम्पनी ने 10,000 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है और कोरस के करीब 1.25 लाख कर्मचारियों को पेंशन देनी है. इसी वजह से टाटा स्टील की यूरोप इकाई को भारी नुकसान हुआ है. मिस्त्री चाहते थे कि वे ब्रिटिश सरकार के साथ बात करके कम्पनी के हक में नीतियों में बदलाव करवाएं. कम्पनी को हर साल ही करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

घाटे में चल रहे प्रोजेक्ट

मिस्त्री के करीबी सूत्रों का कहना है कि टाटा समूह के अधिकांश प्रोजेक्ट जैसे टाटा नैनो, एयर एशिया और टाटा स्टील यूरोप सभी भारी घाटे में चल रहे हैं. टाटा समूह ने अमेरिका में एक होटल का अधिग्रहण किया था और वह भी भारी घाटे में ही चल रहा है.

टाटा नैनो प्रोजेक्ट में सालाना 1000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. ऑटोमोबाइल के लिए नए सुरक्षा मानकों के प्रभाव में आते ही नैनो का भविष्य खतरे में दिखाई देने लगा है. अगर ऐसा हो गया तो टाटा समूह के पास नैनो का निर्माण बंद करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा. समूह को अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए अपने ही पैसे का इस्तेमाल करना चाहिए. शेयर होल्डरों का पैसा ऐसे ऊपरी दिखावों में बर्बाद करने के लिए नहीं होता.

भविष्य में क्या होगा?

मिस्त्री टाटा समूह के यूरोप और अमेरिका प्रोजेक्ट के बारे में एक ही राय रखते हैं. सूत्रों का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली से इस मामले में दखल देने की मांग की है. वे कहते हैं कि अगर टाटा समूह के आत्ममुग्ध प्रबंधन पर निगरानी नहीं रखी गई तो कोई अचरज नहीं कि यह समूह जल्द ही डूब जाए.

मिस्त्री ने अपनी वेबसाइट सायरसफॉरगवर्नेन्स पर टाटा समूह के शेयरहोल्डरों को लिखे एक खुले पत्र में कहा है कि टाटा ट्रस्ट को अपनी परिसम्पत्तियों की परवाह करनी होगी, जो कि टाटा संस में लगे शेयर हैं. उन्होंने अपने पत्र में कहा, ‘किसी एक व्यक्ति पर भरोसा करके उसे पूरा समूह चलाने की जिम्मेदारी देना सिद्धांतों के खिलाफ है.'

यह शेयर धारकों के साथ धोखा है. मिस्त्री ने यह भी आरोप लगाया कि रतन टाटा को दोबारा टाटा समूह को चेयरमैन बनाने के लिए आयु संबंधी नियमों में भी ढील दी गई. मिस्त्री के करीबी सहयोगियों का कहना है कि वे इसके खिलाफ अदालत भी जा सकते हैं.

First published: 12 December 2016, 7:41 IST
 
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