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गिरता निर्यात, गिरता रोजगार और गिरता रुपया: क्या यही विकास है जेटलीजी?

नीरज ठाकुर | Updated on: 29 December 2015, 17:25 IST
QUICK PILL
  • सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के मुताबिक 2015 में अप्रैल से नवंबर के बीच कुल ऑटोमोबाइल सेक्टर में 1.52 फीसदी की मामूली बढ़त दर्ज की गई. चेन्नई में आई भीषण बाढ़ को देखते हुए यह ग्रोथ आगे चलकर नकारात्मक ग्रोथ रेट में तब्दील हो सकती है.
  • राजस्व में इजाफा हुआ है लेकिन इसका अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन से इसका कोई लेना-देना नहीं है. बल्कि सरकार ने आम आदमी पर करों का बोझ बढ़ा दिया है. अप्रैल से अक्टूबर 2015 के दौरान अप्रत्यक्ष कर संग्रह में 35.9 पर्सेेंट की बढ़ोतरी हुई.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी उथल पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को लेकर 'गहरा संतोष' जाहिर किया है. पीटीआई को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था में तरक्की नहीं होने की बात को 'बेतुका' बताकर खारिज कर दिया. 

जेटली ने कहा, 'आलोचना भारतीय जीवन का हिस्सा बन गया है. आप किसी अन्य आंकड़े पर संदेह जाहिर कर सकते हैं लेकिन आप राजस्व में हुई बढ़ोतरी को कैसे खारिज कर सकते हैं. राजस्व में जारी बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था में तरक्की का संकेत है.' तो क्या जेटली सही कह रहे हैं?

आंकड़े सरकार के दावे की पुुष्टि नहीं करते हैं.

मेक इन इंडिया से भारत के निर्यात को मदद मिलेगी

सरकार को मेक इन इंडिया शुरू किए हुए एक साल से अधिक का समय हो चुका है. इस योजना का मकसद भारत में विदेशी कंपनियों को मैन्युफैक्चरिंग के लिए न्योता देना था. मेक इन इंडिया के प्रदर्शन पर एक नजर:

मेक इन इंडिया के साथ ही भारत के निर्यात में गिरावट की शुरुआत हुई. पिछले एक साल में निर्यात में 16.52 फीसदी की गिरावट आई है. हर महीने इसमें गिरावट ही आ रही है.

पिछले एक साल में निर्यात में 16.52 पर्सेंट की गिरावट आई है. मंदी के दौरान भारत की स्थिति ज्यादा बेहतर थी

हमारी स्थिति 2008-09 के वैश्विक मंदी के दौरान ज्यादा बेहतर थी जब निर्यात में लगातार नौ महीनों तक गिरावट आई थी. नवंबर 2015 में भारत के निर्यात में 24 फीसदी की गिरावट आई.

अन्य देशों के मुकाबले भारत की स्थिति

2015 के पहले नौ महीनों में दुनिया के निर्यात में 11 पर्सेंट की गिरावट आई जबकि भारतीय निर्यात में 17 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई.

  • ब्रिक्स में शामिल दक्षिण अफ्रीका के निर्यात में महज 8 फीसदी की गिरावट आई.
  • भारत के पड़ोसी देश चीन में निर्यात में महज 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
  • अन्य एशियाई देशों मसलन दक्षिण कोरिया, मलेशिया, सिंगापुर, ताइवान, हॉन्ग-कॉन्ग और थाइलैंड भी अपने नियात को 10 फीसदी से कम पर रखने में सफल रहे हैं.
  • अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले निर्यात के मामले में भारत की स्थिति बेहद खराब है.

विदेशी निवेश में जबरदस्त बढ़ोतरी

2015 के पहले छह महीनों में भारत में सबसे ज्यादा विदेशी पूंजी का निवेश हुआ. सरकार इस दावे को लेकर अपनी पीठ थपथपा सकती है लेकिन गौर से देखने पर इस आंकड़े की पोल खुल जाती है.

ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी एमके ग्लोबल ने यह कहते हुए सरकार के दावे की हवा निकाल दी कि एफडीआई निवेश के मामले में भारत के चीन को पीछे छोड़ने की खबर को मेक इन इंडिया की सफलता से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि आंकड़े बताते हैं कि एफडीआई की वजह घरेलू खपत में हुई बढ़ोतरी है. घरेलू मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी की बजाए इससे आयात को बल मिलेगा.

घरेलू मांग में जबरदस्त बढ़त

सरकार के मुताबिक अर्थव्यवस्था 7 फीसदी की दर से आगे बढ़ रही है और मौजूदा वित्त वर्ष के अंत में यह बढ़कर 7.5 फीसदी हो जाएगी. हालांकि अन्य सेक्टर में ऐसी स्थिति नहीं दिख रही है.

रियल इस्टेट

  • प्रॉपर्टी कंसल्टेंट नाइट फ्रैंक इंडिया के मुताबिक 2015 के पहले छह महीनों में भारत के आठ बड़े शहरों में सात लाख से अधिक घर पड़े हुए हैं जिनकी अभी तक बिक्री नहीं हो पाई है.
  • रिपोर्ट बताती है कि इन प्रॉपर्टीज को बेचने में करीब तीन सालों का समय लगेगा. दूसरी छमाही भी मुश्किल रहने वाली है. पूरे साल के दौरान घरों की बिक्री में 5-6 पर्सेंट की गिरावट आने की उम्मीद है.

ऑटोमोबाइल

  • सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के मुताबिक 2015 में अप्रैल से नवंबर के बीच कुल 16,060,865 वाहनों का निर्माण किया गया जबकि पिछले साल इसी अवधि में 15,820,978 वाहनों का निर्माण किया गया था. इसमें मामूली 1.52 पर्सेंट की बढ़त दर्ज की गई.
  • चेन्नई में आई भीषण बाढ़ को देखते हुए यह मामूली ग्रोथ आगे चलकर नकारात्मक ग्रोथ रेट में तब्दील हो सकती है.
  • अर्थव्यवस्था के आठ बड़े क्षेत्रों में रोजगार के मौकों में जबरदस्त गिरावट आई है. आगे भी इसमें गिरावट आने की संभावना है.

सरकार हर साल 2.5 करोड़ नौकरियां देगी

  • चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने हर साल 2.5 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था. हालांकि सच्चाई पूरी तरह से उलट है.
  • श्रम मंत्रालय की तरफ से किए गए एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि आठ बड़े सेक्टर में रोजगार की संख्या में गिरावट आई है.
  • अप्रैल से जून 2014 के बीच आठ बड़े सेक्टर में कुल 1.82 लाख नौकरियों का सृजन हुआ था. हालांकि तीन तिमाहियों के दौरान यह कम होकर क्रमश: 1.58 लाख, 1.2 लाख और 64,000 रह गया.
  • हालिया सर्वे अप्रैल-जून 2015 का है और इस दौरान नौकरियों की संख्या में 43,000 की गिरावट आई.
  • मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले दिनों में रोजगार के मौकों में और कम ही आने की संभावना है.

राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी

जेटली सही कह रहे हैं. राजस्व में इजाफा हुआ है लेकिन इसका अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है. बल्कि सरकार ने आम आदमी पर कर का बोझ बढ़ा दिया है.

अप्रैल से अक्टूबर 2015 के दौरान अप्रत्यक्ष कर संग्रह में 35.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. सरकार ने 2015-16 के लिए 18.8 फीसदी विकास दर का लक्ष्य रखा है.

इसके अलावा रुपये की कमजोर हालत को लेकर बीजेपी ने यूपीए पर जबरदस्त तरीके से निशाना साधा था. मौजूदा वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपया 67 के स्तर पर को छू चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रुपया इसी स्तर पर बना रहेगा.

सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के अर्थशास्त्री राजीव कुमार, पूर्व योजना आयोग के पूर्व सदस्य अभिजीत सेन और सीएसीपी के पूर्व चेयरमैन अशोक गुलाटी जैसे तमाम अर्थशास्त्रियों ने सरकार के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए हैं. जेटली के दावों से बहुत कुछ बदलता नहीं दिख रहा है.

First published: 29 December 2015, 17:25 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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