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अमीरों पर दरियादिली नहीं दिखा सकते बैंक: सुप्रीम कोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 April 2016, 21:08 IST
QUICK PILL
  • देश में बढ़ते विलफुल डिफॉल्टर्स के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाया. कोर्ट ने आरबीआई और सरकार से पूछा कि बड़े डिफॉल्टर्स से रकम वसूलने के लिए क्या किया जा रहा है.
  • करीब 17 बैंकों के 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज दबाए बैठे शराब कारोबारी विजय माल्या के देश छोड़कर जाने के बाद विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार पर चौतरफा दबाव है. 

देश में बढ़ते विलफुल डिफॉल्टर्स की संख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार को जमकर फटकारा. विलफुल डिफॉल्टर्स उन्हें कहा जाता है जो कर्ज चुकाने की हैसियत रखने के बावजूद बैंकों का कर्ज नहीं चुकाते हैं.

करीब 17 बैंकों के 9,000 करोड़ रुपये कर्ज दबाए बैठे शराब कारोबारी विजय माल्या के देश छोड़कर जाने के बाद विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार पर चौतरफा दबाव है. 

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने सरकार से यह पूछ डाला कि जब कुछ हजार रुपये का कर्ज नहीं चुकाने पर गरीबों की संपत्ति तक जब्त कर ली जाती है तो फिर अमीर लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती जबकि वह अरबों रुपये का कर्ज लेकर उसे चुकाते नहीं है. 

कोर्ट ने कहा कि लोग अरबों रुपये का कर्ज लेकर खुद को दिवालिया घोषित कर देते हैं और उनके खिलाफ बस केस चलता रहता है.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आरबीआई बैंकों का रेगुलेटर भी है और यह देखने की जिम्मेदारी उसकी है कि जनता का पैसा किन हाथों में जा रहा है. कोर्ट ने पूछा, 'क्या आपके पास ऐसा कोई तरीका है जिससे आप गलत व्यक्ति को दिए गए लोन के मामले में बैंकों के खिलाफ कार्रवाई कर सकें.' 

वित्त मंत्रालय को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन बैंक एसोसिएशन और वित्त मंत्रालय  को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि क्या आरबीआई को सौंपी गई डिफॉल्टर की लिस्ट को सार्वजनिक किया जा सकता है.

आरबीआई ने  सुप्रीम कोर्ट को बंद लिफाफे में डिफॉल्टर्स के नाम की सूची सौंपी है. कोर्ट ने सूची को देखने के बाद कहा कि कर्ज की राशि बेहद बड़ी है. हालांकि आरबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में डिफॉल्टर्स के नाम को सार्वजनिक किए जाने के फैसले का विरोध किया. 

आरबीआई पहले कह चुका है कि अगर डिफॉल्टर्स की रकम का खुलासा कर दिया गया तो इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा. 

कोर्ट ने कहा, आरबीआई ने कहा है कि कंपनियों और लोगों पर लाखों करोड़ रुपये का कर्ज है और वह इसका भुगतान नहीं कर रहे हैं. कई लोगों ने तो निजी तौर पर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज ले रखा है.

26 अप्रैल को अगली सुनवाई

इंडियन बैंक एसोसिएशन और वित्त मंत्रालय को नोटिस जारी किए जानेे के बाद मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी. सुप्रीम कोर्ट में यह मामला करीब 10 साल पहले आया था जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने डिफॉल्टर्स पर कार्रवाई को लेकर याचिका दायर की थी.

900 पर्सेंट का इजाफा

सिबिल के आंकड़ों के मुताबिक 2002-15 के बीच विलफुल डिफॉल्टर्स की तरफ से नहीं चुकाई जाने वाली रकम में 900 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और इसमें सबसे ज्यादा पैसा सरकारी बैंकों का फंसा है.

56,521 करोड़ रुपये की रकम विलफुल डिफॉल्टर्स के पास है. कुल डिफॉल्टर्स की संख्या 5,275 है जिनके पास बैंकों का 56,521 करोड़ रुपये फंसा हुआ है. यह रकम 2016-17 में कृषि और किसानों के कल्याण के लिए आवंटित रकम 35,984 करोड़ रुपये के मुकाबले डेढ़ गुणा अधिक है.

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First published: 12 April 2016, 21:08 IST
 
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