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GST प्रॉफिट पर NAA ने HUL पर लगाया था 383 करोड़ का जुर्माना, अदालत ने लगाई रोक

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 January 2019, 12:05 IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल एंटी -प्रोफईटीरिंग अथॉरिटी (NAA) द्वारा हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के खिलाफ दिए गए एक आदेश पर रोक लगा दी है. जीएसटी की दर में कटौती के 15 नवंबर 2017 को लागू होने के बाद एनएए ने अपने उत्पादों के अधिकतम खुदरा मूल्यों को कम नहीं करने के लिए 383 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.

इससे पहले एचयूएल ने कहा था कि एनएए ने कानून की सही व्याख्या नहीं की थी. इसके अलावा, यह आरोप लगाया था कि एनएए आदेश मनमाना है, उसने कहा था कि "एनएए द्वारा कोई विधि निर्धारित नहीं की गई है. उदाहरण के लिए रियल एस्टेट फर्म पिरामिड इंफ्राटेक ने आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार खेतान एंड कंपनी के पार्टनर अभिषेक रस्तोगी ने कहा कि अदालतें मुनाफाखोरी का पता लगाने के लिए सीजीएसटी अधिनियम की धारा 171 के महत्वपूर्ण तत्वों का फैसला करेंगी. धारा 171 जीएसटी के तहत मुनाफाखोरी से संबंधित है.

जीएसटी दर में कई उत्पादों पर 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक की कटौती की गई थी. 383 करोड़ रुपये में से आधी राशि - 191.5 करोड़ रुपये - केंद्रीय उपभोक्ता कल्याण निधि (सीडब्ल्यूएफ) में और दूसरी आधी 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के समान फंड में जमा करनी है. एचयूएल ने केंद्रीय सीडब्ल्यूएफ में 160 करोड़ रुपये जमा किए हैं. अब एचयूएल को इस फंड में 31.5 करोड़ रुपये जमा करने होंगे.

First published: 17 January 2019, 12:05 IST
 
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