Home » बिज़नेस » Delhi will be the first city in the country to use Ultra clean Euro-6 or BS-6 grade petrol and diesel
 

अल्ट्रा क्लीन BS-6 पेट्रोल-डीजल इस्तेमाल करने वाला पहला राज्य बना दिल्ली

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 April 2018, 14:07 IST

दिल्ली और एनसीआर में अब न्यू-जनरेशन के पेट्रोल और डीजल मिलेंगे. ये फ्यूल ज्यादा रिफाइंड और कम प्रदूषण फैलाने वाली होंगे. सरकारी तेल कंपनियां EURO-6 उत्सर्जन पैरामीटर पर आधारित बीएस-6 फ्यूल उपलब्ध कराने जा रही हैं. अभी भारत में बीएस-4 ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है. पेट्रोल- डीजल का ये अवतार आपकी सेहत पर तो अच्छा प्रभाव डालेगा साथ ही आपकी जेब पर भी इसका असर देखने को मिलेगा.

बीएस6 मतलब भारत स्टेज 6. यह गाड़ियों द्वारा फैलाने वाले प्रदूषण को मापने का एक स्केल है. बीएस-6 स्केल को यूरो स्टैंडर्ड्स (European Union Emissions Standards) के हिसाब से बनाया गया है. यह मानक मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, हाइड्रोकार्बन्स और पार्टिकुलेट मैटर्स (PM) की मात्रा को घटाने पर फोकस रहते हैं. बीएस-6 नॉर्म्स के पेट्रोल और डीजल में हानिकारक तत्व कम होंगे, जो वर्तमान समय में बिक रहे बीएस-4 नॉर्म्स के फ्यूल में होते हैं.

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बीएस3 और बीएस4 ईंधन के अनुकूल बने वाहनों में भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

बीएस6 ईंधन को आप अपने मौजूदा वाहनों में भी उपयोग कर सकते हैं. इससे आपके गाड़ियों के इंजन की लाइफ और बढ़ जाएगी. बीएस 4 के अनुरूप बनी डीजल कार को अगर बीएस 6 ईंधन पर चलाया जाए तो यह 50 फीसदी तक कम पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जित करेगी.

देनी पड़  सकती है अधिक कीमत

ऑइल रिफाइनरीज सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए तेल कंपनियां करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं तो जाहिर है इसका असर आपकी जेब पर भी पड़ेगा. इसकी कीमत बीएस 4 ईंधन से अधिक हो सकती है. हालांकि दिल्ली, एनसीआर में इसके लिए अभी अतिरिक्त कीमत की घोषणा नहीं हुई है.

फ्यूल एफिशिएंसी आएगी कमी

फ्यूल में सल्पफर की मात्रा कम होने से फ्यूल के एनर्जी कॉन्टेंट पर नेगेटिव असर पड़ेगा. ऐसा होने से फ्यूल एफिशिएंसी में कमी आएगी लेकिन ये बहुत ही न्यूनतम होगी.

First published: 1 April 2018, 14:07 IST
 
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