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नोटबंदी ने दिया बाबा रामदेव को झटका, आचार्य बालकृष्ण का बड़ा बयान

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 May 2018, 20:07 IST

तेज गति से विकास कर रही भारतीय कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को इस वित्तीय वर्ष में करारा झटका लगा है. पतंजलि अपने प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को पीछे छोड़ देश की सबसे बड़ी FMCG (फ़ास्ट मूविंग कंस्यूमर गुड्स) कंपनी 'हिंदुस्तान यूनीलीवर' को जबरदस्त टक्कर दे रही थी और निकट भविष्य में उसे मात देने के दावे कर रही थी. पतंजलि के मुनाफे में इस साल कोई बृद्धि नहीं हुई है, कंपनी की आय लगभग उतनी ही है जितनी पिछले साल थी.

मई 2017 में पतंजलि के संस्थापक बाबा रामदेव ने कहा था कि मार्च 2018 में कंपनी का राजस्व 20 हजार करोड़ हो जाएगा और साल 2019 तक HUL (हिंदुस्तान यूनीलीवर) को पीछे छोड़ देंगे, हालांकि उनके ये दावे हकीकत से काफी दूर हैं. गौरतलब है कि पतंजलि का बिज़नेस में प्रतिस्प्रधा  आईटीसी, नेस्टल इंडिया, एचयूएल जैसी बड़ी मल्टी नेशनल कंपनियों से है.

पतंजलि के एमडी (प्रबंध निदेशक) आचार्य बालकृष्ण ने लाइव मिंट से एक इंटरव्यू में कहा कि जीएसटी और नोटबंदी लागू होने से कंपनी के ग्रोथ और राजस्व में नकारात्मक असर पड़ा है. पिछले वित्त वर्ष के दौरान राजस्व के स्तर में बहुत कम परिवर्तन हुआ है.

उन्होंने आगे कहा विदेशी कंपनियों के दानव प्रभाव ने भी बिज़नेस पर असर डाला है. हालांकि आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि अगले वर्ष बेहतर प्रदर्शन करेगी हमने इस वित्तीय वर्ष के दौरान बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्टक्टर) और आपूर्ति श्रृंखला(Supply chain) के विकास में अपनी ऊर्जा और संसाधन को निवेश किया. उन्होंने बताया इस साल हमने सिस्टम विकास पर ध्यान केंद्रित किया, न कि सिर्फ राजस्व वृद्धि पर.

योग गुरु से बने व्यवसायी बाबा रामदेव ने 4 मई 2017 को कहा था कि पतंजलि मार्च 2018 को समाप्त वर्ष में 20,000 करोड़ रुपये पार करने के लिए "हर साल दोहरा राजस्व" की नीति जारी रखेंगे और बाद में भारत के सबसे बड़े राजस्व को पार करेंगे. बाबा रामदेव ने ये भी कहा था कि 31 मार्च 2019 तक पैकेजिंग कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड को पटखनी देकर FMCG में स्वदेशी परचम लहरायेंगे, लेकिन उनका ये सपना शायद नोटबंदी और जीएसटी के कारण फ़िलहाल अधूरा प्रतीत हो रहा है.

First published: 18 May 2018, 20:07 IST
 
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