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नोटबंदी के बाद 7.1 फीसदी रहेगी विकास दर, पिछले 3 साल का न्यूनतम स्तर

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 January 2017, 11:05 IST
(पत्रिका)

नोटबंदी के बाद भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ने की आशंका सच साबित हो रही है. भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार वित्तीय वर्ष 2016-17 में 7.1 फीसदी रहेगी. 

सरकार ने शुक्रवार को यह अग्रिम अनुमान जारी किया है. इसके मुताबिक़ वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के वास्तविक विस्तार 7.1 फीसदी के आधार पर लगाया गया है. जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह 7.6 फीसदी था. यह अनुमान सेन्ट्रल स्टैटिक्स ऑफिस (सीएसओ) के मुखिया टीसीए अनंत ने जारी किया है. 

नकदी संकट से उत्पादन पर असर

केंद्र सरकार का यह एडवांस एस्टीमेट रिजर्व बैंक के आंकलन की तरह है. अगर जीडीपी का वास्तविक आंकड़ा ऐसा ही रहता है तो यह पिछले तीन वित्त वर्ष का सबसे निचला स्तर होगा. 

मोदी सरकार ने पिछले साल 8 नवंबर को 500 और 1000 के पुराने नोट पर प्रतिबंध लगा दिया था. माना जा रहा है कि उसके बाद बाजार नें बने नकदी संकट का असर प्रोडक्शन पर पड़ा है. प्रोडक्शन का सीधा असर जीडीपी पर अगले तिमाही के आंकड़ों में दिखने की उम्मीद जताई जा रही है.

वजह

1. अनुमान के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ में कमी की वजह निर्माण, खनन जैसे क्षेत्रों में सुस्त चाल है.

2. आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्लोडाउन को इसकी वजह माना है.

राष्ट्रपति ने जताई थी आशंका

इससे पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका जताई थी. नए साल के मौके पर देश भर के राज्यपालों और उपराज्यपालों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधन में नोटबंदी का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा था कि नोटबंदी से काला धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में ताकत मिलेगी, लेकिन इससे अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी हो जाएगी.

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में ये भी कहा था कि उन्हें संदेह है कि नोटबंदी के बाद गरीब इतना लंबा इंतजार नहीं कर सकते. इसलिए यह जरूरी है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से मदद मुहैया कराई जानी चाहिए.

First published: 7 January 2017, 11:05 IST
 
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