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सोना कितना सोना है? धनतेरस पर खरीदारी से पहले जान लीजिए

सौरभ शर्मा | Updated on: 25 October 2016, 16:15 IST

दीपावली पर सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है. खासकर महिलाएं दीपावली के मौके पर सोना जरूर खरीदती हैं, लेकिन आपको जानकारी है कि जो सोना आप खरीद रहे हैं, वो शुद्ध है या नहीं? जब बात सोने की आती है तो आपके पास ऐसी कोई सुविधा नहीं कि सही सोने को जांच सकें. 

मेरठ के ज्‍वैलर्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर आप ये समझ रहे हैं कि आपकी ज्वैलरी हॉलमार्क्‍ड होने के कारण प्योर है तो ये आपकी गलतफहमी हो सकती है. मार्केट में ऐसी ज्वैलरी मौजूद है, जिस पर गोल्ड का वर्क चढ़ाकर असली के भाव बेचा जा रहा है. इसे बंधेल ज्वैलरी कहते हैं. किस तरह हो रही है पब्लिक की गाढ़ी कमाई की लूट. आइए आपको भी बताते हैं.

क्या है बंधेल ज्वैलरी?

बंधेल ज्वैलरी पर सोने का महीन वर्क किया जाता है. ये ज्वैलरी उसी तरह की होती है, जैसे पुराने जमाने में हसली होती थी. तांबे और चांदी की हसली पर सोने का वर्क चढ़ाया जाता था. सबसे पहले इसकी शुरुआत 10 साल पहले मेरठ और हापुड़ से हुई, उसके बाद ये पूरे वेस्ट यूपी में फैल गया. 

मौजूदा समय में बंधेल की ज्वैलरी का कारोबार पूरे वेस्ट यूपी में महीने का 150 करोड़ रुपये से ऊपर का है. वेस्ट यूपी से ही साउथ इंडिया, राजस्थान, मुंबई, दिल्ली और अन्य शहरों में इसकी सप्लाई हो रही है. वेस्ट यूपी में 2000 से अधिक बंधेल के स्पेशलाइज्ड कारीगर हैं.

किस तरह का होता है खेल?

सोने और बंधेल की ज्वैलरी में सबसे बड़ा अंतर आवाज का होता है. बंधेल की ज्वैलरी में ज्यादा छनछनाहट होती है, जबकि प्योर गोल्ड में ऐसा नहीं होता. उसमें थोड़ा भारीपन होता है. वहीं, बंधेल के ज्वैलरी मेटल में हलका सा सोने का वर्क चढ़ा होता है. 

बंधेल ज्वैलरी की जांच हॉलमार्क भी डिटेक्ट नहीं कर पा रहा है. हॉलमार्क उसे 91.6 फीसदी गोल्ड बता रहा है. यही नहीं बंधेल की ज्वैलरी को कसौटी पर ज्यादा भी कसा जाए तो भी पता लगाना मुश्किल है. सिर्फ ज्वैलरी पर गहरी रेती लगाई जाए तो पता लग सकता है कि मामला खोटा है.

कौन-कौन से मेटल?

बंधेल की ज्वैलरी अगर 50 ग्राम की है तो उसमें 40 ग्राम मेटल होता है. अधिकतर ज्वैलर्स ब्रास और कॉपर का यूज कर रहे हैं. ये दोनों ही मेटल काफी सस्ते और सुलभ हैं, जिसका ज्वैलर्स काफी खुलकर उपयोग कर रहे हैं. जानकारों की मानें तो कई ज्वैलर्स हॉलमार्क की कमजोरी का फायदा उठाकर बंधेल ज्वैलरी को प्योर गोल्ड बताकर बेच रहे हैं. 

इस पर बाकायदा हॉलमार्क का निशान होने के अलावा सारी फॉर्मेलिटीज भी होती हैं. उदाहरण के लिए अगर बंधेल की चार चूड़ियां 50 ग्राम की हैं, तो उस पर मात्र 10 ग्राम ही सोने का वर्क होता है. ज्वैलर्स उन चूड़ियों को 50 ग्राम प्योर गोल्ड बताकर उसकी पूरी कीमत और मेकिंग चार्ज लगाकर बेचते हैं. 

मार्केट में 22 कैरट के प्योर गोल्ड 50 ग्राम की चूड़ियां प्लस मेकिंग चार्ज के साथ करीब 1.50 लाख रुपये की पड़ती है. बंधेल की इन्हीं चूड़ियों की कीमत मात्र 40 हजार के आसपास है. यानि ज्वैलर्स बंधेल को सोना बताकर ग्राहक को चूना लगा रहे हैं.

क्यों हो जाता है हॉलमार्क फेल?

भारत सरकार ने सोने की गुणवत्ता के लिए ही हॉलमार्क की शुरुआत की थी. सवाल ये है कि बंधेल की ज्वैलरी को हॉलमार्क डिटेक्ट क्यों नहीं कर पा रहा है. जानकारों की मानें तो हॉलमार्क मशीन ऊपर की स्किन को ही चेक करती है. सोने का वर्क होने के कारण उसे वो गोल्ड ही समझती है. पूरी जांच के लिए ज्वैलरी को काटना पड़ता है.

ठीक से नहीं होती जांच

मार्केट में काफी ज्वैलरी ऐसी हैं, जिसे हॉलमार्क मशीन से जांचा भी नहीं जाता. उसके बावजूद उस पर हॉलमार्क का साइन होता है. इसका मेन कारण ये है कि वेस्ट यूपी में हॉलमार्क के चार सेंटर ही हैं, वो भी मेरठ में हैं. मेरठ को गोल्ड का बड़ा बाजार माना जाता है. 

बड़ी मार्केट होने के कारण हॉलमार्क के लिए बल्क में सोना आता है. इसमें एक दो पीस को चेक कर बाकी को बिना देखे ही हॉलमार्क का निशान चढ़ा दिया जाता है. ताज्जुब की बात ये है कि पूरे यूपी में सिर्फ छह ही हॉलमार्क सेंटर हैं. एक कानपुर और एक लखनऊ में भी है.

ये कहना है इनका

यूपी सर्राफा एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रविप्रकाश अग्रवाल बताते हैं कि ऐसा पॉसिबल हो सकता है. क्योंकि हॉलमार्क मशीन का प्वाइंट सिर्फ गोल्ड की परत को ही पकड़ पाता है. उसके बाद वो नीचे नहीं जा पाता है. अगर बात यूपी में हॉलमार्किंग के सेंटर की बात करें तो अब छह हो गए हैं. पब्लिक को इस तरह के फ्रॉड से बचने की काफी जरूरत है. 

वहीं, हीरा हॉलमार्क सेंटर के मालिक अशोक चौधरी बंधेल की ज्वैलरी को हमारे सेंटर से किसी भी तरह पास नहीं किया जाता है. जरा सा भी शक होने पर हमें पूरा अधिकार है कि उसे काट कर या मेल्ट कर जांच करें. अगर कोई काटने और मेल्ट करने से मना करता है तो सिर्फ टेस्टिंग स्किन की होगी. 

धोखे से ऐसे बचें

  • गोल्ड ज्वैलरी विश्वासपात्र ज्वैलर से ही खरीदें.
  • कितना ही विश्वासपात्र ज्वैलर क्यों न हो, उससे बिल जरूर लें.
  • ज्वैलरी पर हॉलमार्क का निशान हो.
  • हॉलमार्क सेंटर का नाम जरूर होना चाहिए.
  • ज्वैलरी में ज्वैलर का आईडी नंबर होना चाहिए.
  • ज्वैलरी पर बीआईएस का निशान होना काफी जरूरी है.
  • ज्वैलरी पर मेकर का स्टांप होना भी अनिवार्य है.

इस तरह की भी होती है धांधली

  • पाइप ज्वैलरी में लाख भरकर सोने की परत चढ़ाकर हॉलमार्किंग कराई जाती है. उसे प्योर गोल्ड के दाम में बेचा जाता है.
  • कई सर्राफ पाइप और बंधेल ज्वैलरी को बिना हॉलमार्क कराए सिर्फ उस पर 20 और 22 कैरेट लिखकर पब्लिक को ठग रहे हैं.

First published: 25 October 2016, 16:15 IST
 
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