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क्या GSTN को सरकारी कंपनी बनाने के पीछे सरकार की ये मजबूरी थी ?

सुनील रावत | Updated on: 5 May 2018, 14:08 IST

भारत में सबसे बड़े टैक्स सुधार माने जाने वाले वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को चलाने वाली कंपनी गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) के स्वामित्व पर कई बार सवाल उठे हैं. इससे पहले कुछ वरिष्ठ अधिकारियों तथा अप्रत्यक्ष कर कर्मचारी संगठनों ने जीएसटीएन अधिकतर हिस्सेदारी निजी इकाइयों के पास होने को लेकर चिंता जताई थी. अब जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) को पूरी तरह से सरकारी कंपनी बनाने पर जीएसटी काउंसिल ने मंजूरी दे दी है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि जीएसटी काउंसिल ने जीएसटीएन में 51 फीसदी गैर-सरकारी स्वामित्व को खरीदने की सिफारिश की है. इससे पहले जीएसटीएन के मूल स्वामित्व ढांचे में 49 फीसदी हिस्सा सरकार के पास था, जिनमें से 24.5 फीसदी केंद्र और 24.5 फीसदी हिस्से में सारे राज्य थे. वित्त मंत्री ने बताया कि अब जीएसटीएन के नए स्वामित्व ढांचे में 50 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के पास रहेगा, जबकि बाकी के 50 फीसदी हिस्से को सारे राज्यों में बांट दिया जाएगा.

क्यों उठ रह थे जीएसटीएन पर सवाल 

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार के पूर्व सचिव ई.ए.एस सर्मा (जो आंध्र प्रदेश कैडर के आईएएस अफसर रहे हैं) ने आरोप लगाए थे कि जीएसटी को सेवा प्रदान करने वाली एजेंसी GSTN में दो डायरेक्टर विदेशी कंपनियों में भी डायरेक्टर हैं. उनका कहना था कि विदेशी कंपनियों से जुड़े लोगों को GSTN बोर्ड में लाना देश की सुरक्षा के साथ समझौता है.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखे एक पत्र में सर्मा ने खुलासा किया था कि GSTN के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में शामिल भावेश सी. ज़ावेरी- 'स्विफ्ट इंडिया डोमेस्टिक सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड' ( Swift India Domestic Services Pvt Ltd ) कंपनी के भी निदेशक है.

सर्मा का कहना था कि यह कंपनी एक विदेशी कंपनी का हिस्सा था जबकि जीएसटीएन में दूसरे डायरेक्टर आनंद सिन्हा, केकेआर अर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (KKR Arc India Pvt Ltd) के निदेशक हैं, और यह भी एक विदेशी स्वामित्व वाली कंपनी है.

जीएसटीएन में कौन थे हिस्सेदार

GSTN एक गैर-लाभकारी निजी लिमिटेड कंपनी थी. इसमें 51 प्रतिशत हिस्सेदारी पांच निजी संस्थानों- एचडीएफसी बैंक लि. (10 प्रतिशत), एचडीएफसी लि. (10 प्रतिशत), आईसीआईसीआई बैंक (10 प्रतिशत), एनएसई स्ट्रैटजिक इनवेस्टमेंट कारपोरेशन लि. (10 प्रतिशत) और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस (11 प्रतिशत) की थी.

First published: 5 May 2018, 14:08 IST
 
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