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क्या नेस्ले ने जलाए थे मैगी के जहरीले पैकेट? यह आरटीआई कुछ और कहता है

सुहास मुंशी | Updated on: 11 February 2017, 5:45 IST

करीब दो साल पहले मैगी में भारी मात्रा में लेड पाए जाने की रिपोर्ट के बाद इस साल जून में नेस्ले कम्पनी ने अपने लोकप्रिय ब्रांड मैगी नूडल्स के पैकेट नष्ट करने का फैसला किया था. नेस्ले इंडिया ने 30 जून को बम्बई उच्च न्यायालय को जानकारी दी थी कि पांच जून के बाद से कम्पनी ने मैगी के 27,000 टन यानी 40 करोड़ पैकेटों में से 17 करोड़ पैकेट जला दिए.

इसके बाद सितम्बर माह में नेस्ले ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एक सितम्बर तक करीब 38,000 टन मैगी नष्ट कर दी गई. हालांकि नेस्ले ने कभी देश भर में सरकारी ऐजेंसियों द्वारा की गई जांच में मैगी में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट के खतरनाक स्तर पर पाए जाने की बात को सही नहीं माना लेकिन कम्पनी ने आगे बढ़कर अपने मैगी के स्टॉक नष्ट किए.

नेस्ले ने दावा किया कि जितनी भारी मात्रा में मैगी के पैकेट बाजार से वापस लिए गए और नष्ट किया गया, वह न केवल नेस्ले बल्कि फूड इंडस्ट्री के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी मात्रा है. यहां एक सवाल यह उठता है कि इतनी मात्रा में मैगी बाजार से वापस लेने और नष्ट करने के बारे में सिर्फ नेस्टले ही जानता है. कोई और नहीं.

जिन प्लांट्स में इन्हें नष्ट किया गया; उस बारे में कम्पनी से जानकारी मांगी तो उसने यह बताने से इनकार कर दिया

कोई और कैसे इस दावे को सच मान सकता है? क्या भारतीय खाद्य नियामक एफएसएसएआई के सदस्य उस वक्त वहां मौजूद थे, जहां इतनी मात्रा में हजारों लाखों मैगी के पैकेट नष्ट किए जा रहे थे? एफएसएसएआई  इस बात की सिफारिश करने के लिए जवाबदेह है कि हम क्या खा सकते हैं क्या नहीं.

नेस्ले इंडिया से जब पूछा गया कि क्या एफएसएसएआई मैगी के पैकेट वापस लेने और नष्ट करने की प्रक्रिया में शामिल थी, कम्पनी ने जवाब दिया, ‘हमने हमेशा एफएसएसएआई को मैगी नूडल्स नष्ट करने के बारे में बताया. जरूरत होती तो एफएसएसएआई उस समय साइट पर अपने अधिकारियों को भेज देती. इसके अलावा एफएसएसएआई को रोजाना प्लांट में मैगी नष्ट करने के बारे में रिपोर्ट भेजी जाती.’

हालांकि एफएसएसएआई ने आरटीआई के जरिये मांगे गए एक सावल के जवाब में इससे अलग बात कही है. आरटीआई के तहत एफएसएसएआई से पूछा गया था कि क्या एफएसएसएआई ने मैगी नूडल्स को नष्ट करने की प्रक्रिया देखी है? इस पर एफएसएसएआई  ने सीधा सा जवाब दिया- नहीं.

नेस्ले का दावा और सवाल

नेस्ले ने दावा किया कि उसने 6 प्लांट में बिल्कुल पर्यावरणीय मानकों के तहत काफी अधिक मात्रा में मैगी नष्ट की है. कैच ने जब मैगी नष्ट करने वाले कर्मचारियों और जिन प्लांट्स में इन्हें नष्ट किया गया; उस बारे में कम्पनी से जानकारी मांगी तो उसने यह बताने से इनकार कर दिया. कैच ने नेस्ले से पूछा क्या मैगी के पैकेट नष्ट करने से पहले उसने स्थानीय नगर पालिकाओं और पर्यावरण संस्थाओं से इजाजत ली थी? इस पर उसने जवाब दिया कि मैगी को चिन्हित संयंत्रों में ही नष्ट किया गया. इन संयंत्रों के पास मैगी नष्ट करने के लिए आवश्यक अनुमति थी.

नेस्ले ने बताया मैगी नूडल्स के पैकेट नष्ट करने के तौर-तरीकों पर एफएसएसएआई से विचार-विमर्श किया गया था और इस पर आपसी सहमति बना ली गई थी. हमने एफएसएसएआई को यह भी बता दिया था कि मैगी किन जगहों पर स्थित सीमेंट संयंत्रों में जलाई जा रही है. इन सीमेंट संयंत्रों ने मैगी नष्ट करने के प्रमाण पत्र जारी किए और मैगी नष्ट करने के दौरान ली गई तस्वीरें भी एफएसएसएआई को भेजी गईं. मैगी के बाजार से वापस लेने की शुरुआत 8 जून 2015 को की गई थी और एक सितम्बर 2015 तक हमने करीब 3800 टन मैगी नूडल्स जला दिए.

इस जवाब के अंत में मैगी ने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया जैसे विदेशों में भी मैगी के जितने भी नमूनों की जांच की गई वे सौ फीसदी सुरक्षित बताए गए. माननीय बम्बई उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं ने भी मैगी के नमूनों को क्लीन चिट दी है.

First published: 24 December 2016, 8:31 IST
 
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