Home » बिज़नेस » Did Raghuram Rajan stifle India's growth? Numbers say he didn't
 

क्या वृद्धि दर को नुकसान पहुंचाने के लिए राजन को जिम्मेदार ठहराना सही है?

नीरज ठाकुर | Updated on: 16 July 2016, 8:16 IST
QUICK PILL
  • बतौर गवर्नर रघुराम राजन मुद्रास्फीति की वजह से ब्याज दरों में कटौती किए जाने की मांग को अक्सर नजरअंदाज करते रहे.
  • हालांकि राजन का हमेशा कहना था कि कर्ज की मांग में आ रही गिरावट की वजह अधिक ब्याज दर नहीं बल्कि बढ़ते एनपीए की वजह से बैंकों का कर्ज देने से हिचकना है.
  • इंद्रधनुष कार्यक्रम के तहत सरकार ने 13 पीएसयू बैंकों को 20,058 करोड़ रुपये की पूंजी आवंटित की थी. कार्यक्रम की शुरुआत पिछले वित्त वर्ष में की गई थी. इसके बाद 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन क्षमता सुधार के आधार पर किया जाना था.

करीब एक साल तक आलोचनाओं को झेलने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन ने पिछले महीने यह घोषणा कर दी कि वह दूसरे कार्यकाल के पक्ष में नहीं हैं. अब केंद्र सरकार में मौजूद राजन विरोधी लॉबी उन पर भारत के ग्रोथ को पटरी से उतारने का आरोप लगा रही है.

ऐसा कहा जाता है कि राजन के रेपो रेट नहीं घटाने की वजह से बैंकों ने अपने कर्ज को बढ़ने दिया. रेपो रेट पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है. अपने बचाव में राजन ने हमेशा कहा कि कर्ज उठान में आ रही गिरावट की वजह अधिक ब्याज दर नहीं हैं बल्कि  एनपीए की वजह से बैंकों का कर्ज देने से हिचकना है.

कौन सही?

स्वराज मैग्जीन में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, '2015 में पब्लिक सेक्टर बैंकों के 6.6 फीसदी के मुकाबले नॉन फूड क्रेडिट में करीब 9.3 फीसदी की तेजी आई. यह अवधि 25 दिसंबर 2014 से 24 दिसंबर 2015 के बीच की है.'

इसका मतलब यह हुआ कि निजी क्षेत्र के बैंकों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुकाबले इंडस्ट्री और खुदरा कर्ज के मामले में ज्यादा कर्ज दिया.

इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि पीएसयू बैंकों के पास मौजूूद सीमित पूंजी की वजह से 2015-16 से लेकर 2018-19 के बीच लोन ग्रोथ में 9 फीसदी सालाना की गिरावट आ सकती है.

रिपोर्ट में मझोले आकार के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए और अधिक निराशाजनक तस्वीर पेश की गई है. माना जा रहा है कि 2016 से 2019 के बीच इन बैंकों का लोन ग्रोथ महज 8.1 फीसदी रह सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ग्रोथ के लिए वित्त वर्ष 2017-19 के लिए अनुमानित टियर-1 पूंजी के 22 फीसदी हिस्से की जरूरत होगी. यह अनुमान सरकार के इंद्रधनुष कार्यक्रम के तहत मुहैया कराई जाने वाली पूंजी से अधिक है.

इंद्रधनुष कार्यक्रम के तहत सरकार ने 13 पीएसूय बैंकों को 20,058 करोड़ रुपये की पूंजी आवंटित की थी. कार्यक्रम की शुरुआत पिछले वित्त वर्ष में की गई थी. इसके बाद 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन क्षमता सुधार के आधार पर किया जाना था.

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुताबिक एनपीए बढ़नेे की वजह सेे पीएसयू बैंकों के कर्ज की लागत अधिक रहेगी. इससे वित्त वर्ष 2018-19 में देश के जीडीपी पर मामूली असर पड़ सकता है.

क्या नए गवर्नर दरों में कटौती करेंगे?

इंडस्ट्री और राजन विरोधी लॉबी दोनों ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वैसे व्यक्ति को आरबीआई का गवर्नर बनाने की उम्मीद कर रहे हैं जिनका विचार राजन के उलट हो. नए गवर्नर से दरों में कटौती किए जाने की उम्मीद है.

हालांकि पीएसयू बैंकों के बचत खातों की खराब हालत को देखते हुए दरों में कटौती की उम्मीद कम ही है. आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 में एनपीए में 80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट बताती है सामान्य हालत में पीएयू बैंकों का एनपीए मार्च 2017 तक 10.1 फीसदी बढ़ सकता है.

पीएसयू बैंकों के एनपीए में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए क्या बैंक आगे अपने कर्ज पोर्टफोलियो को बढ़ाएंगे? 

यह एक ही स्थिति में संभव है, अगर आरबीआई के नए गवर्नर बैंकों को एनपीए को नजरअंदाज करने के लिए कहें और भविष्य में बड़ा जोखिम लेने की प्रेरणा दें. क्या नया गवर्नर यह जोखिम उठाएगा?

First published: 16 July 2016, 8:16 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी