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अगले दो महीने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर रहिये टेंशन-फ्री, नहीं बढ़ेंगे दाम !

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 March 2019, 17:11 IST

मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले सभी मुश्किलों से पार पाना चाहती है. युद्ध के स्मारकों का उद्घाटन करने से लेकर कैबिनेट मंत्रालयों की सफलता के लिए पूरे पन्ने के विज्ञापनों अख़बारों में दिए जा रहे हैं. इसी कड़ी में अब सरकार पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रण में रखने की पूरी कोशिश कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल-मई में कीमतें स्थिर रखने के लिए सरकार ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों से बात की है.

यह कदम उपभोक्ता भावनाओं को बनाए रखने की दिशा में एक लंबा रास्ता तय करेगा. माना जा रहा है कि अगर चुनाव के दौरान कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इससे मोदी सरकार नुक्सान हो सकता है. यही कारण है कि यह राज्य के स्वामित्व वाले खुदरा विक्रेताओं को अगले कुछ महीनों तक कीमतों को स्थिर रखने के लिए कहा जा सकता है.

वास्तव में सरकार अभी अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार हर रोज संशोधित दरों के मौजूदा मूल्य निर्धारण को निर्धारित करती है. मार्च की शुरुआत से एक दैनिक अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, खुदरा तेल की कीमतें 5 मार्च और 8 वीं के बीच समान रहीं. पिछले सप्ताहांत, सऊदी अरब और भारत के तेल मंत्रियों ने तेल की कीमतों और निवेश पर चर्चा की.

भारत के तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने समकक्ष खालिद अल-फलीह से चुनाव से पहले तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने की मांग की और भारत को तेल की निर्बाध आपूर्ति की आवश्यकता पर बल दिया. हालांकि चुनावों के बाद ईंधन की कीमतों में उम्मीद से अधिक दर से वृद्धि होगी, विशेष रूप से राज्य के स्वामित्व वाली तेलकंपनियों को नुकसान उठाना पड़ेगा. यह पिछले साल मई में कर्नाटक राज्य चुनावों के मामले में देखा गया था, जब मतदान वाले हफ्तों में कीमतें अपरिवर्तित रहने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई थी.

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First published: 11 March 2019, 17:11 IST
 
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