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सूखे से अर्थव्यवस्था को 6 लाख 50 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

अभिषेक पराशर | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
QUICK PILL
  • देश के 10 राज्यों में पड़े सूखे की वजह से अर्थव्यवस्था को करीब 6,50,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. एसोचैम की तरफ  से जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है.
  • एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 256 जिलों में करीब 33 करोड़ की आबादी सूखे की चपेट में है. लगातार खराब मॉनसून, जलाशयों में कम होते पानी और भूजल के गिरते स्तर की वजह से महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत 10 राज्यों के सूखा प्रभावित इलाकों में जीवनयापन को लेकर गंभीर समस्या पैदा हो गई है. 

देश के 10 राज्यों में पड़े सूखे की वजह से अर्थव्यवस्था को करीब 6,50,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. एसोचैम की तरफ  से जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक देश के 256 जिलों में करीब 33 करोड़ की आबादी सूखे की चपेट में है. लगातार खराब मॉनसून, जलाशयों में कम होते पानी और भूजल के गिरते स्तर की वजह से महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत 10 राज्यों के सूखा प्रभावित इलाकों में जीवनयापन को लेकर गंभीर समस्या पैदा हो गई है. 

महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत देश के करीब 10 राज्यों में सूूखे की वजह से जीवनयापन का संकट पैदा हो गया है

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लातूर शहर में सरकार को पानी संकट की वजह से दंगा होने की आशंका सताने लगी थी.

राज्य सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए लातूर में धारा 144  लगा दी थी. फिलहाल लातूर शहर में सात दिनों पर एक दिन जबकि गांव में 30 दिनों के अंतराल पर पीने के  पानी की आपूर्ति की जा रही है.

वहीं उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में भी जल संकट की समस्या गंभीर हो गई है. बुंदेलखंड के किसानों ने हाल ही में अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में जंतर मंतर पर धरना भी दिया था. बुंदेलखंड में  उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिले सर्वाधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र में आते हैं. 

बुंदेलखंड की भयावह स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकताा है कि यहां पिछले कई सालों से सूखा पड़ा हुआ है. किसानों के बीच काम करने वाली संस्था स्वराज अभियान के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें इन इलाकों में स्थिति सुधार के लिए कोई काम नहीं कर रही है.

संगठन के सर्वेक्षण में यह बात सामने आई थी कि मध्य प्रदेश के करीब 40 फीसदी गांव एक या दो हैंडपंप पर निर्भर हैं.  वहीं उत्तर प्रदेश में ऐसे गांवों की आबादी करीब 14 फीसदी है. सर्वेक्षण में यह बात सामने आई थी इन इलाकों में भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है. 

एसोचैम की रिपोर्ट बताती है, 'एक मोटे अनुमान के मुताबिक सूखे की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को करीब 100 डॉलर यानी 6,50,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है.'

इस बार बेहतर मॉनसून रहने के बावजूद सूखा से उबरने में लोगों को कम से कम छह महीने लग जाएंगे

हालांकि इस बीच सरकार ने पहले के मुकाबले बेहतर मॉनसून रहने की भविष्यवाणी की है. लेकिन ऐसा होने की स्थिति में भी सूखे के असर से उबरने में लोगों को कई महीने लग जाएंगे. 

रिपोर्ट के मुताबिक बेहतर मॉनसून होने के बावजूद लोगों को सूखा से उबरने में कम से कम छह महीने लग जाएंगे. 

रिपोर्ट कहती है, 'चलिए यह मान लेते हैं कि सरकार इन लोगों को पानी, खाना और स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के मद में प्रति महीने 3,000 रुपये खर्च करेगी. यह सिलसिला करीब एक या दो महीने तक चलेगा. ऐसे में 33 करोड़ रुपये की आबादी पर होने वाले खर्च की रकम प्रति महीने करीब 1,00,000  करोड़ रुपये होगी.'

इसके अलावा बिजली, खाद और अन्य मदों में दी जाने वाली सब्सिडी से खर्च में और बढ़ोतरी ही होगी. 

जहां तक आर्थिक स्थिति पर इसके असर का सवाल है तो विकास पर खर्च होने वाली रकम लोगों की मदद पर खर्च होगी. इसके अलावा शहरी इलाकों में होने वाले विस्थापन की वजह से इन क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर अतिरिक्त भार भी पड़ेगा.

रिपोर्ट बताती है कि सूखे की वजह से कृषि कर्ज में बढ़ोतरी होगी और बच्चों एवं महिलाओं पर भी उल्टा असर पड़ेगा. इसके साथ ही आने वाले दिनों में महंगाई में भी बढ़ोेतरी होने की उम्मीद है.

विश्व बैंक दे चुका है चेतावनी

सूखेे की वजह से आने वाले दिनों में पानी की समस्या और अधिक गहराने का अनुमान है और इससे अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

भारत की करीब एक चौथाई आबादी पानी की कमी का सामना कर रही है. विश्व बैंक के नए अध्ययन के मुताबिक पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन के कारण भारत की जीडीपी को 2050 तक 6 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ सकता है. 

विश्व बैंक के अध्ययन के मुताबिक 2050 तक भारत की जीडीपी को 6 फीसदी का नुकसान हो सकता है

रिपोर्ट में बताया गया था कि पानी की कमी से सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य और कृषि पर पड़ेगा. विश्व बैंक ने कहा था कि भारत दुनिया के उन देशों में है जो जल संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. 

First published: 11 May 2016, 6:26 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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