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खराब वैश्विक हालात के बावजूद 7.6% रहेगी जीडीपी दर

अभिषेक पराशर | Updated on: 26 February 2016, 16:44 IST
QUICK PILL
  • आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक वित्त वर्ष 2017 में देश की जीडीपी ग्रोथ 7-7.75 फीसदी रहने का अनुमान है. वहीं वित्त वर्ष 2016 में जीडीपी ग्रोथ 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है. हालांकि अगले कुछ साल में 8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान है.
  • आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक वेतन आयोग की सिफारिशों से महंगाई नहीं बढ़ेगी. वित्त वर्ष 2017 में रिटेल महंगाई दर 4.5-5 फीसदी रह सकती है.वित्त वर्ष 2016 में 3.9 फीसदी के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. वित्त वर्ष 2017 में वित्तीय घाटे की स्थिति चुनौती भरी रहेगी.

2016-17 के लिए पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण ने अरुण जेटली के बजट की तस्वीर पेश कर दी है. आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि 2017 में 7-7.5 फीसदी विकास दर का अनुमान जाहिर किया है जबकि मौजूदा वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 7.6 फीसदी वृद्धि दर (जीडीपी) रहने की उम्मीद है.

समीक्षा में कहा गया है कि कई तरह की चुनौतियों की वजह से जीडीपी अनुमान कम रहने की संभावना जताई गई. हालांकि इसके बावजूद राजकोषीय घाटे को जीडीपी के मुकाबले 3.9 फीसदी रखने का लक्ष्य संभव है.

वहीं लंबे समय में  देश के लिए मजबूत विकास दर की उम्मीद जताई गई है. मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन की तरफ से तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है, 'लंबे समय में जीडीपी की विकास दर 8-10 फीसदी रहेगी.' 

रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर के बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में विपरीत परिस्थितियों से उबरने की क्षमता अन्य बाजारों के मुकाबले ज्यादा है.

रिपोर्ट में मुख्य आर्थिक सलाहकार सुब्रमण्यन के हवाले से कहा गया है, 'बाजार में कई बार गिरावट के बाद फिर से तेजी आई है.' सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद के कारण देश के शेयर बाजार में निवेश होता रहेगा. 

तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था

महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार होने की वजह से देश की अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है. सर्वेक्षण में कहा गया है कि कीमतों के मोर्चे पर नरमी और अन्य महत्वपूर्ण कारकों को देखते हुए अगले दो वर्षों में 8 फीसदी या उससे भी ज्यादा की विकास दर हासिल करना अब संभव नजर आ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.

मौजूदा वित्त वर्ष में करेंट अकाउंट और वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने में सरकार सफल रही है

 2014-15 में 7.2 फीसदी और 2015-16 में 7.6 फीसदी की वृद्धि दर हासिल करने के बाद 7 फीसदी से ज्यादा की विकास दर ने भारत को दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में तब्दील कर दिया है. सर्वेक्षण में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका और मजबूत हो गई है क्योंकि चीन फिलहाल अपने को संतुलित करने में जुटा हुआ है.

सर्वेक्षण बताती है कि खपत की वजह से ही भारत में विकास की गति मजबूत हुई है. रिपोर्ट बताती है कि एक तरफ जहां सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी पड़ी है वहीं कमजोर मॉनसून की वजह से कृषि क्षेत्र में आई गिरावट की भरपाई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने कर दी है. 

राजकोषीय घाटा

  1. समीक्षा में कहा गया है कि कई तरह की चुनौतियों की वजह से जीडीपी अनुमान कम रहने की संभावना जताई गई. हालांकि इसके बावजूद राजकोषीय घाटे को जीडीपी के मुकाबले 3.9 फीसदी रखने का लक्ष्य संभव है. 
  2. 2016-17 राजकोषीय मोर्चे पर चुनौतीपूर्ण साल रहेगा. 
  3. 2015-16 में जीडीपी के मुकाबले 3.9 फीसदी राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा गया था जिसे पूरा करना संभव नजर आ रहा है.

महंगाई

  1. 2016-17 में सीपीआई इनफ्लेशन करीब 4.5-5 फीसदी रहने की उम्मीद.
  2. महंगाई दर पर काबू रखने में सफलता मिली है और कीमतों में स्थायित्व को लेकर स्थिति सुधरी है.
  3. आरबीआई मार्च 2017 के लिए 5 फीसदी महंगाई दर की उम्मीद कर सकती है.

चालू खाता घाटा

2016-17 में चालू खाता घाटा (सीएडी) करीब 1-1.5 फीसदी रह सकता है.

बैंकिंग सेक्टर

  1. 2018-19 तक बैंकों को करीब 1.8 ट्रिलियन पूंजी की जरूरत पड़ने का अनुमान.
  2. मौजूदा और इसके बाद के साल के लिए बैंकों को 700 अरब रुपये की पूंजी बतौर बजटीय सहायता देने का प्रस्ताव.

कर

2015-16 के मुकाबले कर से मिलने वाले राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद.

राजकोषीय घाटे में उम्मीद की बड़ी वजह कर संग्रह में होने वाली बढ़ोतरी और तेल के घटते मूल्य हैं. बेहतर राजकोषीय प्रबंधन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2015-16 में कुल खर्च 17.77 लाख रुपये रहने का अनुमान है जो 2014-15 के संशोधित अनुमान से 5.7 फीसदी ज्यादा है.

थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से माइनस में रही है. इसके अलावा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर भी पिछले साल के मुकाबले घटकर आधी हो गई है. समीक्षा बताती है कि बफर स्टॉक, समय पर अनाजों के वितरण और दाल के आयात की वजह से सरकार को 2015-16 में महंगाई को काबू में रखने में मदद मिली है.

पावर सेक्टर

  1. 2015-16 में कई बड़े बदलावों की वजह से पावर सेक्टर में रिकॉर्ड सुधार हुआ है. समीक्षा बताती है कि 2014-15 में 26.5 गीगावॉट की क्षमता जोड़ी गई जो पिछले पांच साल के सालाना औसत 19 जीगावॉट से कहीं अधिक है.
  2. इतना ही नहीं पावर सेक्टर में अभूतपूर्व तौर पर क्षमता विस्तार हुआ है. इसकी वजह से भारत को इलेक्ट्रिक डेफिसिट को घटाकर 2.4 फीसदी करने में मदद मिली है.

7वें वेतन आयोग से नहीं बढ़ेगी महंगाई

7वें वेतन आयोग की सिफारिशों का लागू किए जाने को लेकर महंगाई में बढ़ोतरी होने की आशंका जाहिर की जा रही थी जिसे आर्थिक सर्वेक्षण ने खारिज कर दिया है. सर्वेक्षण बताती है कि 2017 में महंगाई 4.5-5 फीसदी रह सकती है. 2017 में वित्तीय घाटे की चुनौतीपूर्ण स्थिति का भी जिक्र किया गया है.

First published: 26 February 2016, 16:44 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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