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टॉप 5 डिफॉल्टर्स में शामिल विनसम डायमंड्स की संपत्ति जब्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
(कैच हिंदी)
QUICK PILL
  • मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जारी जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई की डायमंड कंपनी विनसम डायमंड एंड ज्वैलरी की 172 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. कंपनी देश के बड़े विलफुल डिफॉल्टर्स (जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले) में एक है.
  • सिबिल के आंकड़ों के मुताबिक देश के पांच बड़े डिफॉल्टर्स में मुंबई की डायमंड कंपनी विनसम डायमंड एंड ज्वैलर्स लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनी फॉरएवर प्रीसियस ज्वैलरी एंड डायमंड लिमिटेड शामिल है.
  • क्रेेडिट इनफॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड यानी सिबिल के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 5,275 विलफुल डिफॉल्टर्स हैं और इन पर भारतीय बैंकों का करीब 8.56 अरब डॉलर यानी 56,521 करोड़ रुपये बकाया है.

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जारी जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई की डायमंड कंपनी विनसम डायमंड एंड ज्वैलरी की 172 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. कंपनी देश के बड़े विलफुल डिफॉल्टर्स (जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले) में एक है.

ईडी के मुताबिक कंपनी की चल और अचल संपत्ति को प्रिवेंशन ऑफ द मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जब्त किया गया है. विनसम डायमंड्स एंड ज्वैलरी सूरत की कंपनी है, जिसका मुख्यालय मुंबई में है.

कंपनी पर कुल 6,800 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें से अकेले 4,680 करोड़ रुपये स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के नेतृत्व वाले कंसोर्सियम का है. वहीं इसकी सहायक कंपनी फॉरएवर प्रीसियस डायमंड्स एंड ज्वैलरी पर 2,121.82 करोड़ रुपये का बकाया है. यह कर्ज पंजाब नैशनल बैंक के नेतृत्व में गठित बैंकों के कंर्सोशियम ने दी है. 

जतिन मेहता की यह कंपनी फिलहाल ईडी और सीबीआई जांच के दायरे में है. कंपनी की मुश्किलें जनवरी 2013 में शुरू हुई, जब इसके यूएई के 13 वितरक 4,760 करोड़ रुपये का भुगतान करने में विफल रहे. इसके बाद स्टैंडर्ड चार्टर्ड के नेतृत्व में चार विदेशी बैंकों ने कंपनी की 4,000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी को भुना लिया.

बाद में कंपनी कर्ज का भुगतान करने में विफल रही और फिर एक के बाद एक कई बैंकों ने कंपनी और इसके प्रोमोटर मेहता को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया. फॉरेंसिक ऑडिट में यह बात सामने आई कि कंपनी ने कथित रूप से फंड की हेरा-फेरी की है.

विजय माल्या पर भी बैंकों का करीब 9,000 करोड़ रुपये का बकाया है

शराब करोबारी विजय माल्या के बाद विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ हुई यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है. वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय इस मामले की सीधी निगरानी कर रहा है.

विजय माल्या पर भी बैंकों का करीब 9,000 करोड़ रुपये का बकाया है. माल्या और उनकी डूब चुकी कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस को बैंक विलफुल डिफॉल्टर्स घोषित कर चुके हैं. कार्रवाई के डर से माल्या देश छोड़कर लंदन जा चुके हैं. 

माल्या के देश छोड़कर भागने के बाद सरकार पर विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ कार्रवाई करने का चौतरफा दबाव है. सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में सुस्त रवैये को लेकर सरकार को कड़ी फटकार लगा चुका है. 

विलफुल डिफॉल्ट के बड़े मामलों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने देश की बैंकिंग व्यवस्था के सामने नकदी की चुनौती पैदा कर दी है. बैंकों के बढ़ते एनपीए में इस रकम की सबसे बड़ी भूमिका है.

उम्मीद से बड़ा है विलफुल डिफॉल्ट का जाल

क्रेडिट इनफॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड यानी सिबिल के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 5,275 विलफुल डिफॉल्टर्स हैं और इन पर भारतीय बैंकों का करीब 8.56 अरब डॉलर यानी 56,521 करोड़ रुपये बकाया है. यह रकम 2016-17 के केंद्रीय बजट में सरकार की तरफ से कृषि और किसान कल्याण के मद में आवंटित 35,984 करोड़ रुपये की रकम से 1.5 गुणा ज्यादा है.

सिबिल के आंकड़ों के मुताबिक देश के पांच बड़े डिफॉल्टर्स में मुंबई की डायमंड कंपनी विनसम डायमंड एंड ज्वैलर्स लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनी फॉरएवर प्रीसियस ज्वैलरी एंड डायमंड लिमिटेड शामिल है.

अन्य बड़े डिफॉल्टर्स में विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस, इंदौर की रियल एस्टेट कंपनी जूम डिवेलपर्स, बीटा नैफ्थॉल और कानपुर की कंपनी राजा टेक्सटाइल्स है.

कार्रवाई नहीं होने की वजह से पिछले एक दशक में विलफुल डिफॉल्टर्स की संख्या बढ़ी है. 2002 में जहां विलफुल डिफॉल्ट की कुल रकम 6,291 करोड़ रुपये थी वह 2015 में 9 गुणा बढ़कर 56,521 करोड़ रुपये हो गई.

विलफुल डिफॉल्टर्स पर सबसे ज्यादा सरकारी बैंकों का कर्ज है. विलफुल डिफॉल्टर्स की कुल रकम में करीब 79 फीसदी सरकारी बैंकों का है. निजी बैंक और विदेशी बैंक विलफुल डिफॉल्टर्स की नकेल कसने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुकाबले सफल रहे हैं.

First published: 31 May 2016, 6:05 IST
 
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