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अदालत में ED का दावा- माल्या, मोदी ही नहीं अन्य 36 कारोबारी भी देश छोड़कर भागे

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 April 2019, 12:28 IST

 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले में गिरफ्तार कथित रक्षा एजेंट सुषेन मोहन गुप्ता की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उनके देश से भागने की संभावना थी, जैसे 36 अन्य व्यवसायी जिनके खिलाफ आपराधिक मामले थे और वो देश से भाग गए हैं. ईडी ने विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार को बताया कि विजय माल्या और नीरव मोदी सहित 36 कारोबारी हाल के दिनों में देश छोड़कर भाग गए हैं, जबकि उनकी समाज में अच्छी जान-पहचान थी.

एक रिपोर्ट के अनुसार जांच एजेंसी के विशेष सरकारी वकील डी.पी. सिंह और एन.के. मट्टा ने कहा, '' माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और संदेसारा बंधु (स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड प्रमोटर्स) जैसे 36 व्यवसायी हैं जो पिछले कुछ वर्षों में देश से भाग गए थे.”

 

तर्क के दौरान ईडी के अधिवक्ता संवेदना वर्मा ने अदालत को बताया कि जांच एक महत्वपूर्ण चरण में थी और एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि गुप्ता की डायरी में "आरजी" किसे कहा गया है. वर्मा ने गुप्ता पर मामले में गवाहों को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया और अदालत को बताया कि उन्होंने सबूतों को नष्ट करने की भी कोशिश की. अदालत ने गुप्ता की जमानत याचिका पर 20 अप्रैल के लिए आदेश सुरक्षित रखा है.

गुप्ता ने इस आधार पर राहत मांगी है कि एजेंसी ने पहले ही जांच पूरी कर ली है और मामले में आरोप पत्र दायर कर दिया है. अपनी जमानत अर्जी में आरोपी ने अदालत को बताया कि ईडी का देश से भागने वाला आरोप उनकी पिछली गतिविधियों को देखते हुए खारिज किया जा सकता है, जब भी उन्हें बुलाया गया वह जांच में शमिल हुए. अदालत में ईडी का बयान पहली बार नहीं है जब केंद्र या उसकी एजेंसियों ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि आपराधिक आरोपों का सामना करने वाले समृद्ध भारतीयों की एक बड़ी संख्या ने देश छोड़ने के लिए जांच को चकमा देने में कामयाबी हासिल की है.

इस साल जनवरी में वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने लोकसभा को बताया कि 27 लोग जो आर्थिक अपराधों और लोन डिफ़ॉल्ट के आरोपों का सामना कर रहे थे, वे पिछले पांच वर्षों में देश से भाग गए. शुक्ला ने यह भी कहा कि इंटरपोल को इनमें से 20 लोगों के खिलाफ रेड-कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए कहा गया है.

मार्च 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम. जे. अकबर ने संसद को बताया कि आरोपों का सामना कर रहे 31 कारोबारी भाग देश छोड़कर गए. इनमें ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो के आरोपों का सामना करने वाले व्यक्ति शामिल थे. इस सूची के आने के बाद केंद्र ने कथित रूप से 91 लोगों की एक सूची तैयार की, जिन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी.

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First published: 16 April 2019, 12:26 IST
 
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