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सत्ताधारी BJP को मिला इलेक्टोरल बॉन्ड योजना का सबसे ज्यादा लाभ, कैश में चंदा हुआ कम

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 April 2019, 17:01 IST

दो प्रमुख राष्ट्रीय दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को दिए गए दान ऑडिट रिपोर्ट से पता चलता है कि इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के कार्यान्वयन ने लोगों ने नगदी में कैश देना कम कर दिया है. हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार इलेक्टोरल बांड से सत्तारूढ़ दल को वित्तीय वर्ष 2017-18 में कुल 221 करोड़ के में से 210 करोड़ मिले. जबकि कांग्रेस को केवल 5 करोड़ और बाकी पार्टियों को 6 करोड़ मिले. सरकार ने लोकसभा में कहा था कि वित्त वर्ष 2018 में 222 करोड़ के 520 इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए गए थे, जिनमें से 221 करोड़ के मूल्य 511 बांड रिडीम कए गए.

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने बेनामी-आधारित फंडिंग स्कीम के खिलाफ तर्क दिया, क्योंकि यह शेल कंपनियों के माध्यम से काले धन को पार्टियों को दान करने के लिए संभव बनाता है. कहा गया कि यह अधिकांश चंदा सत्तारूढ़ पार्टी की तरफ जाता है.

दिलचस्प बात यह है कि भारत के चुनाव आयोग ने भी नाम न छापने की दलील देते हुए इस योजना की आलोचना की है क्योंकि यह पारदर्शिता के खिलाफ है और नागरिकों को राजनीतिक दलों के लिए धन के स्रोतों को जानने से रोकता है.

 

जब 2017 में वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा चुनावी बांड योजना की घोषणा की गई थी, तो सरकार ने इसे "राजनीतिक फंडिंग की प्रणाली को साफ करने" के उपाय के रूप में टाल दिया था. वित्तीय वर्ष 2017-18 में भाजपा को कुल चंदा और संग्रह के रूप में 990 करोड़ मिले, जो कांग्रेस के 142.8 करोड़ से लगभग सात गुना अधिक है. भाजपा को वित्तीय वर्ष 2016-17 में छह राष्ट्रीय पार्टियों (भाजपा, कांग्रेस, राकांपा, माकपा, भाकपा, एआईटीसी) को दिए गए 20,000 से ऊपर के कुल दान का 66.34% प्राप्त हुआ. वित्त वर्ष 2017-18 में भाजपा की हिस्सेदारी बढ़कर 73.49% हो गई.

 

First published: 20 April 2019, 17:01 IST
 
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