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80 किलोमीटर भी नहीं चल पायी TATA और Mahindra की इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 June 2018, 12:38 IST

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड और टाटा मोटर्स लिमिटेड द्वारा बनाई गई इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया है. इन कंपनियों के वाहनों को ऊर्जा मंत्रालय के तहत आने वाले ईईएसएल द्वारा खरीदा जाता है. बताया गया है कि इन गाड़ियों में चार्जिंग की दिक्कत और कम माइलेज के कारण इन्हें रोका गया है. लाइव मिंट की रिपोर्ट के अनुसार जिन दो मॉडल्स के इस्तेमाल से इंकार किया गया है उनमे महिंद्रा की ई-वेरिटो और टाटा मोटर्स की टिगोर का इलेक्ट्रिक वेरिएंट शामिल है.

टाटा मोटर्स और महिंद्रा पहले चरण में केंद्र सरकार को 350 और 150 इकाइयों की आपूर्ति कर रहे थे. इसके बाद ऑटो निर्माताओं को ईएसईएल को 9,500 इकाइयों के इलेक्ट्रिक वाहन देने थे. जिसमें एमएंडएम कुल मिलाकर 40% था. ई-वेरिटो की कमियों को ध्यान में रखते हुए महिंद्रा एक नया इलेक्ट्रिक वाहन विकसित कर रहा है.

वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ये दोनों मॉडल शहर के भीतर एक ही चार्ज पर 80-82 किमी तक नहीं चल पाए. वैश्विक मानकों की तुलना में बैटरी क्षमता भी इसमें कम पायी गई. हालांकि लाइव मिंट की रिपोर्ट के अनुसार ईईएसएल ने कहा कि दिल्ली और आंध्र प्रदेश में सड़कों पर 150 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन हैं. कंपनी ने सरकारी उपयोग के लिए वाहनों की खरीद में देरी का कारण निर्दिष्ट नहीं किया और न ही इनकार किया कि अधिकारियों ने वाहनों का उपयोग करने से इंकार कर दिया था.

 

रिपोर्ट के अनुसार ईईएसएल के एक प्रवक्ता ने कहा, "चूंकि यह एक नई तकनीक है, इसलिए हम अपने ग्राहकों को इसे देने से पहले उत्पादों पर विश्वास हासिल करना चाहते थे. इन दो मॉडलों के बैटरी पैक 17 किलोवाट (केडब्ल्यू) हैं, जबकि वैश्विक मानक 27-35 किलोवाट है. हाल ही में, ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण 10,000 इकाइयों के दूसरे निविदा को 2019 तक स्थगित कर दिया गया.

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First published: 27 June 2018, 11:59 IST
 
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