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आखिर भारत में कैसे आयी ब्रिटेन की विवादित कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ?

सुनील रावत | Updated on: 23 March 2018, 12:58 IST

फेसबुक से करोड़ों यूजर्स का डेटा चुराने वाली ब्रिटेन की विवादित कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ने अपनी वेबसाइट पर दावा किया है कि उसने 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में एक पार्टी के लिए काम किया था. कंपनी का कहना है कि इस चुनाव ने उसके क्लाइंट ने जोरदार जीत हासिल की थी. 2013 में स्थापित, कैम्ब्रिज एनालिटिका की मूल कंपनी स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन लैबोरेट्रीज (एससीएल) है. इसने भारत में स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन लैबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड नामक एक भारतीय कंपनी के माध्यम से काम किया.

कंपनी के रिकॉर्ड बताते हैं कि फर्म के चार डायरेक्टर हैं -अलेक्जेंडर जेम्स एशबर्नर निक्स, अलेक्जेंडर वाडिंगटन ओके, अमरीश कुमार त्यागी, और अवनीश कुमार राय. पहले दो ब्रिटिश नागरिक हैं जो 2005 में यूके में एससीएल के चार सह-संस्थापकों में शामिल थे. अमरीश त्यागी जनता दल (यूनाईटेड) के नेता के.सी. त्यागी के बेटे हैं. वह ऑवलेनो बिजनेस इंटेलिजेंस नाम की एक फर्म भी चलाते हैं. जो अब भारत में कैंब्रिज एनालिटिका के साथ काम करती है. लेकिन एससीएल इंडिया के चौथे निदेशक अवनीश कुमार राय  कुमार राय कौन हैं?

न्यूज़ वेबसाइट 'द प्रिंट' के अनुसार अवनीश कुमार राय 1984 से लगातार एक राजनीतिक कंसल्टेंट के रूप में पार्टियों के लिए काम करते आ रहे हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के नेता महेश शर्मा के लिए काम किया था, जो वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं. राय को यकीन था कि शर्मा यह चुनाव जीत रहे हैं. गौतम बुध नगर सीट से शर्मा बहुजन समाजवादी पार्टी के नेता सुरेन्द्र सिंह से 16000 वोट से हार गए.

राय यह नही समझ पा रहे थे कि आखिर शर्मा वह चुनाव कैसे हार गए. राय ने इस बारे में अपने एक लन्दन स्थित दोस्त से बात की. मित्र ने सुझाव दिया कि उन्हें यू.के. में राजनीतिक व्यवहार के विशेषज्ञों को गौतम बुद्ध नगर बुलाना चाहिए और इसका पता करना चाहिए.

रोमानियाई मूल के मूरेशन 'बिहेवियरल डायनेमिक्स इंस्टिट्यूट' के तीन विशेषज्ञों के साथ भारत आए. इस संस्थान की स्थापना 1993 में निगेल ओक्स द्वारा की गई थी. ओक्स और उसके भाई अलेक्जेंडर ओक्स ने बाद एससीएल की अलेक्जेंडर निक्स के साथ स्थापना की. मूरेशंस की टीम ने गौतम बुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र के हिस्से जेवर विधानसभा खंड में अनुवादकों के माध्यम से साक्षात्कार लिया, जहां महेश शर्मा को बेहद कम वोट मिले थे.

महीने भर के लम्बे रिसर्च के बाद उन्होंने बताया कि लोगों ने शर्मा को राजनीतिज्ञ या डॉक्टर के रूप में नहीं देखा, बल्कि एक अमीर बिजनेसमैन (वह नोएडा में एक अस्पताल चलाते हैं. जिसने अब उत्तर भारत में अस्पतालों की एक श्रृंखला को विकसित किया है). के रूप में देखा.

शर्मा लोगों को किसी भी विकास के सपने को दिखाने में असफल रहे हैं, कोई विशिष्ट वादे नहीं किये और केवल अस्पष्ट रूप से कहा कि वे उनकी सेवा करेंगे. राय लंदन टीम के इन तरीकों से प्रभावित हुए, और मूरेशन ने कहा कि वह भारत में और काम करने के लिए उत्सुक हैं.

2010 में राय बिहार में कुछ उम्मीदवारों के साथ काम कर रहे हैं. राय अपने परिवार के मित्र अमरीश त्यागी के साथ ख़ुफ़िया इंटेलिजेंस में काम करते थे, जो मुख्य रूप से फार्मा कंपनियों के लिए बाजार में नकली दवाओं का पता लगाने का काम करते थे. एक दिनमूरेशन, अलेक्जेंडर निक्स के साथ दिल्ली आये और ऑवलेनो बिजनेस इंटेलिजेंस के कार्यालय में राय से मिले, उस वक़्त त्यागी भी वहां बातचीत में शामिल थे.

मूरेशन जानते थे कि राय कई राज्यों में घरों से डाटाबेस बनाने में शामिल थे. ऐसे में वह किसी भी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए इस तरह का डेटाबेस उपलब्ध करवा सकते हैं. मुरेशन और उनकी टीम ने इस प्रोजेक्ट का विस्तार करने और 28 सीटों के लिए इस तरह का एक डाटाबेस तैयार करने की पेशकश की, जिसको वह 2014 के लोकसभा चुनावों में दलों और राजनेताओं को बेचना चाहते थे. यह चुनाव करीब चार साल दूर था. राय ने अपने ग्राहकों की आसानी के लिए एक मोबाइल ऐप तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा.

राय का कहना है कि एससीएल टीम बिहार में कभी नहीं गई और न ही बिहार चुनाव में भी कोई काम नहीं किया। यह राय ही थे जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत क्षमता के दम पर लगभग 27 उम्मीदवारों के साथ काम किया था. बिहार 2010 में काम करने के दावों, और 2003 में राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे अन्य चुनावों को एससीएल के पावरपॉइंट प्रस्तुतियों में जोड़ा गया ताकि ग्राहकों में भरोसा जगा सके.

First published: 23 March 2018, 12:51 IST
 
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