Home » बिज़नेस » Failed tea party: why Govt's been advised to go against promises made on GST
 

जीएसटी: कांग्रेस और बीजेपी के बीच फंसा है बस 'एक पेंच'

नीरज ठाकुर | Updated on: 3 December 2015, 8:24 IST
QUICK PILL

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती दिख रही है. दोनों तरफ से मुद्दों को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है.

27 नवंबर को एनडीए के शीर्ष नेतृत्व ने कांग्रेस के बड़े नेताओं से बातचीत की. बैठक के बाद ख़बर आई कि दोनों दलों के बीच अब बस एक मुद्दे पर असहमति बची है. बैठक को सफल और गतिरोध तोड़ने वाला बताया गया.
हालांकि, सरकार के सलाहकारों ने कहा है कि कांग्रेस की मांग को पूरी तरह नहीं माना जा सकता है.

विशेषज्ञों की राय

कांग्रेस जीएसटी कानून के लिए संविधान संशोधन और जीएसटी अधिनियम में राज्यों के लिए 18 फीसदी हिस्सा देने की मांग पर अड़ी है. जीएसटी के मुद्दे पर सरकार को सलाह दे रहे विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी सरकार को यह सलाह नहीं माननी चाहिए.

इस मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को कांग्रेस के साथ हुई बैठक के बाद एनडीए नेतृत्व ने विशेषज्ञों के समूह से मुलाकात की. विशेषज्ञों के अनुसार 18 फीसदी हिस्सा तय करने पर सरकार आगे मुश्किल में फंस सकती है.
सरकार से जुड़े एक सूत्र ने कैच को बताया, '' मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रामण्यम की अध्यक्षता में गठित पैनल को सरकार ने जीएसटी के मुद्दे पर पहले ही इशारा कर दिया था. सरकार ने पैनल से कहा है कि जब वह रिपोर्ट प्रस्तुत करे तो राज्यों के लिए किसी निश्चित हिस्से का जिक्र ना करे.''

जीएसटी लागू करने पर सरकार के लिए रेवेन्यू न्यूट्रल रेट तक पहुंचना मुश्किल काम होगा. किसी भी गलत आकलन के कारण सरकार को जीएसटी लागू होने पर उस साल भारी राजस्व के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.
सूत्र के अनुसार, ''18 फीसदी के फिक्स रेट से सरकार उस आय की भरपाई नहीं कर पाएगी जो उसे पेट्रोलियम उत्पादों, तंबाकू और लग्जरी सामान जैसे अधिक टैक्स वाले उत्पादों से होती है. सरकार को जीएसटी का रेट तय करने के लिए ऐसे उत्पादों से मिलने वाले रेवेन्यू की अलग-अलग दरों को ध्यान में रखना होगा.''

कांग्रेस देश में जीएसटी लागू करने के पक्ष में है लेकिन पार्टी सरकार की लचीली दरों को अपनाने का विरोध कर रही है

जीएसटी बिल लागू होने के बाद हर सामान और सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी पूरे देश में वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स की जगह एक ही टैक्स लगेगा.

जीएसटी व्यवस्था के तहत विनिर्माण क्षेत्र में आगे कुछ राज्यों को राजस्व की हानि हो सकती है. जिन राज्यों में वस्तुओं की खपत होगी वहां की सरकारें कर वसूलेंगी.

बीजेपी सरकार ने रेवेन्यू न्यूट्रल होने की स्थिति तक उन राज्यों के लिए एक फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रावधान किया था, जहां मैन्युफैक्चरिंग होती है. यानी जीएसटी लागू किए जाने के बाद सरकार अप्रत्यक्ष कर संग्रह के मामले में ना फायदे की स्थिति में होगी और ना ही उसे नुकसान उठाना पड़ेगा.

कांग्रेस ने सरकार को मजबूर किया. उस दबाव में सरकार एक फीसदी मैन्युफैक्चरिंग टैक्स खत्म करने के लिए तैयार हुई

जीएसटी बिल पिछले साल लोकसभा में पारित किया गया था. राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है. इसलिए बिल पास कराने के लिए वो विपक्षी पार्टियों पर निर्भर है.

सरकार ने कहा कि अगर बिल संसद के चालू शीतकालीन सत्र में पारित हो जाता है तो 1 अप्रैल 2016 से इसे लागू किया जा सकेगा.

First published: 3 December 2015, 8:24 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी