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ब्लैकमनी FDI बनकर आ रही है वापस, सरकार के आंकड़े कुछ ऐसा ही इशारा करते हैं

सुनील रावत | Updated on: 29 July 2018, 12:15 IST

केमैन आइसलैंड दुनिया के सबसे कुख्यात टैक्स हेवनो में गिना जाता है, लेकिन सबसे चौकाने वाली बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान भारतीय बाजार में इस रास्ते विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) इक्विटी के रूप में 1,600% अधिक की बढ़ोतरी हुई है.

हालही में संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मॉरीशस और सिंगापुर समेत शीर्ष दस एफडीआई स्रोत देशों में एफएमआई इक्विटी प्रवाह में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई. केमैन द्वीपसमूह से एफडीआई 2017-18 में वित्तीय वर्ष 2016-17 में सिर्फ 71.03 मिलियन डॉलर से 1.23 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया.

संसद के आंकड़ों से पता चलता है कि केमैन द्वीप समूह न केवल विकास के मामले में सबसे ऊपर है, बल्कि जर्मनी, हांगकांग और संयुक्त अरब अमीरात के पूर्ण एफडीआई शर्तों में भी आगे है जो भारत के एफडीआई के शीर्ष 10 स्रोतों में से हैं.

आंकड़ों के अनुसार 2017-18 में जर्मनी में एफडीआई 1.17 अरब डॉलर थी, इसके बाद हांगकांग (1.05 अरब डॉलर) और संयुक्त अरब अमीरात से (1.04 अरब डॉलर) था.

अख़बार डीएनए की एक रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ वित्त मंत्रालय अधिकारी ने बताया कि इसके पीछे कारण कम कराधान जैसे नियम हैं, जिसने केमैन द्वीप समूह को विश्वव्यापी कंपनियों के लिए सर्वोत्तम जगहों में बदल दिया है.

कुछ हद तक भारतीय भी ऐसे टैक्स हेवन के माध्यम से अपने पैसे वापस ले रहे हैं. अमीर लोग अपना पैसा ज्यादातर स्विस बैंक और केमैन द्वीपसमूह जैसी जगहों में अपना पैसा रखते हैं, जहां उन्होंने पारंपरिक फंडों जैसे यूसीटीआईएस (स्थानांतरण योग्य प्रतिभूतियों में सामूहिक निवेश के लिए उपक्रम) में निवेश किया है.

वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सीआर चौधरी ने 23 जुलाई को लोकसभा के एक लिखित उत्तर में लोकसभा को सूचित किया कि भारत में एफडीआई की वृद्धि दर 2017-18 में 3.8% की गिरावट के साथ 44.85 अरब डॉलर हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक मॉरीशस 15.9 4 अरब डॉलर के साथ भारत का शीर्ष एफडीआई स्रोत है, इसके बाद सिंगापुर 12.18 अरब डॉलर है.

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First published: 29 July 2018, 12:11 IST
 
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