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फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर बढ़ाई और डॉलर गिरा: सेंसेक्स में फिर उछाल

भावेश शाह | Updated on: 17 March 2017, 7:38 IST

पिछले साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने जब ब्याज दर में बढ़ोतरी की थी, तभी अनुमान था कि उसमें और बढ़ोतरी होगी. बुधवार को फेडरल रिजर्व ने 0.25 प्रतिशत ब्याज दर में बढ़ोतरी कर दी है. इस साल 2 और बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि वॉल स्ट्रीट ने 3 की उम्मीद लगाई थी. यह भी अनुमान है कि अमेरिका में ब्याज दर की साइकिल उत्तर की ओर बढ़ रही है, और धीमी गति से. कैश की लिक्विडिटी ने शेयर में उछाल लाते हुए डॉलर में गिरावट ला दी है.

बाजार बंद होने तक, अमेरिकी शेयर उंचे थे और अभी, एशियाई शेयर 18 महीने ऊंचे हैं. सब जगह सकारात्मकता होने से भी निफ्टी और सूचीबद्ध एनएसई के 50 प्रमुख शेयरों का सूचकांक 9151 पर पहुंच गया. दलाल स्ट्रीट पर मूड उम्मीदों वाला बना हुआ है. ज्यादातर ब्रोकर शेयर खरीदने की सलाह दे रहे हैं, यदि हैं तो.

निफ्टी के 50 शेयरों का सूचकांक 9150 पार कर गया. यह जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले हुआ. इस उछाल को बैंक और वित्तीय, तकनीकी, ऑटो, फार्मा और मेटल के शेयरों ने प्रोत्साहित किया. बीएसई के 30 शेयरों ने 29,577.43 सूचकांक पर 179.32 प्वॉइंट प्राप्त किए. और एनएसई निफ्टी के 50 शेयरों के 9143.45 सूचकांक पर 58.65 प्वॉइंट्स बढ़े.

इस बीच डॉलर में गिरावट की एक वजह डच चुनाव भी था. एक्जिट पोल में चरम दक्षिण पंथी प्रतिद्वंद्वी (फार-राइट राइवल) पर प्रधानमंत्री की भारी बहुमत से जीत हुई. इस जीत ने बता दिया कि नीदरलैंड यूरोपीय संघ के आर्थिक गुट में बना रहेगा और आम करेंसी को मजबूत करेगा.

 

खुदरा निवेशक भुना रहे हैं

संतुलित बजट के ठीक बाद जो भारतीय शेयर में उछाल आया, वह खुदरा निवेशकों में उत्साह नहीं भर सका. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार संस्थागत निवेशकर्ता (विदेशी और घरेलू दोनों)शेयर खरीद रहे हैं, पर ब्रोकर्स के साथ पंजीकृत क्लाइंट्स बेच रहे हैं. बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक क्लाइंट्स ने मार्च में 2,404 करोड़ रुपयों के शेयर बाजार में बेच दिए हैं. 2017 के कैलेंडर वर्ष के 7,983 करोड़ रुपए से यह आंकड़ा तिगुना है.

इसी तरह एनएसई क्लाइंट्स ने भी 2,647 करोड़ रुपयों के शेयर बेच दिए हैं. इसकी तुलना में विदेशी संस्थागत निवेशकर्ता ने भारतीय शेयरों में बुधवार तक 13,400 करोड़ रुपए शेयर पर लगाए.

जो म्यूचुअल फंड्स अक्टूबर से लगातार सात महीने तक खरीद रहे थे, उससे भी फायदा हुआ, क्योंकि नवंबर में नोटबंदी की घोषणा के बाद से आई गिरावट की बाजार अब क्षतिपूर्ति कर रहा है.

 

आगे की चुनौतियां

सूचकांक को उच्चतम बनाए रखने के लिए शेयरों के दामों में बढ़ोतरी बनाए रखने की जरूरत है. इसके लिए भारतीय शेयरों को कुछ चुनौतियों को दूर करना होगा. सकारात्मकता और कैश की आपूर्ति बढ़ाने (लिक्विडिटी) से शेयर के दामों में गिरावट के समय काफी सहयोग मिलेगा. हालांकि निवेशक शेयर तभी खरीदेंगे जब उन्हें मुनाफा होगा और उनकी कमाई बढ़ेगी.

हाल ही में विधानसभा चुनावों में मोदी शासन के लिए निर्णायक जनादेश से भी निवेशकों को उम्मीद बंधी है. उन्हें आशा है कि सरकार आर्थिक सुधार करेगी, जिससे निवेश और खपत में वृद्धि होगी. पिछले दो सालों से इन दोनों महत्वपूर्ण बातों में मंदी थी.

दूसरा अहम मुद्दा यह है कि देश में स्थाई ब्याज दर का माहौल रहे. थोक मूल्य इंडेक्स का बेस इफैक्ट घट रहा है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ेगी, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा बताई मुद्रास्फीति से भी ज्यादा.

देश में सेंट्रल बैंक ने अपना रवैया कैश की सप्लाई बढ़ाने की जगह तटस्थ मुद्रा का कर लिया है. मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी से हाल की साधारण ब्याज दर में बढ़ोतरी हो सकती है, और खपत में मंदी आएगी.

सरल शब्दों में इन सब में तेजी या नीतियों से निवेश और खपत को सहयोग मिलेगा, तो दलाल स्ट्रीट उसे खुशी-खुशी अपनाएगा. दूसरी ओर, कंपनी की आय को निश्चित करने वाले किसी भी कारक पर नकारात्मक प्रभाव से शेयर बाजार में सुधार होगा.

First published: 17 March 2017, 7:38 IST
 
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