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पीएफ पर मिलने वाले ब्याज में कमी कर सकती है सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 September 2016, 17:10 IST

अब ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) में अपना अंशदान करने वाले कर्मचारियों को इसके ब्याज में 0.2 फीसदी कटौती का सामना करना पड़ सकता है. सूत्रों के मुताबिक सरकार चाहती है कि बीते वर्ष के 8.80 फीसदी ब्याज की तुलना में इसे 8.60 कर दिया जाए. अगर ऐसा होता है तो ईपीएफओ में जमा रकम पर अंशधारकों को कम ब्याज मिलेगा.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक ईपीएफओ के चार करोड़ से ज्यादा अंशधारक हैं. ईपीएफओ द्वारा 2015-16 में वित्त मंत्रालय के 8.70 फीसदी ब्याज देने की सिफारिश के बावजूद 8.80 फीसदी की दर से जमा पर ब्याज दिया गया था. लेकिन अब यह जानकारी सामने आ रही है कि सरकार चालू वित्त वर्ष में इस जमा रकम पर मिलने वाले ब्याज को 8.60 फीसदी कर सकती है.

सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्रालय चाहता है कि श्रम मंत्रालय ईपीएफ पर ब्याज को अपने अधीन अन्य लघु योजनाओं के मुताबिक ही रखे. दोनों मंत्रालयों के बीच मौजूदा वित्त वर्ष में ब्याज दर को 8.60 फीसदी रखने को लेकर तकरीबन सहमति बन चुकी है.

सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय की ख्वाहिश है कि पीपीएफ जैसी लघु बचत योजनाओं के लिए ब्याज को घटाकर 8.60 फीसदी पर ले आया जाए क्योंकि अब सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य बचत पत्रों पर होने वाली आय घट रही है. 

वहीं, श्रमिक संगठनों का मानना है कि वित्त मंत्रालय को सीबीटी के फैसले पर अतिक्रमण नहीं करना चाहिए क्योंकि ईपीएफ कर्मचारियों की रकम है और उन्हें अपने कोष के निवेश से होने वाली आय से ही ब्याज मिलता है.

बता दें कि ईपीएफओ का सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (सीबीटी) आय अनुमान के मुताबिक ही ब्याज निर्धारण का फैसला करता है. सीबीटी द्वारा वित्तीय वर्ष के लिए तय किए गए ब्याज को वित्त, ऑडिट और निवेश समिति की मंजूरी जरूरी होती है. जब सीबीटी द्वारा बताई गई ब्याज दर पर वित्त मंत्रालय अपनी संस्तुति दे देता है तो इसे अधिसूचित कर दिया जाता है. 

First published: 11 September 2016, 17:10 IST
 
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