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Flashback 2018 : मोदी सरकार के लिए वरदान बनकर आया ये कानून, वापस आये कर्जदारों से 80,000 करोड़

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 December 2018, 16:38 IST

दिसंबर 2016 में लागू एक नए कानून ने साल 2018 में मोदी सरकार को सबसे बड़ी राहत दी. इस दिवालिया कानून इन्सॉल्वंसी ऐंड बैंकरप्ट्सी कोड (आईबीसी) के तहत कार्रवाई शुरू हो जाने के बाद कई कंपनियों के मालिकों को अपनी कंपनियों को खोने का डर सताने लगा. ताजा आंकड़ों के अनुसार इस कानून ने बीते साल में 80,000 करोड़ से अधिक की दिवालिया और दिवालिया कार्यवाही को हल करने में मदद की.

उम्मीद जताई जा रही है कि 2019 में इसके तहत रिकवरी 1 ट्रिलियन रुपये तक बढ़ने की उम्मीद है. जिसमें कई बड़े डिफ़ॉल्ट मामले लंबित हैं. सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जजों और बेंचों की संख्या में वृद्धि करके और नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) को मजबूत करने के लिए योजनाएं शुरू की गई हैं, सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक करने के लिए पर्याप्त आधारभूत संरचना प्रदान किया जा रहा है.

नया साल न केवल इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के मेटल्स का परीक्षण करेगा, बल्कि NCLT और इसके अपीलीय निकाय NCLAT का भी होगा, क्योंकि कई हाई-प्रोफाइल मामलों को हल करने की आवश्यकता है. इसमें जो मामले हैं उनमे एस्सार स्टील (800 बिलियन रुपये से अधिक) अकेले) और भूषण पावर एंड स्टील (इसके उधारदाताओं के कारण लगभग 450 अरब रुपये) है.

 

2018 में एनसीएलटी और एनसीएलएटी (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल) में विभिन्न इनसॉल्वेंसी प्रोसीजर के माध्यम से आईबीसी के तहत विभिन्न कॉरपोरेट देनदारों से 800 बिलियन से अधिक का भुगतान किया गया. अनुमान के अनुसार, IBC ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से - लगभग 3 ट्रिलियन रुपये मूल्य की तनावग्रस्त संपत्तियों के मामले में की मदद की है.

2019 में एनसीएलटी द्वारा देशभर में अपनी 11 कार्यात्मक बेंचों के माध्यम से कई स्ट्रेस्ड एसेट्स की कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की उम्मीद है. इन मामलों में एस्सार स्टील, भूषण पावर एंड स्टील, वीडियोकॉन ग्रुप, मोनेट इस्पात, एमटेक ऑटो, रूचि सोया, लैंको इंफ्राटेक, जेपी इंफ्राटेक शामिल होंगे.

2018 में भूषण स्टील, इलेक्ट्रोस्टील स्टील, बिनानी सीमेंट सहित कुछ कंपनियों के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही लगभग पूरी हो गई थी और उनके सफल बोलीदाताओं- टाटा स्टील, वेदांता समूह और आदित्य बिड़ला के नेतृत्व वाली अल्ट्राटेक के नए प्रबंधन ने क्रमशः प्रबंधन पर कब्जा कर लिया है. आर्सेलर मित्तल, टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, यूके स्थित लिबर्टी ग्रुप, वेदांता समूह, डालमिया भारत समूह सहित बड़े कॉरपोरेट घराने अग्रणी कंपनियों में से एक थे जिन्होंने ऋण समाधान फर्मों का अधिग्रहण करने के लिए अपनी संकल्प योजना प्रस्तुत की थी.

एनसीएलटी और एनसीएलएटी द्वारा संभाले जा रहे अन्य प्रमुख दिवालिया मामलों में आरकॉम, वीडियोकॉन समूह, आलोक इंडस्ट्रीज, लैंको इंफ्राटेक, जेपी इंफ्राटेक, ज्योति स्ट्रक्चर्स और एबीजी शिपयार्ड शामिल हैं.

हालांकि IBC ने NCLT द्वारा रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल की नियुक्ति के 180 दिनों के भीतर इन्सॉल्वेंसी की कार्यवाही पूरी करने का आदेश दिया है, जिसमें 90 दिनों के 270 दिनों के कुल विस्तार के प्रावधान के साथ कई मामले तय समय से पीछे चल रहे हैं. 270-दिन की समयसीमा बहुमत के मामलों में पूरी नहीं हो सकी, लेकिन एनसीएलटी और एनसीएलएटी ने बड़े पैमाने पर उचित निर्णय दिए हैं.
एस्सार स्टील सहित कुछ प्रमुख IBC मामलों में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कर्मचारियों की कमी है और सरकार को अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति करनी चाहिए.

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First published: 26 December 2018, 13:06 IST
 
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