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Flashback 2018: 10 लाख करोड़ के पार पहुंचा बैंकों का NPA, सबसे ज्यादा कर्ज किसका ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 December 2018, 11:09 IST

 मार्च 2018 की तिमाही में भारतीय बैंकों का एनपीए 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया. इसने जानकारों को आश्चर्यचकित किया है. आश्चर्य नहीं कि मार्च 2017 की तिमाही में सभी सूचीबद्ध बैंकों का सकल एनपीए मार्च तिमाही में 8.86 ट्रिलियन से 10.25 ट्रिलियन हो गया. कुल ऋण पुस्तिका का मार्च स्तर लगभग 11.5 प्रतिशत था.

पुनर्गठन, और ऋण को एनपीए में आने का संदेह है, शेयर लोन बुक का 13-14 प्रतिशत हो सकता है. RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट कहती है कि मार्च 2019 तक बैंकिंग प्रणाली का सकल एनपीए अनुपात 12.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

अच्छी खबर यह है कि सकल NPA ने जून में और फिर सितंबर तिमाही में गिरावट का रुख दिखाया. यह काफी हद तक सख्त इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, या इसके डर के कारण है. बैंकर्स अब मानते हैं कि एनपीए का मान्यता हिस्सा खत्म हो गया है, और वसूली शुरू करने की जरूरत है.

भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के फंसे हुए कर्जे में सबसे बड़ी हिस्सेदारी कॉर्पोरेट ऋण की है. आंकड़ों के मुताबिक यह हिस्सेदारी लगभग तीन चौथाई है. आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों का कुल 6.41 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है. इसमें उद्योग जगत की हिस्सेदारी चार लाख 70 हजार करोड़ के करीब है. यह बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज का करीब 37 फीसदी है.

आंकड़ों के मुताबिक कर्ज में 22.83 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले रीटेल सेक्टर में एनपीए का आंकड़ा केवल 3.71 फीसदी (23,795 करोड़ रु) है. इसके अलावा कृषि क्षेत्र में यह नौ फीसदी और सेवा क्षेत्र में 13.21 फीसदी है.

First published: 26 December 2018, 11:01 IST
 
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