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फ्लिपकार्ट, अमेजॉन और स्नैपडील को मिलाकर 5000 करोड़ रुपये का नुकसान

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 26 January 2016, 9:36 IST
QUICK PILL
  • बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तीनों दिग्गजों के बीच जमकर प्रतिस्पर्धा चल रही है. जिसके चलते इन्हें कर्मचारियों, विपणन और प्रचार पर भारी खर्च करना पड़ रहा है.
  • भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 40 करोड़ हो चुकी है. इनमें से 30 करोड़ यूजर्स महीने में कम से कम एक बार इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं और चार करोड़ लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं.

ज्यादा से ज्यादा डिस्काउंट देकर भारी तादाद में ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के फेर में उलझी टॉप ई-कॉमर्स कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. भारत में फ्लिपकार्ट, अमेजॉन और स्नैपडील जैसी ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनियां अब 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठा चुकी हैं. 

एक रिपोर्ट के अनुसार अमेजॉन इंडिया का भारतीय व्यापार 2013-14 में 169 रुपये करोड़ से छह गुना बढ़कर 2014-15 में 1,022 करोड़ रुपये हो गया. बावजूद इसके मार्च 2015 के बीते वित्तीय वर्ष में अमेजॉन इंडिया का शुद्ध घाटा 1,724 करोड़ रहा, जबकि अमेजॉन इंक के भारतीय व्यापार का घाटा 321 करोड़ रुपये रहा.

इस बीच भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट द्वारा नियंत्रित दो मुख्य कंपनियों ने मार्च 2015 को समाप्त वित्तीय वर्ष में करीब 2,000 करोड़ रुपये का घाटा उठाया. जबकि इससे पिछले वित्तीय वर्ष में यह नुकसान 715 करोड़ रुपये का था.

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जैस्पर इंफोटेक द्वारा संचालित ई-कॉमर्स बाजार स्नैपडील को भी मार्च 2015 तक समाप्त वित्तीय वर्ष में 1,328 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा. 

बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तीनों दिग्गजों के बीच जमकर प्रतिस्पर्धा चल रही है. जिसके चलते इन्हें कर्मचारियों, विपणन और प्रचार पर भारी खर्च करना पड़ रहा है.

अमेजॉन इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि वर्ष 2015 में उनका पोर्टल, देश की सबसे ज्यादा क्लिक की जाने वाली वेबसाइट थी. जबकि इसी दौरान अन्य शॉपिंग कंपनियों की तुलना में हमारा ऐप सबसे तेजी से बढ़ा. 

क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक कंपनियों में स्पर्धा के कारण भारत में विशाल बाजार के बावजूद उन्हें नुकसान हुआ

अमेजॉन के संस्थापक जेफ बेजोस द्वारा पहले भारत में किए जाने वाले निवेश की रकम को भी बढ़ाकर करीब 13,600 करोड़ रुपये से अब 34,000 करोड़ रुपये कर दिया गया. उन्हें उम्मीद है कि भारत में जापान, जर्मनी और ब्रिटेन को पीछे कर सबसे बड़ा विदेशी बाजार बनने की क्षमता है. 

हालांकि, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को इससे प्रतिस्पर्धी गतिशीलता का सामना करना पड़ा जिसने कंपनियों को भारत में विशाल बाजार के अवसरों के बावजूद नुकसान से रूबरू करवाया.

क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट के मुताबिक, "अधिकांश ई-कॉमर्स सेगमेंट्स में जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा है और मौजूदा रणनीति के मुताबिक उन्हें अपने कारोबार को बनाए रखने के लिए और प्रतिस्पर्धी कंपनियों से निपटने के लिए भारी निवेश करना पड़ेगा, जिसकी कीमत उन्हें नुकसान उठाकर चुकानी होगी."  

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2020 तक भारत का ई-कॉमर्स बाजार मौजूदा 26 अरब डॉलर से बढ़कर 103 अरब डॉलर होने की उम्मीद है. भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या चार गुना बढ़कर 40 करोड़ हो चुकी है. इनमें से 30 करोड़ यूजर्स महीने में कम से कम एक बार इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और चार करोड़ लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं. 

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First published: 26 January 2016, 9:36 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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