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पूर्व चुनाव आयुक्त ने समझाया : चुनाव न लड़ने वाले राजनीतिक दल आखिर क्या करते है ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 June 2018, 15:20 IST

देश में राजनीतिक पार्टियां काले धन को सफ़ेद करने का एक बड़ा जरिया बनती जा रही हैं. वर्तमान में ही देश में लगभग 2100 से ज्यादा राजनीतिक दल हैं. इसको लेकर पूर्व चुनाव आयुक्त नसीम जैदी का कहना है कि देश में उन राजनीतिक दलों के जरिये काले धन को सफ़ेद किया जाता है जो चुनाव में हिस्सा नहीं लेते हैं.

चुनाव आयोग के ही आंकड़ों की मानें तो देश में हर साल 100 नए राजनीतिक दलों का पंजीकरण होते हैं और इनमे से ज्यादातर हिस्सा नहीं लेते हैं. आंकड़े बताते हैं कि इन राजनीतिक दलों में से 2,000 ऐसे हैं जिन्हें मान्यता हासिल नहीं है. यही नहीं इन राजनीतिक दलों के चंदे का हिसाब किताब किसी के पास नहीं है. इनमे से 75 फीसदी पार्टियां ऐसी हैं जिन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा है.

अख़बार दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार जैदी कहते हैं कि चुनाव में हिस्सा न लेने वाले दल कालेधन को सफेद करने का जरिया बन गए हैं. नियम के अनुसार जो दल हर साल अपने चंदे का ब्यौरा आयोग और आयकर विभाग को देते हैं उन्हें छूट मिलती है लेकिन जो आयोग को जानकारी नहीं देती है चुनाव आयोग लिस्ट से हटा देता है. इसके बावजूद इन पार्टियों का रजिस्ट्रशन रद्द नहीं होता है.

रिपोर्ट में कानपुर के अखिल भारतीय नागरिक सेवा संघ का उदाहरण दिया गया है. इस दल ने 8 लाख चंदा जुटाया था लेकिन उसका बैंक बैलेंस 18 लाख रुपए था. जबकि पार्टी न्र कभी कोई चुनाव में हिस्सा नहीं लड़ा. इसी तरह साल 2014 के लोकसभा चुनावों में 90 फीसदी राजनीतिक दल गैर-मान्यता प्राप्त थे. इस चुनाव में लगभग 464 पार्टियों ने हिस्सा लिया था. जिनमें से 419 गैरमान्यता प्राप्त दल थे.

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First published: 2 June 2018, 12:11 IST
 
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