Home » बिज़नेस » Fuel Price: How much the Center and the state are earning on petrol and diesel
 

लोगों को राहत न देकर पेट्रोल और डीजल पर ऐसे कमाई कर रही है केंद्र और राज्य सरकारें

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 September 2018, 14:20 IST

देश में पेट्रोल और डीजल के दाम अपने अपने उच्च स्तर पर पहुंच चुका है. विपक्ष ने सोमवार को इसके विरोध में देश भर में विरोध प्रदर्शन किया. हालांकि सरकार ने ऑटो ईंधन की खुदरा कीमतों को कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में तत्काल कमी से इंकार कर दिया. इसके बजाय केंद्र ने राज्यों से टैक्स कम करने का आग्रह किया. राजस्थान सरकार द्वारा रविवार को टैक्स में 4 प्रतिशत की कटौती की घोषणा के बाद आंध्र प्रदेश ने पेट्रोल और डीजल पर वैट में 2 रुपये प्रति लीटर कटौती की घोषणा की.

आखिर ऑटो ईंधन पर करों में कटौती करना सरकारों के लिए इतना मुश्किल क्यों है? पेट्रोल और डीजल पर टैक्स केंद्र और राज्य दोनों के लिए एक प्रमुख राजस्व स्रोत हैं और इस पर कटौती उनकी वित्तीय स्थिति को प्रभावित करेगी.

 

केंद्र ने पेट्रोल-डीजल से कमाए इतने 

2017-18 में पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क से केंद्र सरकार ने 2.2 9 लाख करोड़ रुपये की कमाई की. जबकि 2016-17 में सरकार को सरकार को इससे 2.42 लाख करोड़ रूपये मिले. वर्तमान में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 19.48 प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 प्रति लीटर है.

वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट के चलते केंद्र ने नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के बीच नौ बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया. जबकि पिछले साल अक्टूबर में सिर्फ एक बार इसमें प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की .

क्रूड पेट्रोलियम 20% डेवलपमेंट सेस और 50 रुपये प्रति मीट्रिक टन के राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (एनसीसीडी) को आकर्षित करता है. क्रूड पर कोई सीमा शुल्क नहीं है, लेकिन पेट्रोल और डीजल 2.5% का सीमा शुल्क लगता है.

ऐसे कर रह राज्य कमाई 

इसी तरह राज्य बिक्री कर या मूल्य वर्धित कर (वैट) की दरें हर राज्य में भिन्न होती हैं. उत्पाद शुल्क के विपरीत, पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर / वैट के माध्यम से राज्यों की कमाई 2016-17 में 1.66 लाख करोड़ रुपये से 2017-18 में 1.84 लाख करोड़ रुपये हो गई. महाराष्ट्र ने 2017-18 में पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर / वैट से 25,611 करोड़ रुपये कमाए, जो देश में सबसे ज्यादा है. इसके बाद यूपी (17,420 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (15,507 करोड़ रुपये), गुजरात (14,852 करोड़ रुपये) और कर्नाटक ( 13,307 करोड़ रुपये) है.

साथ ही, अधिकांश राज्य जो पेट्रोल और डीजल पर उच्चतम कर दरें लगाते हैं, वे अपने सकल घरेलू उत्पाद के रूप में उच्च सकल राजकोषीय घाटे के साथ संघर्ष कर रहे हैं. उदाहरण के लिए असम में 12.7% की राजकोषीय घाटा है.

क्रूड पेट्रोलियम 20% डेवलपमेंट सेस और 50 रुपये प्रति मीट्रिक टन के राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (एनसीसीडी) को आकर्षित करता है. क्रूड पर कोई सीमा शुल्क नहीं है, लेकिन पेट्रोल और डीजल 2.5% का सीमा शुल्क लगता है.

ऐसे कर रह राज्य कमाई 

इसी तरह राज्य बिक्री कर या मूल्य वर्धित कर (वैट) की दरें हर राज्य में भिन्न होती हैं. उत्पाद शुल्क के विपरीत, पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर / वैट के माध्यम से राज्यों की कमाई 2016-17 में 1.66 लाख करोड़ रुपये से 2017-18 में 1.84 लाख करोड़ रुपये हो गई. महाराष्ट्र ने 2017-18 में पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर / वैट से 25,611 करोड़ रुपये कमाए, जो देश में सबसे ज्यादा है. इसके बाद यूपी (17,420 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (15,507 करोड़ रुपये), गुजरात (14,852 करोड़ रुपये) और कर्नाटक ( 13,307 करोड़ रुपये) है.

साथ ही, अधिकांश राज्य जो पेट्रोल और डीजल पर उच्चतम कर दरें लगाते हैं, वे अपने सकल घरेलू उत्पाद के रूप में उच्च सकल राजकोषीय घाटे के साथ संघर्ष कर रहे हैं. उदाहरण के लिए असम में 12.7% की राजकोषीय घाटा है.

First published: 11 September 2018, 10:37 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी