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तेल कीमतों मेें भारी गिरावट, 30 लाख प्रवासी भारतीयों के लिए संकट

समीर चौगांवकर | Updated on: 5 April 2016, 8:47 IST

कच्चे तेल की गिरती कीमतों के बीच जहां सउदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा फंड बनाने की तैयारी में है वही ओपेक देश अपनी अंंतरराष्ट्रीय संपत्तियों को बेचने को मजबूर हो रहे है. तेल के गिरते बाजार से हलाकान और सकते में आए ओपेक देश एक अनुमान के मुताबिक 240 अरब डॅालर यानी करीब 16,23,992 करोड़ रुपये की संपत्ति को बेच कर अपनी स्थिति को सुधारने की कोशिश मेें जुटे हैं.

जेपी मार्गन की कुछ समय पहले जारी रिपोर्ट का आकलन है कि तेल उत्पादक देश अपने फॉरेन रिजर्व एक्सचेंज और वैल्थ फंड आदि में कमी करके तेल बिक्री में होने वाले नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर सकते है. यह देश अपने सरकारी बॉन्ड्स को बेचकर 20 अरब डॅालर की राशि जुटा सकते है.

गौरतलब है कि तेल की लगातार कम हो रही कीमतों केे कारण अब तक तेल उत्पादक देशों को 260 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है. ओपेक देशों की ज्यादातर संपत्ति स्टॉक्स और बॉन्ड्स के रूप में सुरक्षित है. लिहाजा बाजार में मंदी का माहौल देखकर स्टॉक्स की कीमतें भी डांवाडोल हैं.

ओपेक देश अपने सरकारी बॉन्ड्स को बेचकर 20 अरब डॅालर की राशि जुटा सकते है

110 अरब डॅालर की अमेरिकी ट्रेजरीज और 75 अरब डॅालर के इक्विटी निवेश को भी यह देश बेच कर पैसा जुटा सकते है. इसके बाद भी अगर अर्थव्यवस्था नहीं सुधरी तो जरूरत पड़ने पर दूसरे संसाधनों से भी पैसा जुटाया जा सकता है.

तेल के दामों में भारी गिरावट से पूरी दुनिया में मंदी का खतरा उत्पन्न होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. सउदी अरब की मुद्रा रियाल और रूस की करंसी रूबल में डॉलर के मुकाबले रिकार्ड गिरावट दर्ज हो रही है. इसका विपरीत असर इन देशों के स्टॉक्स पर पड़ रहा है.

निवेश होगा प्रभावित

मॉर्गन स्टेनली के अनुमान के मुताबिक तेल के गिरते बाजार के चलते अमेरिका समेत दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण देशों के निवेशकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. जब तक तेल की कीमतें गिरती रहेंगी तब तक निवेशक इन देशों से दूरी बनाकर रहेंगे.

भारत के 30 लाख प्रवासी मजदूरों पर संकट

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार जारी गिरावट का एक बड़ा नुकसान सउदी अरब एवं अन्य तेल उत्पादक देशों में काम करने वाले प्रवासी भारतीय मजदूरों को उठाना पड़ सकता है. तेल मेें मोटे मुनाफे के कारण सउदी अरब और खाड़ी देशों में मध्य पूर्व, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के लोग रोजगार के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे है.

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार जारी गिरावट का एक बड़ा नुकसान अप्रवासी भारतीय मजदूरों को उठाना पड़ सकता है

सउदी अरब में प्रवासी मजदूरों की संख्या सन 2000 की तुलना में 2015 तक दोगुनी हो चुकी है. 2000 में सउदी अरब में 53 लाख लोग बाहरी थे लेकिन 2015 आते आते यह आंकड़ा एक करोड़ 25 लाख के करीब पहुंच चुका है. सउदी अरब की कुल आबादी में प्रवासी लोगों की संख्या 30 प्रतिशत से ज्यादा है. इनमें भारतीयों की बात करें तो लगभग 30 लाख लोग रहते है. पाकिस्तान के 11 लाख और बांग्लादेश के लगभग दस लाख दूसरे लोग भी रहते है.

मध्यपूर्व देशों के भी लाखों लोग सउदी अरब में बसे है. तेल की गिरावट के कारण इस बड़ी आबादी की नौकरियों पर संकट मडरा रहा है.

सरकार की नजर

भारत सरकार समस्या की गंभीरता को देखते हुए हालात पर पूरी नजर रखे हुए है. प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी की माने तो पीएम नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्रालय से सउदी सरकार से सम्पर्क में रहने के लिए कहा है. भारत सरकार नहीं चाहती कि बड़ी मात्रा में सउदी अरब में बसे भारतीय बेरोजगार होकर वतन वापस लौटें.

भारत सरकार की पूरी कोशिश सउदी अरब के तेल संकट के बाद भी भारतीयों की नौकरी वहां सुनिश्चित करने की है. हालांकि सउदी अरब कुछ समय से स्थानीय लागों को नौकरी देने के लिए अपनी नीतियों में बदलाव कर रहा है. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकेगा और प्रवासी लोगों की संख्या में गिरावट आएगी. इसके बावजूद सउदी अरब में प्रवासी मजूदरों की संख्या में बढोत्तरी हो रही है.

First published: 5 April 2016, 8:47 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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