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कार्गो कारोबार में आई गिरावट क्या मंदी का संकेत है?

निहार गोखले | Updated on: 17 January 2016, 19:38 IST
QUICK PILL
  • मोटे तौर पर देखा जाए तो बीडीआई के गिरने की दो वजहें हो सकती हैं. पहला पानी वाले जहाजों की मांग में कमी और दूसरा इंटरनेशनल व्यापार में आई गिरावट. लेकिन अगर शॉर्ट टर्म में इसमें गिरावट आ रही है तो इसके लिए सबसे बड़ी वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आई कमी हो सकती है.
  • 13 जनवरी को इस इंडेक्स में 394 अंकों की गिरावट आई और फिर 14 जनवरी को यह और 383 अंक टूट गया. वहीं अगस्त 2015 में इंडेक्स 1,222 पर था. 2008 की मंदी से पहले यह 10,000 से अधिक था. 1 जनवरी के बाद से इंडेक्स में करीब 20 पर्सेंट की गिरावट आ चुकी है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ती दिख रही है. इंटरनेशनल कार्गो ट्रेड का इंडेक्स बाल्टिक ड्राई इंडेक्स आधे से अधिक टूटते रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर को छू चुका है.

अतीत में भी यह इंडेक्स आश्चर्यजनक रूप से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में मंदी आने के साथ डूबता उभरता रहा है. 2000 में जब डॉट कॉम का बुलबुला फूटना हो या 2008 की महामंदी. तो मौजूदा गिरावट से हमें क्या संकेत मिलता है?

बीडीआई क्या है?

बाल्टिक ड्राई इंडेक्टस कोयला, सीमेंट, धातु, अयस्क और खाद ले जाने वाले भारी कार्गों को दी जाने वाली औसत दर का सूचक है. जिसका पूरा कारोबार समुद्री रास्तों के जरिये होता है. इसमें क्रूड ऑयल को शामिल नहीं किया जाता है. यह दर उन समुद्री रास्तों के लिए है जहां से सर्वाधिक कार्गो की आवाजाही होती है. इन आंकड़ों को हर दिन शिपब्रोकर्स लंदन के बाल्टिक एक्सचेंज में जमा कराते हैं. इसकी कीमत प्रतिदिन के आधार पर तय की जाती है जो बीडीआई इंडेक्स कहलाता है.

2008 की मंदी से पहले यह 10,000 से अधिक था. 1 जनवरी के बाद से इंडेक्स में करीब 20 पर्सेंट की गिरावट आ चुकी है

मोटे तौर पर देखा जाए तो बीडीआई के गिरने की दो वजहें हो सकती हैं. पहला पानी वाले जहाजों की मांग में कमी और दूसरा इंटरनेशनल व्यापार में आई गिरावट. लेकिन अगर शॉर्ट टर्म में इसमें गिरावट आ रही है तो इसके लिए सबसे बड़ी वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आई कमी हो सकती है क्योंकि जहाजों की सप्लाई को अचानक नहीं बढ़ाया जा सकता. एक जहाज को नए सिरे से बनाने में कम से कम दो साल लगते हैं. जहाजों के जरिये कच्चे मालों की आपूर्ति होती है और उनकी मांग से यह होताहै कि निकट भविष्य में कितना उत्पादन होना है. इससे हमें भविष्य में होने वाली आर्थिक वृद्धि के संकेत मिलते हैं.

बाल्टिक ड्राई इंडेक्स समुद्री रास्तों से होने वाले कार्गो पर लिया जाने वाला औसत दर है

इसके अलावा 90 फीसदी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुदंर के जरिये होता है तो इसमें आई गिरावट कहीं से भी वैश्विक अर्थव्यवस्था की सेहत के लिए ठीक नहीं है. बीडीआई को इसलिए भी गंभीरता से लिया जाता है क्योंकि शिपिंग ऑर्डर्स में बहुत अधिक अनुमानों की गुंजाइश नहीं होती.

दिखने लगी कमजोरी

13 जनवरी को इस इंडेक्स में 394 अंकों की गिरावट आई और फिर 14 जनवरी को यह और 383 अंक टूट गया. वहीं अगस्त 2015 में इंडेक्स 1,222 पर था. 2008 की मंदी से पहले यह 10,000 से अधिक था. 1 जनवरी के बाद से इंडेक्स में करीब 20 पर्सेंट की गिरावट आ चुकी है.

पिछल पांच सालों से इंडेक्स में एक आम पैटर्न देखा गया है. पिछले साल के सितंबर या अक्टूबर महीने में चढ़ने के बाद जनवरी में इसमें गिरावट आती है. यह पैटर्न इस साल भी जारी रहा लेकिन जो मजबूती देखने को मिली वह काफी कम रही.

गिरावट की वजह

कई खबरों के मुताबिक बीडीआई इंडेक्स में आई गिरावट की वजह अटलांटिक महासागर में आई कार्गो टे्रड में आई गिरावट है. 8 जनवरी को यहां किसी कार्गो का आवागमन नहीं हुआ. बड़ी कार्गो कंपनियां अपने जहाजों को बेड़े में लगा चुकी हैं क्योंकि उन्हें बड़ा घाटा उठाना पड़ रहा है.

इसकी वजह यह है कि उद्योगपति अपने कार्गो के लिए कम पैसे देने को तैयार हैं और इसकी वजह वैश्विक अर्थव्यवस्था में आई मंदी है. उपभोक्ता कम खरीद रहे हैं और इंडस्ट्री में कम उत्पादन हो रहा है. कच्चे माल की मांग कम है और मंदी का असर ट्रांसपोर्टर्स पर साफ दिख रहा है.

तो क्या मंदी आ रही है

बीडीआई में आ रही गिरावट क्या मंदी का संकेत है? अभी विशेषज्ञ इसे लेकर एकमत नहीं है. मंदी की वजह से बीडीआई इंडेक्स में गिरावट आती है लेकिन बीडीआई में गिरावट आने का मतलब मंदी नहीं समझा जा सकता.

एक अधिकारी ने बताया, 'बीडीआई में गिरावट आने की वजह यह है कि लंबी दूरी के जहाजों के ऑर्डर रद्द हुए हैं. इसके अलावा बीडीआई में आई गिरावट मांग में आई कमी भी हो सकती है.'

चीन से कई बुरी खबरें आ रही हैं. चीन की अर्थव्यवस्था करीब 4 ट्रिलियन डॉलर के आयात और निर्यात पर आधारित है. 2015 में चीन के आयात में करीब 13 फीसदी की गिरावट आई और निर्यात में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई. बीडीआई इंडेक्स में कोयला और लौह अयस्क का आयात शामिल होता है और इन दोनों में दशक भर के दौरान पहली बार गिरावट आई है. इसके अलावा स्टील के उत्पादन में भी गिरावट आई है. चीन का निर्यात कमजोर हुआ है क्योंकि अमेरिका और यूरोपीय देशों में मांग में गिरावट आई है.

वैश्विक तौर पर जिसों की कीमतों में भी गिरावट आई है और माइनिंग कंपनियों के राजस्व में कमी दर्ज की गई है. कॉपर की कीमतें कई सालों के न्यूनतम स्तर पर है वहीं अल्युमिनियम, जिंक, टीन और एग्रीकल्चर कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आई है. बेशक इसे मंदी के संकेतों के तौर पर पढ़ना जल्दबाजी होगी लेकिन इसे केवल मांग में आई कमी के तौर पर भी नहीं देखा जा सकता. 

First published: 17 January 2016, 19:38 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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