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अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती भारत के लिए अच्छी खबर

नीरज ठाकुर | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • करीब 15 महीनों की गिरावट के बाद भारतीय अर्थव्यस्था के लिए अच्छी खबर है. चौथी तिमाही में अमेरिका की अर्थव्यवस्था 1.4 फीसदी की दर से आगे बढ़ने में सफल रही है.
  • अमेरिका हमारे लिए मजबूत बाजार है और वहां आई रिकवरी भारतीय निर्यात के लिए बेहतर संकेत है क्योंकि भारत के निर्यात में पिछले 15 महीनों से लगातार गिरावट आ रही है.

करीब 15 महीनों की गिरावट के बाद भारतीय अर्थव्यस्था के लिए अच्छी खबर है. चौथी तिमाही में अमेरिका की अर्थव्यवस्था 1.4 फीसदी की दर से आगे बढ़ने में सफल रही है. पिछली अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दर एक फीसदी रही थी.

अमेरिकी अर्थव्यस्था में आई तेजी की वजह घरेलू खर्च में आई बढ़ोत्तरी है. तीसरी तिमाही में 2 फीसदी से कम वृद्धि दर होने के बावजूद भारतीय निर्यातकों के लिए अच्छी खबर है. 

वैश्विक मांग में आई कमी की वजह से पिछली कुछ तिमाहियों में भारत के निर्यात में लगातार गिरावट आई है

रॉयटर्स की उपभोक्ता खर्च की रिपोर्ट के मुताबिक 2015 के दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दर 2.4 फीसदी रही. जबकि पिछले महीने 2 फीसदी की दर से अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी. इसके अलावा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सेवाओं की खपत में भी तेजी आई है.

एजेंसी की रिपोर्ट बताती है, 'श्रम बाजार की बेहतर स्थिति की वजह से खर्च में बढ़ोत्तरी हुई है. मजदूरी में वृद्धि हुई है वहीं घरों की कीमतें भी बढ़ी हैं. गैसोलिन की कीमत करीब 2 डॉलर प्रति बैरल है इससे घरेलू खर्च बढ़ा है.'

लेकिन सवाल यह है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आई मजबूती से भारतीय निर्यात को किस तरह सहारा मिलेगा?

अमेरिकी हिस्सेदारी में बढ़ोत्तरी

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्टर्स ऑर्गनाइजेशन (एफआईईओ) के प्रेसिडेंट एससी राल्हान ने कहा, 'अमेरिका को निर्यात बेहतर रहा है. यहां तक  कि अन्य देशों के निर्यात को भी झटका लगा है. अमेरिका हमारे लिए मजबूत बाजार है और वहां आई रिकवरी भारतीय निर्यात के लिए बेहतर संकेत है क्योंकि भारत के निर्यात में पिछले 15 महीनों से लगातार गिरावट आ रही है.'

अप्रैल 2015 और फरवरी 2016 के बीच भारत का निर्यात 238.42 अरब डॉलर रहा है. पिछले  साल की समान अवधि के मुकाबले भारत के निर्यात में 16.73 फीसदी की गिरावट आई. पिछले साल की समान अवधि में भारत का निर्यात 286.31 अरब डॉलर रहा.

भारत के निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 2014-15 के 13.67 फीसदी से बढ़कर 15.41 फीसदी हो गई. अगर आने वाले समय में अमेरिका की जीडीपी में बढ़ोत्तरी होती है तो भारत के निर्यात में भी मजबूती आएगी.

किस सेक्टर को होगा सबसे ज्यादा फायदा?

अमेरिका को होने वाले निर्यात में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी टेक्सटाइल्स, कीमती धातुएं, दवाएं, ईंधन, तेल और ऑर्गेनिक केमिकल्स की है.

2014-15 में भारत के टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. कंफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत का टेक्सटाइल निर्यात 3,704.97 लाख डॉलर का रहा जबकि पिछले साल की समान अवधि में भारत ने 3,704.62 लाख डॉलर का निर्यात किया था.

टेक्सटाइल्स के वैश्विक निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 30 फीसदी रही है. अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आती है तो टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री की मांग में बढ़ोतरी होगी.

सावधान रहने की जरूरत

इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डिवेलपमेंट रिसर्च में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर आर नागराज इस मामले में थोड़ी सतर्कता बरतने की सलाह देते हैं.

नागराज ने कहा, 'यह अच्छी खबर है लेकिन मंदी पूर्व स्थिति के मुकाबले वृद्धि दर उत्साहित करने वाली नहीं है. अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अगर उसमें मजबूती आती है तो बाकी देशों पर इसका असर होगा.'

उन्होंने कहा, 'हालांकि इससे भारत को फायदा होगा या नहीं, इसके बारे में कहना जल्दबाजी है. क्योंकि अमेरिका को होने वाला भारत का निर्यात मामूली है. पिछले दशक में आईटी में बूूम आने की वजह से अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में बढ़ोतरी हुई. हालांकि अब इस सेक्टर की स्थिति अच्छी नहीं है. इसके अलावा अमेरिका ने आईटी आउटसोर्सिंग पर टैक्स भी लगा रखा है.

मौजूदा आंकड़ों के आधार पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आई सुधार से भारत को बहुत अधिक फायदा नहीं होगा. लेकिन इसके बावजूद इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल्स जैसे सेक्टर नरेंद्र मोदी सरकार को राहत दे सकते हैं क्योंकि निर्यात में मंदी की स्थिति की वजह से इन क्षेत्रों में पिछले दो सालों में नौकरियां नहीं निकली हैं.'

First published: 29 March 2016, 10:21 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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