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अलविदा 2016: टेलीकॉम रिवोल्यूशन की दिशा में उठा बड़ा कदम

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 27 December 2016, 15:41 IST

भारतीय टेलीकॉम इतिहास में साल 2016  को ऐतिहासिक माना जाएगा. इसकी प्रमुख वजह यह रही कि रिलायंस ने अपनी 4जी सेवा 'जियो' को लॉन्च किया और पूरे साल तक इसे मुफ्त में दिए जाने की घोषणा कर दी. रिलायंस की इस शुरुआत ने देश की निजी टेलीकॉम कंपनियों की बादशाहत तोड़ते हुए उन्हें जियो या मरो की स्थिति में पहुंचा दिया.

आइए एक बार आपको इस साल की सबसे बड़ी खबर से रूबरू कराते हैं. यूं तो रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा दिसंबर 2015 में 'जियो' 4जी सेवा की शुरुआत को लेकर एक जश्न का आयोजन किया गया था. लेकिन यह जियो की शुरुआत नहीं थी क्योंकि रिलायंस को लॉन्चिंग से पहले अपना इंफ्रास्ट्रचर स्थापित करना था.

जियो ने काफी पहले से अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करना शुरू कर दिया और इनकी कनेक्टिविटी जांचने के लिए जियो के साथ रिलायंस के कर्मचारियों को जियो 4जी के सिम बांटने शुरू कर दिए. चूंकि जियो ने अपनी सेवाएं जनता के लिए चालू नहीं की थीं इसलिए इसे प्रीव्यू ऑफर का नाम दिया गया.

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जियो प्रीव्यू ऑफर के अंतर्गत यूजर्स को जियो की फ्री अनलिमिटेड सेवाएं यानी कॉलिंग-डाटा-रोमिंग-ऐप्स मिलने शुरू हो गए. जैसे-जैसे रिलायंस जियो का नेटवर्क मजबूत होता गया, इसकी कनेक्टिविटी बढ़ती गई और प्रीव्यू ऑफर का इस्तेामाल करने वालों की तादाद बढ़ती गई. धीरे-धीरे यह खबर बाकी लोगों तक भी पहुंची और वो जुगाड़ लगाकर यानी रिलायंस कर्मचारियों से रेफरल मेल-कोड के जरिये जियो सिम पाने की जुगत में भिड़ गए.

जून आते-आते जियो की सेवाओं को रिलायंस कर्मचारियों के अलावा तमाम अन्य लोगों ने भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. इसके बाद जियो ने सैमसंग के साथ पार्टनरशिप में अपने स्मार्टफोन पेश किए और 31 दिसंबर 2016 तक मुफ्त सेवाएं इस्तेमाल करने का मौका दिया.

इस बीच रिलायंस ने 'LYF' ब्रांड के तहत अपने 4जी स्मार्टफोनों की श्रंखला पेश कर दी और इन स्मार्टफोनों को खरीदने वाले ग्राहकों को बंडल्ड जियो सिम कार्ड देने लगा. रिलायंस सिम के लिए इस वक्त तक रिलायंस डिजिटल एक्सप्रेस और रिलायंस डिजिटल मिनी स्टोर्स को ही अधिकृत किया गया था, जहां से लोग सिम कार्ड ले सकते थे.

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इसके बाद रिलायंस ने जियो प्रीव्यू ऑफर के साथ बंडल्ड हैंडसेट्स की रेंज को बढ़ाया और कुछ अन्य कंपनियों के 4जी इनेबल्ड स्मार्टफोनों को इनके योग्य बना दिया. इस बीच अगस्त में कई ऑनलाइन फोरम्स ने जियो प्रीव्यू ऑफर कोड को किसी भी 4G हैंडसेट्स में जनरेट करने का तरीका बता दिया और फिर लोग इसे जनरेट करके जियो के साथ जो कंपनियां जुड़ी भी नहीं थी, उनके हैंडसेट्स पर यह प्रीव्यू ऑफर लेने लगे. इस वक्त तक अनाधिकारिक रूप से रिलायंस ने तकरीबन हर 4जी हैंडसेट के लिए अपने प्रीव्यू ऑफर को जारी कर दिया. जबकि कंपनी ने इस वक्त तक आधिकारिक रूप से करीब दो दर्जन कंपनियों के साथ अपना प्रीव्यू ऑफर कोड जनरेट करने का विकल्प दे दिया.

वहीं, जून से यह खबरें सामने आने लगी थीं कि रिलायंस अपनी 4जी सेवा जियो की लॉन्चिंग कभी भी कर सकता है. बाद में बात हुई कि 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के दिन जियो को जनता के लिए लॉन्च किया जाएगा. लेकिन यह तारीख आगे बढ़ी और आखिरकार 1 सितंबर 2016 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी ने कंपनी की सालाना बैठक में जियो की आधिकारिक लॉन्चिंग की घोषणा करते हुए 5 सितंबर से इसे जनता के लिए खोल दिया. 

रिलायंस ने 5 सितंबर से शुरू किए गए मुफ्त अनलिमिटेड कॉलिंग-डाटा-रोमिंग-ऐप्स वाली स्कीम का नाम जियो वेल्कम ऑफर रखा और घोषणा की कि यह ऑफर 31 दिसंबर 2016 तक मुफ्त रहेगा और जियो सिम पाने वाला कोई भी ग्राहक इस वक्त तक बिना कोई शुल्क चुकाए जियो की सेवाएं इस्तेमाल कर सकेगा.

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बस फिर क्या था. आलम यह हो गया कि देशभर में मुफ्त जियो 4जी सेवा का फायदा उठाने के लिए सिम पाने वालों की लाइनें लगनी शुरू हो गईं. देशभर में रिलायंस डिजिटल एक्सप्रेस, मिनी स्टोर्स पर लोग रात-रातभर लाइनों में लगकर सिम पाने के लिए बैठे दिखे. जियो सिम पाने के लिए लोगों ने जमकर जुगाड़ लगाए और धक्का-मुक्की कर इसे पाया भी.

हालांकि रिलायंस जियो की आधिकारिक लॉन्चिंग के बाद स्थिति यह हो गई कि देश के दिग्गज टेलीकॉम ऑपरेटर्स यानी एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया में खलबली मच गई. इन ऑपरेटर्स के ग्राहकों ने भी मुफ्त ऑफर के चलते यह सिम लिए. इसके कारण इन तीनों कंपनियों के व्यवसाय पर असर पड़ा. विशेषज्ञों की मानें तो सबसे ज्यादा असर डाटा रिचार्ज पैकों पर पड़ा क्योंकि रिलायंस जियो में कॉलिंग की समस्या थी लेकिन नेट ठीकठाक चलता था, जिसकी वजह से अपने हैंडसेट में लोग जियो की सिम से फ्री नेट यूज करते हैं और दूसरे ऑपरेटर्स के सिम से कॉलिंग करते हैं. 

सितंबर से लेकर दिसंबर तक जियो के मुफ्त वेल्कम ऑफर के चलते वाकई रिचार्ज कराने वालों, पोस्टपेड से प्रीपेड कराने वालों की तादाद में काफी कमी आई. इस बीच जियो की प्रसिद्धि बहुत तेजी से बढ़ी और लॉन्चिंग के बाद से प्रति मिनट औसतन 1,000 और प्रति दिन 6 लाख लोग इसे जुड़े और जियो सबसे कम वक्त (83 दिनों) में 5 करोड़ ग्राहक जोड़ने वाली दुनिया की सबसे पहली कंपनी बन गई. अकेले सितंबर में ही रिलायंस ने 1.60 करोड़ ग्राहकों को अपने साथ जोड़ लिया. एयरटेल को इतने ग्राहक जोड़ने में 12 साल जबकि वोडाफोन और आइडिया को 13 साल का वक्त लगा था. 

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जियो के आक्रामक रवैये और मुफ्त सेवाएं देने की पेशकश ने अन्य टेलीकॉम ऑपरेटर्स की नींद उड़ा दी और जियो से पहले बाजार में मोनोपोली बनाकर काम कर रहीं तीन दिग्गज कंपनियों को अपने ग्राहकों को जोड़े रखने के लिए अपने दाम गिराने पड़े. इस कड़ी में वोडाफोन ने सबसे अच्छी पहल करते हुए सबसे पहले दिवाली के अवसर पर अक्तूबर के आखिरी से अपने सभी ग्राहकों को पूरे देश में फ्री रोमिंग का तोहफा दे दिया. हालांकि एयरटेल और आइडिया ने अभी तक रोमिंग शुल्क लेना जारी रखा हुआ है. 

इस दौरान ही इन टेलीकॉम कंपनियों ने ट्राई (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) से यह शिकायत कर दी कि उनकी गाइडलाइंस के हिसाब से कोई भी ऑफर 90 दिनों से ज्यादा का नहीं हो सकता, तो भी जियो कैसे 31 दिसंबर 2016 तक अपना फ्री वेल्कम ऑफर जारी रख सकती है जब उसके 90 दिनों की वैलेडिटी 3 दिसंबर को ही समाप्त हो रही है. लेकिन 1 दिसंबर को रिलायंस ने अपने वेल्कम ऑफर का नाम बदलकर हैप्पी न्यू ईयर ऑफर कर दिया और जो ऑफर पहले 31 दिसंबर 2016 को समाप्त हो रहा था, उसकी अवधि 31 मार्च तक कर दी.

अब इन कंपनियों के सामने बड़ी परेशानी आ गई और रिलायंस के आक्रामक तेवर के चलते तीनों दिग्गज कंपनियों के अलावा बीएसएनएल, एयरसेल ने भी अपने फ्री कॉलिंग-डाटा पैक जारी कर दिए और ग्राहकों को जोड़ने के लिए तमाम लुभावनी स्कीमें देना शुरू कर दिया. बीएसएनएल भी जियो को टक्कर देने के लिए तमाम स्कीमें लेकर आया. 

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इन सबसे भारतीय टेलीकॉम बाजार पर सबसे सकारात्मक प्रभाव यह पड़ा कि टॉप टेलीकॉम ऑपरेटरों की मोनोपोली और तकरीबन एक ही दर पर एक जैसे पैक बेचने का सिस्टम बंद हो गया और देश मुफ्त कॉलिंग-रोमिंग की दिशा में बढ़ चला, जिसमें ग्राहक को केवल डाटा की कीमत चुकानी हो और बाकी सेवाएं फ्री हों. अब उम्मीद की जा सकती है कि वो दिन दूर नहीं जब लोगों को कॉलिंग-रोमिंग के लिए कभी परेशान नहीं होना पड़ेगा.

First published: 27 December 2016, 15:41 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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