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कैग: टेलीकॉम कंपनियों ने सरकार को लगाया 12400 करोड़ का चूना

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2016, 18:56 IST

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2006-07 से 2009-10 के दौरान भारती एअरटेल सहित निजी क्षेत्र की छह टेलीकॉम कंपनियों ने सरकार को कम मुनाफा दिखाकर 12,488.93 करोड़ रुपए की चपत लगाई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कैग ने यह रिपोर्ट शुक्रवार को संसद में पेश की. रिपोर्ट में बताया गया है कि छह निजी दूरसंचार कंपनियों के रिकार्ड की जांच के दौरान कुल 46,045.75 करोड़ रुपए का कम सकल राजस्व दिखाया गया है.

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इससे लाइसेंस शुल्क पर 3,752.37 करोड़ रुपए, स्पेक्ट्रम प्रयोग शुल्क पर 1,460.23 करोड़ रुपए का असर पड़ा. इस कम या भुगतान न किए जाने पर कुल ब्याज 7,276.33 करोड़ रुपए बैठता है.

रिपोर्ट में साल 2006-07 से 2009-10 के दौरान भारती एअरटेल, वोडाफोन इंडिया, रिलायंस कम्युनिकेशंस, आइडिया सेल्युलर, टाटा टेलीसर्विसेज व एअरसेल के साथ अन्य कंपनियों के द्वारा सरकार को दिए गए राजस्व हिस्से के भुगतान  का तथ्य सामने आया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशन द्वारा सकल राजस्व को कम कर दिखाने का वित्तीय प्रभाव 1,507.25 करोड़ रुपए बैठता है. टाटा टेलीसर्विसेज के लिए यह 1,357.68 करोड़ रुपए, एअरटेल के लिए 1,066.95 करोड़ रुपए, वोडाफोन के लिए 749.85 करोड़ रुपए, आइडिया के लिए 423.26 करोड़ रुपए और एअरसेल के लिए 107.61 करोड़ रुपए बैठता है.

वहीं दूसरी ओर टेलिकॉम कंपनियों द्वारा भुगतान किए गए प्रवेश शुल्क के समायोजन से सरकार को 5,476.3 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. इन कंपनियों ने साल 2008 में इस शुल्क का भुगतान किया था और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इनके लाइसेंस को रद्द कर दिया था.

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टेलिकॉम और आइटी क्षेत्र पर जारी कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘लाइसेंसधारकों द्वारा साल 2008 में भुगतान किए गए 5,476.30 करोड़ रुपए के गैर-रिफंडेबल प्रवेश शुल्क का समायोजन किए जाने की वजह से सरकार को इतने राजस्व की क्षति हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक ‘नवंबर 2012 से मार्च 2013 में 1800 मेगाहर्ट्ज-800 मेगाहर्ट्ज में स्पेक्ट्रम के लिए देय नीलामी मूल्य में इस राशि का समायोजन किया गया.

इन कंपनियों द्वारा पूर्व में आवंटित किये गये स्पेक्ट्रम को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध घोषित कर दिया गया था.

सरकार ने उन कंपनियों के द्वारा भुगतान किए गए लाइसेंस शुल्क को साल 2012 में समायोजित करने का निर्णय किया, जिनके परमिट 2जी मामले में रद्द हो गए थे.

First published: 21 May 2016, 18:56 IST
 
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