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जीएसटी लागू करने के मामले में समय से पीछे चल रही सरकार: जेटली

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 September 2016, 16:14 IST
QUICK PILL
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि  केंद्र सरकार जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) कानून को लागू किए जाने के मामले में समय से पीछे चल रही है लेकिन सरकार इसे तय समय पर लागू करने की पूरी कोशिश करेगी. जीएसटी को 1 अप्रैल 2017 से पूरे देश में लागू किया जाना है.
  • जेटली ने सरकारी बैंकों के निजीकरण की संभावना को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि कुछ सरकारी बैंकों का विलय एक बड़ा  बैंक बनाने की योेजना पर सरकार काम कर रही है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उनका निजीकरण किए जाने की तैयारी हो रही है.
  • देश की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर जेटली ने कहा कि 7.5 फीसदी की दर भारत की क्षमता से कम है. सरकारी खर्चे में हुई बढ़ोतरी और बेहतर मानसून से आने वाले समय में सरकार को मदद मिलेगी.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि  केंद्र सरकार जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) कानून को लागू किए जाने के मामले में समय से पीछे चल रही है लेकिन सरकार इसे तय समय पर लागू करने की पूरी कोशिश करेेगी. जीएसटी को 1 अप्रैल 2017 से पूरे देश में लागू किया जाना है.

मानसून सत्र में संसद ने जीएसटी बिल को पारित कर दिया था. एक कार्यक्रम में बोलते हुए जेटली ने कहा कि सरकार इस कानून को लागू करने के लिए बाध्य है  लेकिन उसकी राह में कई चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा, 'यह बेहद मुश्किल लक्ष्य है. हम समय से पीछे चल रहे हैं. लेकिन मैं इसे निश्चित तौर पर इसे पूरा करने की कोशिश करुंगा.'

संसद में पारित किए जाने के बाद इस संविधान संशोधन विधेयक को आधे से अधिक राज्यों की विधानसभाओं ने अनुमोदित भी कर दिया है. इसके बाद इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा.

कानून की शक्ल में आने के बाद सरकार इसकी अधिूसचना जारी करेगी और फिर जीएसटी परिषद का गठन किया जाएगा. इस संस्था में केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होंगे. सरकार ने अभी तक जीएसटी की दर को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है लेकिन माना जा रहा है कि इसकी दर 18 फीसदी से अधिक होगी.

जीएसटी परिषद ही दरों को तय करने का तय काम करेगी. इसके अलावा कर विभाजन से जुड़े विवादों का निपटारा भी इसी परिषद में किया जाएगा.

बैंकों का निजीकरण नहीं

जेटली ने सरकारी बैंकों के निजीकरण की संभावना को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि कुछ सरकारी बैंकों का विलय एक बड़ा  बैंक बनाने की योजना पर सरकार काम कर रही है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उनका निजीकरण किए जाने की तैयारी हो रही है.

जेटली ने कहा, 'मैं नहीं समझता हूं कि आम लोगों की राय और राजनीतिक चिंतन यहां तक पहुंच चुका है कि हम बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण के बारे में सोचें. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सेहत सरकार की पहली प्राथमिकता है.'

वित्त मंत्री ने हालांकि आईडीबीआई के निजीकरण को अपवाद जैसा मामला बताने का संकेत दिया. सरकार की योजना आईडीबीआई में अपनी हिस्सेदारी को 50 फीसदी से कम करने की है.

देश की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर जेटली ने कहा कि 7.5 फीसदी की दर भारत की क्षमता से कम है. सरकारी खर्चे में हुई बढ़ोतरी और बेहतर मानसून से आने वाले समय में सरकार को मदद मिलेगी.

जेटली ने कहा, 'हम एक बेहतर कल की तरफ देख रहे हैं. घरेलू मांग में बढ़ोतरी होगी. स्थिति में सुधार होगा और इससे निजी क्षेत्र को अपना निवेश बढ़ाने का मौका मिलेगा.'

First published: 7 September 2016, 16:14 IST
 
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