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जीएसटी: कांग्रेस की मांग पर झुक गई बीजेपी !

नीरज ठाकुर | Updated on: 5 December 2015, 17:18 IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बिल पर कई महीनों से सरकार और विपक्ष में चल रही तकरार खत्म हो गई है. राज्यसभा में बिल पारित होने का रास्ता अब साफ है.

कांग्रेस द्वारा उठाए गए मुद्दों को मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रामण्यम ने गंभीरता से लिया है. जीएसटी पर सुब्रामण्यम की अध्यक्षता में गठित पैनल की बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट में कांग्रेस की मांगों का ध्यान रखा गया है.

विशेषज्ञों के अनुसार बिल पास होने पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी.

पैनल की अनुशंसा?


जीएसटी में रेवेन्यू न्यूट्रल रेट 15-15.5 फीसदी है. इस दर से केंद्र सरकार को लाभ नहीं होगा लेकिन उसके राजस्व में कोई कमी नहीं आएगी. पैनल ने 17-18 फीसदी की दर प्रस्तावित किया है.

बीजेपी सरकार ने रेवेन्यू न्यूट्रल होने की स्थिति तक मैन्युफैक्चरिंग राज्यों के लिए एक फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रावधान किया था, जिसे हटा दिया गया है.

रियल स्टेट, बिजली, शराब और पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी से बाहर है. इन वस्तुओं पर लगने वाला टैक्स राज्यों के मुनाफे में जाएगा

हालांकि, पैनल ने जल्द ही इन वस्तुओं को भी जीएसटी के अंदर लाने का प्रस्ताव दिया है.

जीएसटी के अंदर नहीं आने वाली वस्तुओं पर 12 फीसदी मेरिट टैक्स और 40 फीसदी डिमेरिट टैक्स लगेगा. मेरिट टैक्स खाने-पीने की वस्तुओं पर लगता है जबकि लग्जरी कार, तंबाकू और शराब जैसे उत्पादों पर डिमेरिट टैक्स लगता है.

क्या गतिरोध खत्म होगा?


एनडीए जीएसटी से शराब, पेट्रोलियम उत्पादों, बिजली और तंबाकू को बाहर रखना चाहती है और इससे होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए मैन्युफैक्चरिंग राज्यों के लिए एक फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगाना चाहती है. कांग्रेस ने जीएसटी के लिए अधिक से अधिक 18 फीसदी दर प्रस्तावित किया है. पैनल ने दोनों के बीच का रास्ता निकाला है.

कांग्रेस ने अब तक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया नहीं दी है. रिपोर्ट से अर्थशास्त्री और उद्योगपति बेहद खुश हैं

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने जीएसटी बिल का सपोर्ट किया है. इस सेक्टर से जुड़े लोगों का मानना है कि जीएसटी लागू होने से उनकी उत्पादन लागत कम होगी.

रिपोर्ट पर ऑक्सस इनवेस्टमेंट के चेयरमैन सुरजीत भल्ला ने कहा, ''15%-15.5% रेवेन्यू न्यूट्रल रेट अच्छा है. हम 20%-22% दर की उम्मीद कर रहे थे जो सरकार को मुश्किल में डाल सकती थी.'' उन्होंने कहा कि अब सरकार बिना राजस्व खोए कांग्रेस की मांगे मान सकती है.

हिंदुस्तान टिन वर्क्स के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय भाटिया कहते हैं, ''उद्योग जगत 13-15 फीसदी रेवेन्यू न्यूट्रल दर की उम्मीद कर रहा था. 12वें वित्त आयोग ने भी एक दर बांधने की अनुशंसा की है.'' हालांकि, उन्होंने आगे कहा, 17-18 फीसदी की दर भी सही है. अब बिल पास होने की उम्मीद ज्यादा है.

दूसरी ओर सुब्रामण्यम पैनल की रिपोर्ट से हर कोई प्रभावित नही है.

रिपोर्ट की आलोचना

अर्थशास्त्री अशोक देसाई के अनुसार, ''जीएसटी की मूल भावना यह है कि सभी वस्तुओं पर समान टैक्स लगाया जाए. विभिन्न कैटेगरी में 12 से 40 फीसदी टैक्स लगाकर पैनल ने जीएसटी की मूल भावना को खत्म कर दिया.''

देसाई ने कहा, वर्तमान व्यवस्था में वस्तुओं के विभिन्न कैटेगरी में अलग-अलग टैक्स का प्रावधान करके भी चला जा सकता है.

अब देखना है कि पैनल की रिपोर्ट से उठे सवालों को एनडीए सरकार किस तरह दूर करती है.

First published: 5 December 2015, 17:18 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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