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जीएसटी बिल पर मतैक्य मील का पत्थर!

नीरज ठाकुर | Updated on: 18 June 2016, 15:28 IST
(मलिक/कैच न्यूज)

एनडीए सरकार ने मंगलवार को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) पर सभी राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक कर उनका समर्थन हासिल कर लिया है. जीएसटी बिल पारित कराने की दिशा में यह मील का पत्थर है! सरकार संसद के मॉनसून सत्र में इस बिल को पारित कराने की अब पूरी कोशिश करेगी. सरकार का एजेण्डा इसे एक अप्रैल 2017 से लागू करने का है.

आजादी के बाद से यह सबसे बड़ा प्रस्तावित कर सुधार है. इसके लिए संविधान संशोधन की जरूरत होगी. जीएसटी लागू होने से देश के कर ढांचे में सुधार आएगा और केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा लिए जाने वाले करों का इसमें समावेश हो जाएगा. वर्ष 2014-15 में अप्रत्यक्ष करों से केन्द्र को 5.46 लाख करोड़ की आय हुई थी.

पिछले दो सालों से एनडीए सरकार निवेशकों और अर्थशास्त्रियों का विरोध झेल रही है कि वह राज्यसभा में यह बिल पारित कराने के लिए विपक्ष को मना नहीं पा रही है. राज्य सरकारों का विरोध इस आधार पर था कि जीएसटी लागू हो जाने से उनका राजस्व कम हो जाएगा क्योंकि सभी कर एक कर में बदल जाएंगे.

अप्रत्यक्ष कर पीडब्ल्यूसी इंडिया के लीडर प्रतीक जैन कहते हैं कि संशोधित डाफ्ट पूर्व के ड्राफ्ट की अपेक्षा ज्यादा बेहतर है. जब यह जनता में विचार-विमर्श के लिए आएगा तो इसे काफी समर्थन मिलेगा.

वर्ष 2014-15 में अप्रत्यक्ष करों से केन्द्र को 5.46 लाख करोड़ की आय हुई थी

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह एक अप्रैल 2017 से लागू हो जाएगा. जैन आगे कहते है कि राज्यों के साथ मतैक्य बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ी. अब उद्योगों को भी इस कानून का विश्लेषण करने की जरूरत होगी ताकि वे अपने व्यापार का तालमेल इस कानून के साथ बैठा सकें और इसके लिए आवश्यक तैयारी कर सकें.

जीएसटी लागू होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मैन्यूफैक्चर्ड गुड्स की लागत में कमी आएगी. इससे उपभोक्ता की क्रयशक्ति बढ़ेगी और लोग वस्तुओं का उपभोग भी ज्यादा कर सकेंगे.

उम्मीद जताई जा रही है कि मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में संगठित और असंगठित क्षेत्र दोनों तरह की कम्पनियों को बाजार मिलेगा. एक तरह का कर होने से मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की कम्पिनयां अपने उपलब्ध संसाधनों, गुड्स की वेयरहाउसिंग का अधिकतम उयोग कर सकेंगी.

विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि जीएसटी लागू होने से भारत की जीडीपी भी एक साल में दो फीसदी तक बढ़ जाएगी. इसका मतलब यह होगा कि 2015-16 में 7.6 फीसदी ग्रोथ का जो अनुमान लगाया गया है वह 10 फीसदी के आसपास तक पहुंच जाएगा.

मॉडल जीएसटी कानून पर सहमत हो जाने के बाद अब राज्य अपने राज्यों के लिए जीएसटी बिल पर आधारित छोटे-मोटे बदलाव के साथ अपना मॉडल कानून बनाएंगे. इनमें कुछ विशेष रियायतें होंगी. केन्द्र और राज्यों दोनों को इंटीग्रेटेड जीएसटी पर सहमत होना होगा जिसका गुड्स के अंतरराज्यीय गतिविधियों से सरोकार होगा.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि राज्य जीएसटी कानून के तहत करों पर संविधान संशोधन में सहयोग करने को तैयार हैं. इससे राज्यों की कांग्रेस सरकारों पर भी दबाव बनेगा. राज्यों को जीएसटी लागू होने के बाद आमदनी में कमी की भरपाई को लेकर कुछ आपत्तियां थीं. उनके पास जीएसटी रेट को संशोधित करने की गुंजाइश रहेगी.

आगे क्या करना है?

इम्पावर्ड कमेटी के चेयरमैन अमित मित्रा कहते हैं कि जीएसटी के लिए अगली बैठक जब जुलाई में होगी तो उसमें दो मुद्दों पर विचार किया जाएगा. पहला जीएसटी के लिए रेवेन्यू न्यूट्रल रेट की गणना और दूसरा केन्द्र और राज्य सरकार दोनों के दृष्टिकोण पर कर ढांचे का प्रबंधन.

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाले पैनल ने दिसम्बर 2015 में जीएसटी के लिए टैक्स की दो रेट्स रखने की सिफारिश की थी. न्यूनतम 12 फीसदी और सर्वाधिक उत्पादों पर स्टैण्डर्ड रेट 17-18 फीसदी. जीएसटी पैनल ने रेवेन्यू न्यूट्रल रेट 15 से 15.5 फीसदी के बीच रखने की सिफारिश की है. भरोसा है कि राज्य सरकारें रेवेन्यू न्यूट्रल रेट जो महत्वपूर्ण सिफारिश है और पहलू भी, उस पर तैयार हो जाएंगी.

First published: 18 June 2016, 15:28 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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