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परिधान उद्योग बेरोजगारी की समस्या का प्रभावी हल हो सकता है

अमिताभ पांडेय | Updated on: 29 June 2016, 7:44 IST

भारतीय अर्थवयवस्था को मजबूत बनाए रखने में परिधान उद्योग के योगदान को देखते हुए, भारत सरकार ने इस सेक्टर को बहुत बड़ा आर्थिक लाभ देने की घोषणा की है. उद्योग जगत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ इस फ़ैसले का स्वागत किया है. इस फ़ैसले से परिधान उत्पादन से जुड़े व्यवसायिक क्षेत्रों के विकास के साथ साथ रोजगार पैदा होने की भी संभावनाएं बढ़ेंगी और निर्यात क्षेत्र में भी विकास की संभावनाएं हैं, जिससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी.

जगदीश भगवती और अरविंद पनगढ़िया जैसे अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आर्थिक विकास के बावजूद हमारे देश से गरीबी और कम रोजगार की समस्या इसलिए खत्म नहीं हो रही क्योंकि ये विकास पूंजी और कुशल श्रम प्रधान उद्योगों द्वारा संचालित किया जा रहा है, न कि कम कुशल श्रम उद्योग द्वारा ( जैसे की परिधान उद्योग ).

भारत में परिधान उद्योग को छोटे फर्म के तौर पर देखा जाता है जिसमे काम करने वालों की संख्या 49 या उससे भी कम होती है. वहीं अगर हम चीन से तुलना करें तो यहां श्रमिकों का एक बहुत बड़ा हिस्सा मध्यम या बड़े फर्म में काम करता है जहां काम करने वालों की संख्या 200 या उससे भी ज़्यादा होती है.

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छोटे स्तर पर व्यवसाय करने की वजह से कपड़ा उद्योग के क्षेत्र में भारत को विश्व बाजार में एक सफ़ल प्रतियोगी के रूप में नहीं देखा जाता. इसी वजह से विश्व स्तर पर इस उद्योग में भारत की हिस्सेदारी और विकास की संभावनाएं कम होती जा रही हैं.

श्रम सुधार की जरूरत

भारतीय परिधान उद्योग के सामने सबसे बड़ा सवाल इस व्यवसाय की कमजोर और लचर संरचना है. साथ ही, इस उद्योग को ये सोचने की भी ज़रूरत है कि बिगड़ती स्थिति को कैसे सुधारा जाए.

फिलहाल भारत में परिधान उद्योग का मुख्य उदेश्य इस व्यवसाय की संरचना को सुदृढ़ और प्रभावशाली बनाने के साथ-साथ, इसे बड़े उद्योग में तब्दील करना भी है. इन दो मुख्य सुधारों के बाद भारत इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कठिन प्रतियोगिता देने के साथ साथ जीडीपी, रोजगार वृद्धि और गरीबी की समस्या हटाने में उल्लेखनीय ढंग से सहभागिता देने में सक्षम हो जाएगा.

भगवती और पनगढ़िया ने अपनी किताब "ट्रिस्ट विथ डेस्टिनी" में ये कहा है कि भारत में बड़े पैमाने पर काम करने वाले उद्योग श्रम कानूनों की पेंचीदगी और तकनीकी अक्षमताओं की वज़ह से कपड़ा उद्योग जैसे छोटे उद्योगों से दूर रहते हैं.

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कपड़ा उद्योग और दूसरे ऐसे उद्योगों (जिसमें श्रम की ज़्यादा ज़रूरत पड़ती है) को छोटे फर्म के तौर पर देखा जाता है और अमूमन इस क्षेत्र में श्रमिक शोषण का शिकार हो जाते हैं. इसका कारण श्रम बाज़ार का लचीला न होना है जिसकी वजह से बाज़ार में श्रम लागत बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है.

इन चुनौतियों को देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि भारत में बड़े पैमाने पर श्रम आधारित व्यवसाय के उत्थान के लिए श्रम सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है. चीन और बाकि एशियाई प्रतिभागियों से आगे निकलने के लिए भारतीय कपड़ा उद्योग को बेहतर संरचना और मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ श्रम बाजार में भी गंभीर सुधार करने की जरूरत है. श्रम बाज़ार में सुधार, सीमित हो चुके कपड़ा उद्योग को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लागू किये गए जटिल श्रम कानूनों के बोझ और पाबंदियों से मुक्त करेगा.

कपड़ा व्यवसायियों का गरीब होना समस्या नहीं है

भारतीय विकास की प्रगति को देखते हुए ये सवाल बहुत महत्वपूर्ण है कि कपड़ा उद्योग के उत्थान के लिए किए गए फैसले सही हैं या नहीं.

भारतीय सरकार द्वारा परिधान उद्योग को दी जाने वाली आर्थिक मदद व्यवसायियों के लिए कारगर साबित हो सकती है. भारत सरकार वितरण के अपने इस फ़ैसले से उन करों का भुगतान कर सकती है, जिसका भुगतान करना इस उद्योग के लिए मुश्किल है.

इनकम टैक्स, घरेलू करों और ईपीएफ योगदान में राहत देने के साथ-साथ अतिरिक्त सब्सिडी, प्रोत्साहन के रूप में देने की पेशकश की गयी है.

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क्या इन उपायों को अपनाने के बाद भारतीय कपड़ा उद्योग एक बड़े पैमाने पर काम करने वाले औपचारिक उद्योग के तौर पर उभेरगा? या इसके छोटे पैमाने पर काम करने वाले कमजोर प्रतियोगी और अनौपचारिक श्रम रोज़गार देने वाले क्षेत्र की छवि बरक़रार रहेगी? वैसे ये बात ध्यान में रखने की जरूरत है कि इन सारी चुनौतियों के बाद भी कपड़ा व्यवसायियों को अच्छा लाभ मिलता है.

ये मानना गलत है कि लघु उद्योग करने वालों के पास पैसे की कमी होती है. बल्कि इसमें अनौपचारिक तौर पर काम कर रहे गरीब श्रमिकों की संख्या ज़्यादा होती है. अगर लाभ का अंतर ज़्यादा होता है तो इस बात की पूरी उम्मीद है कि ज़्यादा छोटे फॉर्मों की स्थापना के साथ-साथ, कपड़ा उद्योग बिना किसी ढांचागत बदलाव के भी विकास कर सकता है. पर ध्यान देने वाली बात ये है कि क्या हम इसी तरह का विकास चाहते हैं या पुराने ढर्रे पर ही चलना चाहते है?

श्रम सुधार के लिए उठाए गए कदमों पर हमेशा राजनैतिक असर देखा गया है. कपड़ा उद्योग के उत्थान के लिए लिया गया फैसला सरकार के द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायताओं में से एक है. क्या ये फैसला कपड़ा उद्योग जगत में जरूरी बदलाव ला सकेगा?

First published: 29 June 2016, 7:44 IST
 
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