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टैक्स डिफाल्टर हसन अली से 50 हजार करोड़ वसूलने की तैयारी

समीर चौगांवकर | Updated on: 5 October 2016, 7:48 IST

30 सिंतबर को समाप्त हुए आयकर विभाग की आईडीएस योजना से 30 हजार करोड़ टैक्स वसूलने में सफल रही केन्द्र सरकार अब बडे टैक्स डिफाल्टरों और कालेधन के बड़े खिलाडियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है.

सूत्र बताते है कि केन्द्र सरकार ने हसन अली खान पर अपनी नजरें गड़ा दी है और उससे 50 हजार करोड़ का टैक्स वसूलने के लिए जरूरी तैयारी में जुटी है और हसन अली के खिलाफ सीबीआई जल्द ही एफआइआर दर्ज करने की तैयारी में है. इसमें हसन अली को अब तक बचाने वाले अधिकारियों को भी आरोपी बनाने की भी संभावना है.

गौरतलब है कि 2007 में यूपीए सरकार ने हसन अली के खिलाफ जांच शुरू की थी. उस वक्त आयकर विभाग ने पुणे, मुम्बई और कोलकत्ता में हसन अली और उसके साथियों के ठिकानों पर कई छापे मारे थे. 

पांच जनवरी 2007 को मारे गए छापों में मिले दस्तावेज इतने महत्वपूर्ण थे कि आठ जनवरी को ईडी में केस दर्ज करने के बाद प्रिवेंशन आॅफ मनी लॉण्डरिंग एक्ट-2002 के तहत मुम्बई की विशेष अदालत ने हसन और उसके सहयोगियों के पांच खातों का ब्यौरा देते हुए सिंगापुर, अमेरिका, हांगकांग, यूएई और ब्रिटेन के अधिकारियों को हसन अली के खिलाफ जांच में सहयोग करने के लिए अनुरोध पत्र भेजा था.

आयकर विभाग ने हसन अली खान को आठ अरब डॅालर पर बकाया 36,000 करोड़ रुपये का टैक्स भरने का पहली बार नोटिस 29 दिंसबर, 2008 को दिया था. बाद में एक संशोधित नोटिस में बकाये की रकम को बढाकर 50,000 करोड़ रुपये कर दिया गया.

जल्द ही आयकर विभाग हसन अली पर शिंकजा कसने की तैयारी में है

प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग ने उस समय संदेह जताया था कि हसन अली खान कई नेताओं और उद्योगपतियों के अवैध पैसों का स्विस बैकों में अवैध हस्तांतरण करने का व्यवसाय करता है और उसके विदेशी खातों में जमा आठ अरब डालर की रकम नेताओं और काला व्यवसाय करने वाले उद्योगपतियों की है.

आयकर विभाग ने 29, दिंसबर 2008 को जारी अपने 140 पन्नों के कारण बताओ नोटिस में बताया है कि किस तरह खान ने 1982 में 15 लॉख डालर से 2006 में 8 अरब डॉलर जमा कराने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया. उस समय जांचकर्ता यह भी पता लगाने में जुटे थे कि क्या हसन अली के पैसों से आतंकवादियों को मदद तो नहीं दी गई. यह जांच प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और पुलिस आयुक्त की संयुक्त टीम ने की थी लेकिन जांच बीच में ही रोक दी गई.

सूत्र बताते हैं कि केन्द्र सरकार के निर्देश पर कालेधन को बाहर निकालने में आयकर और प्रवर्तन निदेशालय के आला अधिकारियों ने हसन अली की फाइल खंगालना शुरू कर दिया है. जल्द ही आयकर विभाग हसन अली पर शिंकजा कसने की तैयारी में है.

कौन है हसन अली

पुणे और मुम्बई में घोड़ों के फार्म के मालिक के रूप मेें मशहूर हसन अली एक समय दुबई और हैदराबाद में मेटल स्क्रैप का व्यवसाय करता था और अल समीर एंटरप्राइजेज के तहत पश्चिम एशिया में चावल और प्याज का निर्यात करता था.

नेताओं से संपर्क में आने पर उसने अपना व्यवसाय बंद कर दिया और कालेधन को ठिकाने लगाने का काम करने लगा. हसन अली तीन पासपोर्ट रखने के कारण पुलिस की जांच का सामना भी कर चुका है. हसन अली को पहला पासपोर्ट हैदराबाद, दूसरा मुंबई और तीसरा पासपोर्ट पटना से जारी किया गया था. 2008 में वर्ली पुलिस थाने में उसे गिरफ्तार किया गया. उसके तीनों पासपोर्ट पुलिस ने ईडी को दे दिए.

First published: 5 October 2016, 7:48 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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