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पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारी बैंकों को मिली 22,915 करोड़ रुपये की रकम

अभिषेक पराशर | Updated on: 19 July 2016, 16:01 IST
QUICK PILL
  • केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17 में 13 पीएसयू बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए 22,915 करोड़ रुपये आवंटित किए है.
  • एनपीए में हो रही बढ़ोतरी और बेसल-3 के नियमों को लागू करने की बाध्यता की वजह से भारतीय बैंकों को बड़ी पूंजी की जरूरत होगी. 
  • कुल आवंटित रकम में 75 फीसदी राशि बैंकों को तत्काल जारी कर दिए गए हैं. बाकी की 25 फीसदी रकम उनके प्रदर्शन के आधार पर जारी की जाएगी. केंद्र सरकार ने आम बजट के दौरान वित्त वर्ष 2016-17 में 25,000 करोड़ रुपये की राशि बैंकों के पूंजीकरण के लिए आवंटित की थी.

केंद्र ने मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17 में 13 पीएसयू बैंकों के लिए 22,915 करोड़ रुपये की पूंजी आवंटित कर दी है. वित्त मंत्रालय ने कहा, 'सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डालने की कवायद जरूरतों के मुताबिक की गई है. यह पिछले पांच सालों के क्रेडिट ग्रोथ के सीएजीआर और बैंकों की तरफ से कर्ज वृद्धि में लगाए गए अनुमान पर आधारित है. साथ ही इसमें प्रत्येक पीएसयू बैंक के संभावित ग्रोथ का भी ध्यान रखा गया है.'

एनपीए में हो रही बढ़ोतरी और बेसल 3 के नियमों को लागू करने की बाध्यता की वजह से भारतीय बैंकों को बड़ी मात्रा में पूंजी की जरूरत होगी. सरकार ने इंद्रधनुष योजना के तहत मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी जरूरतों को पूरा करने की योजना बनाई है.

बैंको में चरणबद्ध तरीके से यह पूंजी डाली जाएगी. इसके तहत केंद्र सरकार ने पहली किस्त जारी कर दी है. सरकार ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 721 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक को 2,816 करोड़ रुपये जबकि सिंडीकेट बैंक को 1,034 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.

केंद्र सरकार ने पंजाब नेशनल बैंक को 2,816 करोड़ रुपये जबकि सिंडीकेट बैंक को 1,034 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.

बैंक ऑफ इंडिया को 1,784 करोड़ रुपये मिलेंगे जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 7,575 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. 

कुल आवंटित रकम में 75 फीसदी राशि बैंकों को तत्काल जारी कर दिए गए हैं. बाकी की 25 फीसदी रकम उनके प्रदर्शन के आधार पर जारी की जाएगी. केंद्र सरकार ने आम बजट के दौरान वित्त वर्ष 2016-17 में 25,000 करोड़ रुपये की राशि बैंकों के पुनर्पूंजीकरण पूंजीकरण के लिए आवंटित की थी.

एनपीए से बढ़ा संकट

बैंकों के लिए एनपीए में हो रही बढ़ोतरी सरकार के लिए बड़ी चिंता की वजह है. बढ़ते एनपीए की वजह से बैंकों को पूंजी की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. 

आरबीआई की फाइनेंशियल स्टेबलिटी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 12 सालों में बैंकिंग सेक्टर का एनपीए बढ़कर 7.6 फीसदी हो गया है जो अब तक का रिकॉर्ड है. मार्च 2017 में इसके बढ़कर 8.5 फीसदी होने की उम्मीद है. 

आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, 'मौजूदा वृहद आर्थिक स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि मार्च 2017 में एनपीए बढ़कर 8.5 फीसदी हो सकता है. अगर भविष्य में स्थिति में सुधार नहीं होेता है तो बैंकों का सकल एनपीए 9.3 फीसदी तक जा सकता है.'

रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 में बैंकों के एनपीए में करीब 80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. मार्च 2016 में बैंकों का कुल एनपीए सितंबर 2015 के 2.8 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 4.6 फीसदी हो गया. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल एनपीए 6.1 फीसदी रहा जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों का एनपीए 4.6 फीसदी रहा.

पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में पंजाब नेशनल बैंक को रिकॉर्ड 5,367 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था.

पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में  पंजाब नेशनल बैंक को रिकॉर्ड 5,367 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. किसी भारतीय बैंक को हुआ यह अब तक का सबसे बड़ा घाटा है. पीएनबी को हुए बड़े घाटे की वजह से एनपीए की प्रॉविजनिंग रही. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में बैंक को 308.56 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. 

बढ़ते एनपीए की वजह से बैंकों को नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है. जिसका सीध असर इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी परियोजनाओं की फंडिंग पर हो रहा है.

सरकार ने कुल 13 बैंकों को 22,915 करोड़ रुपये की पूंजी मुहैया कराई है. मौजूदा वित्त वर्ष के लिए वित्त मंत्रालय ने इलाहाबाद बैंक को 44 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ इंडिया को  1,784 करोड़ रुपये, केनरा बैंक को 997 करोड़ रुपये जबकि देना बैंक को 594 करोड़ रुपये दिए जाने हैं. 

वित्त मंत्रालय की तरफ से पूंजी आवंटित किए जाने के बाद सेंसेक्स का बैंकिंग इंडेक्स में मामूली गिरावट देखी गई. बैंकेक्स 0.14 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ करीब 30 अंक की कमजोरी पर कारोबार कर रहा है. 

सरकार ने बैंकों के क्रेडिट ग्रोथ को बनाए रखने के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में इंद्रधनुष परियोजना के तहत पीएसयू बैंकों में 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने की मंजूरी दी थी. मार्च 2016 में 40 सूचीबद्ध बैंकों का एनपीए करीब 5.8 ट्रिलियन रुपये रहा है. जबकि दिसंबर अंत में यह रकम 4.38 ट्रिलियन रुपये थी.

First published: 19 July 2016, 16:01 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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