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सरकारी कंपनियों का अब और घाटा नहीं सहेगी सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 April 2016, 15:14 IST
QUICK PILL
  • सरकारी खर्च घटाने की कवायद के तहत सरकार घाटे में चल रही सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटा सकती है. सरकार इन कंपनियों को बेचे जाने के पहले इनमें काम कर रहे कर्मचारियों को एकमुश्त मोटी रकम देने पर विचार कर रही है.
  • खर्च प्रबंधन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचे जाने  के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है.

सरकारी कंपनियों का अब और घाटा नहीं सहेगी सरकार सरकारी खर्च घटाने की कवायद के तहत सरकार घाटे में चल रही सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटा सकती है. सरकार की योजना इन कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों के हितों को भी सुरक्षित करने की है. 

सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों की तरफ से होने वाले विवाद और हंगामे की आशंका के मद्देनजर सरकार इन कंपनियों को बेचे जाने के पहले इनमें काम कर रहे कर्मचारियों को एकमुश्त मोटी रकम देने पर विचार कर रही है.

खर्च प्रबंधन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचे जाने  के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक सरकारी हिस्स्सेदारी घटाए जाने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा.

सरकार की योजना इन कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों के आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने की भी है ताकि हिस्सेदारी बेचे जाने की स्थिति में सरकार और कर्मचारी दोनों ही फायदे की स्थिति में रहें.

कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी रकम

सरकार की योजना इन पीएसयू में काम करने वाले कर्मचारियों को एक बार बड़ी रकम देने की है. हालिया सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल मार्च तक 77 पीएसयू घाटे में चल रही थीं. इन 77 सरकारी कंपनियों का कुल घाटा 27,360 करोड़ रुपये रहा है.

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल मार्च तक 77 पीएसयू घाटे में चल रही थीं

भारत गोल्ड माइंस, टैनरी एंड फुटवियर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, साइकिल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, माइनिंग एंड एलाएड मशीनरी कॉरपोरेशन, नेशनल बाइसिकिल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, भारत प्रॉसेस एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स, वेब्रिड इंडिया और भारत ब्रेक्स एंड वॉल्व्स जैसी कंपनियों को बेचे जाने की योजना है.

खर्च प्रबंधन आयोग का गठन सितंबर 2014 में किया गया था और इस आयोग ने घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों की सपंत्ति को बेचे जाने की सिफारिश की थी. 

आयोग को केंद्र सरकार के खर्च की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इसके साथ ही आयोग को विकास कार्य पर होने वाले खर्च बढ़ाए जाने के साथ बजटीय खर्च का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. 

First published: 25 April 2016, 15:14 IST
PSU
 
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