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खुलासा : RBI के खजाने पर है केंद्र की नजर, यही है टकराव का प्रमुख कारण

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 November 2018, 10:36 IST

केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण सामने आया है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट की माने तो केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आरबीआई से उसके कुल रिजर्व 9.59 लाख करोड़ में से 3.6 लाख करोड़ के सरप्लस की मांग की थी. यह राशि केंद्रीय बैंक के कुल 9.59 लाख करोड़ रुपये के भंडार की एक तिहाई से अधिक है. मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि आरबीआई और सरकार इस सरप्लस का संयुक्त रूप से देखरेख कर सकते हैं.

दूसरी और आरबीआई का मानना है कि सरकार की इस मांग से देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा और यही कारण है कि आरबीआई ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है. भारतीय रिजर्व बैंक सरकार द्वारा उसके रिजर्व में इस प्रयास को हस्तक्षेप करने के रूप में देखता है, जिससे मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

वित्त मंत्रालय का तर्क है कि वर्तमान ढांचा आरबीआई द्वारा जुलाई 2017 में एकतरफा बनाया गया था क्योंकि बैठक में दोनों सरकार के नामांकित उम्मीदवार उपस्थित नहीं थे. सरकार ने इस ढांचे में प्रवेश नहीं किया और तब से लगातार आरबीआई के साथ चर्चा की मांग कर रहा है. सरकार आरबीआई से 3.6 लाख करोड़ रुपये चाहती है, जो उसका एक तिहाई भण्डार है. भारतीय रिजर्व बैंक को लगता है कि केंद्रीय बैंक रिजर्व का उपयोग करना नुकसानदायक है.

2017-18 में आरबीआई ने सरकार को 50 000 करोड़

का सरप्लस दिया था. जबकि 2016-17 में 30,659 करोड़ रुपये का सरप्लस उसने सरकार को दिया था.
सरकार का मानना है कि, जब वैश्विक केंद्रीय बैंकों की तुलना में आरबीआई की कुल संपत्ति का प्रतिशत कुल संपत्ति (लगभग 28 प्रतिशत) के प्रतिशत के रूप में होता है. अमेरिका, ब्रिटेन, अर्जेंटीना, फ्रांस, सिंगापुर समेत देश कुल संपत्तियों के प्रतिशत के रूप में बहुत कम पूंजी बनाए रखते हैं, जबकि मलेशिया, नॉर्वे और रूस सहित देशों के लिए यह भारत की तुलना में काफी अधिक है.

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य Viral Acharya ने चेतावनी दी कि केंद्रीय बैंक की आजादी को कमजोर करना एक त्रासदी जैसा हो सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य की टिप्पणियों से पता चलता है कि केंद्रीय बैंक पर आगामी लोकसभा चुनाव से पहले अपनी नीतियों को रिलेक्स देने शक्तियों को कम करने के लिए सरकारी दबाव बढ़ रहा है. यही कारण है कि बीते सप्ताहों में भारतीय वित्तीय बाजार गिर रहा हैं.

First published: 6 November 2018, 10:30 IST
 
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