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GST एक साल: क्या GST ने अफसरों का भ्रष्टाचार बंद कर दिया ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 July 2018, 12:38 IST

भारत में टैक्स विभाग हमेशा ही भ्रष्टाचार को लेकर सवालों के घेरे में रहा है. इसी साल मार्च में सरकार ने लोकसभा में कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद से प्रणाली में भ्रष्टाचार में कमी आ रही है और इसकी शुरूआत के बाद से औसत मुद्रास्फीति में गिरावट आई है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तारिक अनवर के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी.

हालांकि जीएसटी लागू होने के बाद बड़े अफसरों के रिश्वतखोरी के मामले बदस्तूर जारी रहे. एक घटना कानपुर जीएसटी की थी और केंद्रीय उत्पाद आयुक्त संसार चंद सहित 9 लोगों को रिश्वत के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया. इस मामले में सीबीआई सूत्रों के अनुसार रिश्वत का पैसा इकट्ठा करने का काम तीन लोगों के हाथ में था और पैसे का लेनदेन हवाला जरिए होता था.

जिसमें कमिश्नर की पत्नी भी शामिल बतायी गई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कारोबारियों से संसार चंद की पत्नी को महंगे टीवी, फ्रिज देने और रिश्वत का पैसा हवाला के जरिए देने के लिए कहा जाता था.

जीएसटी लागू होने के बाद यह कोई पहला मामला नहीं था जब जीएसटी से जुड़े लोग भ्रष्टाचार में पकडे गए हैं. इससे पहले सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा ने सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) के इंस्पेक्टर को घूस लेते गिरफ्तार किया था. इंडिया बिल्डिंग में स्थित सीजीएसटी विभाग के इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने एक व्यापारी से बांड जारी करने के बदले दस हजार रुपये की घूसा मांगी थी.

एक अन्य मामले में नवनिर्मित जीएसटी परिषद के एक अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) को सीबीआई ने अपने करीबी सहयोगियों के जरिये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था. आरोप था कि एक प्राइवेट टैक्‍स कंसल्‍टेंट मानस पात्रा ने सरकारी अफसरों से रिश्‍वत ली.

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First published: 1 July 2018, 12:25 IST
 
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