Home » बिज़नेस » GSTN and Raphael deal on the CAG radar, Modi government face challenge
 

CAG की रडार पर हैं जीएसटीएन और राफेल सौदा, मोदी सरकार के सामने चुनौती

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 June 2018, 13:06 IST

राष्ट्रीय लेखा परीक्षक (CAG) राफेल फाइटर सौदे और गुड्स एंड सर्विस टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) का ऑडिट करेगा. एक रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि विपक्ष के आरोपों के बाद सीएजी की रडार पर ये दोनों मामले हैं. रिपोर्ट के अनुसार राफेल डील से जुड़े सूत्र ने कहा कि 'राफेल सौदे को सीएजी द्वारा ऑडिट किया जाए है. हमारे लिए यह एक नियमित ऑडिट है."

इससे पहले कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि एनडीए सरकार ने इस सौदे के लिए राफेल निर्माता कंपनी डेसॉल्ट को ज्यादा भुगतान किया है. इस डील में फ्रांस से 58000 करोड़ में 36 राफेल विमान खरीदे जाने थे.

इसके अलावा सीएजी जीएसटीएन का भी ऑडिट कर रहा है. जीएसटीएन के ऑडिट में कई मापदंडों के अलावा, सीएजी ऑडिट में आईजीएसटी के विभाजन के मुद्दे को भी जांच करने की संभावना है. सूत्र ने कहा कि ''क्या आईजीएसटी विभाजन सही है और समय भी एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है."

जब से पिछले केंद्रीय गृह सचिव राजीव मेहरिश ने पिछले सितंबर के अध्यक्ष के रूप में पद संभाला था, तब से सीएजी इस पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा था. सीएजी ऑडिट वर्तमान में तीन व्यापक श्रेणियों में बांटा गया है- वित्तीय, अनुपालन और प्रदर्शन. जबकि वित्तीय ऑडिट सरकार द्वारा रसीदों और भुगतान पर केंद्रित है.

इससे पहले भारत में सबसे बड़े टैक्स सुधार माने जाने वाले वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को चलाने वाली कंपनी गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) के स्वामित्व पर कई बार सवाल उठे. कई वरिष्ठ अधिकारियों तथा अप्रत्यक्ष कर कर्मचारी संगठनों ने जीएसटीएन अधिकतर हिस्सेदारी निजी इकाइयों के पास होने को लेकर चिंता जताई थी. अब जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) को पूरी तरह से सरकारी कंपनी बनाने पर जीएसटी काउंसिल ने मंजूरी दे दी है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि जीएसटी काउंसिल ने जीएसटीएन में 51 फीसदी गैर-सरकारी स्वामित्व को खरीदने की सिफारिश की है. इससे पहले जीएसटीएन के मूल स्वामित्व ढांचे में 49 फीसदी हिस्सा सरकार के पास था, जिनमें से 24.5 फीसदी केंद्र और 24.5 फीसदी हिस्से में सारे राज्य थे. वित्त मंत्री ने बताया कि अब जीएसटीएन के नए स्वामित्व ढांचे में 50 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के पास रहेगा, जबकि बाकी के 50 फीसदी हिस्से को सारे राज्यों में बांट दिया जाएगा.

ये भी पढ़ें : क्या GSTN को सरकारी कंपनी बनाने के पीछे सरकार की ये मजबूरी थी ?

First published: 6 June 2018, 13:02 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी