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नया साल शुरू होते ही आई बुरी खबर, आपके सर पर आ गया 62 हजार रुपये का कर्ज, जानिए कैसे

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 January 2019, 9:47 IST

नए साल की शुरुआत पर देश भर में जश्न का माहौल है. हर कोई बीते साल 2018 के आखिरी दिन नए साल के स्वागत के लिए ख़ास तैयारियों में लगा हुआ था. आज से एक नए साल की शुरुआत हो चुकी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके नए साल की शुरुआत आप आपके सर पर 62 हजार के कर्ज हुई है. हैरानी की बात है लेकिन आंकड़ें बताते हैं कि नए साल में देश के हर व्यक्ति पर औसतन 62 हजार से भी ज्यादा का कर्ज आ गया है.

दरअसल ये खुलासा वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट से हुआ है. वित्त मंत्रालय ने जो सरकार को कर्ज प्रबंधन की एक तिमाही रिपोर्ट सौंपी है उसमे ये बात सामने आई है कि देश की 134 करोड़ की आबादी पर प्रति व्यक्ति हजारों का कर्ज आ गया है. दरअसल इस रिपोर्ट के अनुसार बीते साल के सितंबर माह के आखिर तक सरकार पर कर्ज बढ़कर 82 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. इन आंकड़ों के गणित को समझें तो इस हिसाब से देश के 134 करोड़ नागरिकों में से प्रत्येक नागरिक पर करीब 62 हजार रुपये का कर्ज आ गया है.

रिपोर्ट के अनुसार बीते साल जून माह के आखिर तक सरकार पर 79.8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था. इस आंकड़ें के हिसाब से तो प्रति नागरिक पर 59 हजार 552 रुपये का कर्ज था. यानी सरकार के सर पर बढ़े कर्ज के बोझ को देखें तो महज तीन महीनों में आप पर 2,448 रुपये का कर्ज बढ़ गया है. और सरकार पर 2.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज केवल तीन महीनों में बढ़ा है.

क्‍यों बढ़ा ये कर्ज

वित्‍त मंत्रालय ने जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी है इस हिसाब से इतनी भारी मात्रा में कर्ज बढ़ने की अनेक वजहें सामने आई हैं. कर्ज में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होना. इतना ही नहीं इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट भी इसके लिए जिम्मेदार है. वहीं अमेरिकी फेड-भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दरों में जो देनदारी पर इजाफा किया गया है उससे भी सरकार के कर्ज में इजाफा हुआ है.

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और भी बढ़ सकता है कर्ज!

आंकड़ों के हिसाब से गणना करें तो अभी सरकार या आप पर लगा यह कर्ज अभी और भी बढ़ सकता है. दरअसल रिजर्व फेड जो कि अमेरिका की आर्थिक नीतियों की निगरानी करने वाली संस्‍था है, ने हाल ही में अपनी देनदारी पर ब्याज की दरों में इजाफा किया था. इसके साथ ही फेड ने ये भी संकेत दिए थे कि आने वाले कुछ दिनों में ब्‍याज दरों में वह एक बार फिर से इजाफा ला सकती है. अगर इस तरह से फेड ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तो इसका असर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर भी पड़ सकता है. हालांकि देश में रिजर्व बैंक ब्‍याज दरों में कटौती करके इस कर्ज को रिकवर करने में मदद भी कर सकता है.

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कर्ज बढ़ा तो बढ़ेगी महंगाई

अगर इसी तरह से कर्ज बढ़ता गया तो देश में इसका असर महंगाई के रूप में होगा. आरबीआई का भी मानना है कि इस नए साल में देश में महंगाई का खतरा बढ़ रहा है. गौरतलब है कि बीते माह आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा था, ''जहां वित्त वर्ष 2018-19 के दूसरी छमाही में महंगाई 2.7 से 3.2 फीसदी हो सकती है वहीं वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही के दौरान यह 3.8 से 4.2 फीसदी हो सकती है.'' रिज़र्व बैंक की तरफ से ये बयान मौद्रिक समीक्षा नीति के बाद आया था. अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर देश में महंगाई के रूप में होगा और आपकी जेब का बोझ बढ़ सकता है.

First published: 1 January 2019, 9:46 IST
 
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