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जानिए कौन सी कार कंपनी करती है सबसे ज्यादा झूठे दावे

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 December 2016, 18:45 IST

यूं तो दुनिया में एक से बढ़कर एक तेज रफ्तार, लग्जरी और शानदार कारें हैं. लेकिन ईंधन खपत के मामले में सभी का अपना-अपना राग है. हाल ही में जारी एक सूची की मानें तो सर्वाधिक तेल पीने वाली यानी ईंधन की सबसे ज्यादा खपत करने वाली कारों की सूची में मर्सडीज सबसे ऊपर रही है. 

द डेलीमेल में छपी खबर की मानें तो जर्मनी की कार निर्माता मर्सडीज वास्तविक दुनिया यानी रोजमर्रा की सवारी और प्रयोगशाला में ड्राइविंग की तुलना में 54 फीसदी ज्यादा ईंधन की खपत करती है. ट्रांसपोर्ट एंड एन्वार्यमेंट माइंड द गैप द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक सेल्स ब्रोशर में किए गए दावे की तुलना में मर्सडीज ए और ई क्लास सड़कों पर 56 फीसदी ज्यादा ईंधन की खपत करती हैं.

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इन आंकड़ों की मानें तो मर्सडीज सबसे बेकार प्रदर्शन करने वाली कार निर्माता है और इसकी सी क्लास कार इसके विज्ञापन में किए गए दावे की तुलना में 54 फीसदी ज्यादा ईंधन की खपत करती है. इसके बाद फॉक्सवैगन की पैसाट आती है जिसकी ईंधन खपत 46 फीसदी ज्यादा है.

आंकड़े जारी करने वाली संस्था का कहना है कि ईंधन क्षमता प्रयोगों को प्रयोगशाला में किया जाता है जिनमें काफी हेरफेर करने के लिए तमाम लूपहोल्स और लचीलापन होता है. ट्रांसपोर्ट एंड एन्वार्यमेंट के क्लीन व्हीकल डायरेक्टर  ग्रेग आर्चर कहते हैं, "जो कारें विज्ञापन की तुलना में 50 फीसदी अतिरिक्त ईंधन की खपत करती हैं वे ग्राहकों को धोखा दे रही हैं और पर्यावरणीय नियमों से छेड़छाड़ कर रही हैं."

"जब तक हम चाहते हैं कि अमेरीकी, यूरोप जैसा काम फिर से करें, कमीशन और नेशनल व्हीकल एप्रूवल अथॉरिटीज को मर्सडीज और ऑडी की जांच जरूर करनी चाहिए कि कहीं वे अपनी गाड़ियों में ऐसी डिवाइसों का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे जिससे परीक्षण प्रक्रिया से पार पाया जा सके." पिछले साल पाया गया था कि मर्सडीज, हॉन्डा, माजदा और मित्शुबिशी ऐसी कारें निर्मित कर रही हैं जो प्रयोगशाला की तुलना में सड़क पर ज्यादा प्रदूषण उत्सर्जित कर रही थीं. 

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फरवरी में अमेरिका में डीजल कार बिक्री को लेकर मर्सडीज पर एक मुकदमा भी दर्ज किया गया था जिसमें सीमा से ज्यादा नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन करने के साथ इसे छिपाने के मैकेनिज्म को रेगुलेटर्स के सामने जाहिर नहीं करना शामिल था. इस मुकदमे में कहा गया था कि मर्सडीज द्वारा ब्लूटेक डीजल टेक्नोलॉजी को 'दुनिया का सबसे स्वच्छ' बताना असलियत में 'झूठा और धोखा देने वाला' दावा है.

इसके बाद मर्सडीज के एक प्रवक्ता ने कहा था कि इस मुकदमे का कोई आधार नहीं है. उन्होंने कहा था, "फिलहाल हम दस्तावेज देख रहे हैं और फिर अपना बचाव करेंगे. हमें पूरा भरोसा है कि इस शिकायत का कोई ठोस आधार नहीं है."

यूरोप में सभी कार ब्रांडों के दावों और हकीकत का औसत अंतर 2012 के 28 फीसदी से बहुत तेजी से बढ़कर 2015 में 42 फीसदी तक पहुंच गया. एक दशक पहले यह अंतर 14 फीसदी था. इस मामले में 49 फीसदी के अंतर के साथ ऑडी दूसरा सबसे बेकार ब्रांड है. सामान्यरूप से अधिकांश कार ब्रांड का औसत अंतर 40 फीसदी से ज्यादा है. इनमें प्यूजो 45 फीसदी, टोयोटा 43 फीसदी और फॉक्सवैगन 40 फीसदी अतिरिक्त ईंधन खपत करती हैं.

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इस मामले में केवल एक अपवाद फिएट है जो विज्ञापन की तुलना में 35 फीसदी ईंधन खपत का अंतर देती है. बता दें कि तोड़-मरोड़कर या हेरफेर वाले टेस्ट नतीजे यूरोपीय ड्राइवरों को धोखे में रखते हैं. उनकी कारें विज्ञापन के दावों की तुलना में कहीं ज्यादा ईंधन खपत करती हैं. 

First published: 22 December 2016, 18:45 IST
 
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