Home » बिज़नेस » Catch Hindi: how much return you expect from your nps fund?
 

पेंशन फंड पर मुनाफे के लिए कितना जोखिम सही है?

नीरज ठाकुर | Updated on: 4 May 2016, 8:37 IST
QUICK PILL
  • पेंशन फंड का निवेश करने वाली संस्था पीएफआरडीए ने ज्यादा मुनाफे के लिए दो नए फंड बनाने का सुझाव दिया है.
  • नए फंड में ज्यादा जोखिम होगा लेकिन इससे ज्यादा मुनाफे की भी उम्मीद है. लेकिन शेयर बाजार गिरा तो पेंशनरों को भारी नुकसान भी हो सकता है.

नौकरी से रिटायर होते समय आप अपने पेंशन फंड (पीएफ) पर कितने रिटर्न की उम्मीद करेंगे? ये सवाल थोड़ा जटिल है क्योंकि कोई भी आदमी अधिक से अधिक रिटर्न चाहेगा. लेकिन ऐसी चाहतों से नीतियां नहीं तय होतीं.

कर्मचारियों के पीएफ से मिले पैसे का सरकार निवेश करती है. पीएफ पर ज्यादा रिटर्न हासिल करने के लिए पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट (पीएफआरडीए) लाइफ साइकिल फंड के माध्यम से इक्विटी निवेश की सीमा को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है.

पढ़ेंः बीजेपी सरकार ने लिया यू-टर्न, ईपीएफ की ब्याज दर बढ़ायी

पीएफआरडीए सरकार द्वारा किए जाने वाले निवेश और निजी सेक्टर के नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के बीच संतुलन बैठाना चाहती है.

एनपीएस क्या है?


एनपीएस एक निश्चित पेंशन योजना है. इसके तहत कोई व्यक्ति पहले से निर्धारित राशि 60 साल तक की उम्र तक निवेश करता है. साठ साल की उम्र के बाद वो इस राशि का अधिकतम 40 प्रतिशत निकाल सकता है. बाकी राशि का वो एक एन्यूटी (पेंशन प्रोडक्ट) का चुनाव करता है. जिसके प्रदर्शन के आधार पर उसे पेंशन मिलता है.

पीएफआरडीए ने पेंशन पर ज्यादा मुनाफे के लिए दो नए फंड बनाने का सुझाव दिया है

जीएन बाजपेयी की अध्यक्षता में बनी विशेषज्ञ कमिटी ने पीएफआरडीए को दो नए फंड बनाने का सुझाव दिया है. पहला फंड, 'एग्रेसिव लाइफ साइकिल फंड' होगा. इसके तहत कर्मचारी की 35 साल की आयु तक उसका इक्विटी (शेयर बाजार) एक्सपोजर 75 प्रतिशत होगा.

उम्र बढ़ने के साथ ये एक्सपोजर घटता जाएगा. 55 साल की आयु में ये 15 प्रतिशत होगा. यानी रिटायरमेंट के करीब कर्मचारी के निवेश पर नकुसान की संभावना कम हो जाएगी.

पढ़ेंः सरकार की चुनौती है राजनीतिक स्पीडब्रेकरों से पार पाना

दूसरा फंड, 'कंजरवेटिव लाइफ साइकिल फंड' होगा. इस फंड में 35 साल की आयु तक इक्विटी एक्सपोजर 25 प्रतिशत होगा. उसके बाद 55 साल की उम्र तक हर पांच साल बाद इसमें पांच प्रतिशत की कमी होती रहेगी.

वर्तमान में प्रभावी योजना के तहत 35 साल की उम्र तक इक्विटी एक्सपोजर 50 प्रतिशत होता और 55 साल की उम्र तक ये घटकर 10 प्रतिशत हो जाता है.

इससे क्या फर्क पड़ेगा?


चूंकि एनपीएस की राशि पर रिटर्न इस बात पर निर्भर होता है कि इसका निवेश कैसा किया जाता है. यानी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन मिलेगी वो इस बात पर निर्भर है कि सरकारी फंड मैनेजर उनके पैसे का किस तरह से निवेश करते हैं. पीएफआरडीए ऐसी व्यवस्था करने की कोशिश करता है जिससे कर्मचारियों को भविष्य में अधिक से अधिक पेंशन मिल सके.

पेंशन फंड के 75 प्रतिशत को इक्विटी में निवेश का मतलब होगा अधिक जोखिम. अगर निवेश का नतीजा सकारात्मक रहा तो मुनाफा बड़ा होगा लेकिन इसके उलट हुआ तो रिटायरमेंट के बाद आपको इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.

पढ़ेंः मई की शुरुआत महंगाई के साथ, पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर महंगा

साल 2015 तक पेंशन फंड ने इक्विटी मार्केट में अच्छा परिणाम दिया. ध्यान रहे, मार्च, 2015 में सेंसेक्स ने 30 हजार का आंकड़ा छू दिया था. 2012 से 2015 के बीच पेंशन फंड पर 18 प्रतिशत से अधिक फायदा हुआ.

2012 से 2015 के बीच पेंशन फंड पर 18 प्रतिशत से अधिक फायदा हुआ था

दुनिया के कई देशों में पेंशन फंड के आक्रामक निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि रिटर्न बढ़ाया जा सके. हालांकि की विशेषज्ञ इसकी ये कहकर आलोचना कर रहे हैं इससे पेंशनरों का जोखिम काफी बढ़ जाता है.

ऐसे में सवाल ये है कि पेंशन फंड पर आखिर किस सीमा तक जोखिम उठाना सही है.

कई अध्ययनों में ये बात सामने आई है कि दस साल के ऊपर के निवेश पर डेब्ट मार्केट की तुलना में शेयर मार्केट में ज्यादा मुनाफा होता है. शेयर मार्केट में अचानक आई मंदी का पेंशन फंड पर क्या असर होता है इसको लेकर कोई ठोस अध्ययन नहीं किया गया है.

पढ़ेंः 2016 में चीन से तेज रहेगी भारत की आर्थिक विकास दर

इसलिए पीएफआरडीए को पहले दस साल से अधिक निवेश वाले पेंशन फंड के मद्देनजर सबसे बुरे हालात को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक आंकड़ों का विश्लेषण पेश करना चाहिए. 2008 और 2016 की शुरुआत में जिस तरह से दुनिया भर के शेयर बाजार में गिरावट आई उसे देखते हुए ऐसा विश्लेषण बहुत जरूरी है. शेयर बाजार की मंदी का दुनिया भर के पेंशन फंड पर बुरा असर हुआ था.

First published: 4 May 2016, 8:37 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी