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कैसे आपका स्मार्टफोन बनने जा रहा है PM मोदी के लिए बड़ी मुसीबत ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 July 2018, 15:20 IST

गोल्ड के प्रति भारतीयों के प्यार को तो हर कोई जानता है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रति अब उनका आकर्षण मोदी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. भारत में स्मार्टफोन टीवी और अन्य सामानों की खरीद में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, ऐसे में भारत में तेल के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी आयात होने वस्तु इलेक्ट्रॉनिक्स बन गई है. जानकारों की मायने तो इससे देश का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है. यही नहीं यह रुपये के लिए भी बुरी खबर है.

ब्लूमबर्ग के सर्वेक्षण के अनुसार चालू वित्त वर्ष मार्च 2019 करंट अकॉउंट डेफिसिट 1.9 से 2.3 प्रतिशत जायेगा. मुंबई स्थित एक्सिस बैंक लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री सौगाता भट्टाचार्य ने कहा, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के आयात में वृद्धि पहले से ही चालू खाता घाटे को प्रभावित कर रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम पर बहुत जोर दिय है. जिसका लक्ष्य स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना है. सरकार का मानना है कि इससे आयात पर देश की निर्भरता को कम करने में मदद मिलेगी लेकिन भारत ने वैश्विक कंपनियों ने अभी तक इलेक्ट्रॉनिक्स को बड़े पैमाने पर खरीदना बंद नहीं किया है.

 

सरकार के ही आंकड़ों की माने तो बीते वित्त के अंत तक चीन से मोबाइल फोन, पर्सनल कंप्यूटर और अन्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने में भारत सबसे अग्रणीय बना हुआ है. इनमे चीन से भारत का आयात लगभग 60 प्रतिशत था.

13 महीने के सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का मूल्य 57.8 बिलियन अमरीकी डॉलर था, जिसकी कीमत 35.8 बिलियन डॉलर सोने की खरीद से अधिक थी. कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक उदय कोटक ने ट्विटर पोस्ट के माध्यम से कहा, अब गोल्ड नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स आयात भारत चुनौती बन गया है, जो पांच साल में लगभग दोगुना हो गया.

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First published: 4 July 2018, 15:18 IST
 
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