Home » बिज़नेस » How NDA and UPA government's helped Vedanta bypass public consultations for the Copper smelter expansion in Thoothukudi
 

तूतीकोरिन विवाद: BJP-CONG ने चुनावी चंदे के लिए हजारों लोगों की जिंदगी दांव पर लगा दी

सुनील रावत | Updated on: 25 May 2018, 14:27 IST

साल 2013 मे भारत में भ्रष्टाचार को लेकर कई आंदोलन शुरू हुए और इसी ने बीजेपी को साल 2014 में सत्ता दिलाने में मदद की. उस वक़्त कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, मार्च 2014 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने बीजेपी और कांग्रेस को  अवैध रूप से ब्रिटिश खनन और ऊर्जा समूह वेदांता से अवैध चंदा लेने का दोषी पाया. चुनाव आयोग से उनके खिलाफ कार्रवाई करने को कहा लेकिन कांग्रेस और बीजेपी ने इस फैसले को अलग-अलग चुनौती दी. बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इस कानून को संशोधित कर दिया गया.

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता की सहायक कंपनी स्टरलाइट कॉपर के खिलाफ प्रदूषण को लेकर बड़ी संख्या में लोग विरोध कर रहे हैं. तूतीकोरिन में 13 से ज्यादा लोगों की इस प्रदर्शन के दौरान मौत हो गई. संयंत्र से निकलने वाले प्रदूषण ने लोगों को श्वसन रोगों और कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित कर दिया है. प्रधानमंत्री मोदी जो आम तौर पर ट्विटर पर बधाई सन्देश और लोगों की फिटनेस की चुनौती स्वीकार करते हैं, ने तमिलनाडु में तनाव या पुलिस शूटिंग में प्रदर्शनकारियों की मौतों पर एक शब्द नहीं कहा है.

एक और रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 में वेदांता ने तत्कालीन यूपीए सरकार से संपर्क किया था, जिसने सार्वजनिक सुनवाई के बिना संयंत्र को विस्तार देने से इनकार कर दिया था लेकिन साल 2014 में मोदी सरकार ने इस फैसले को उलट दिया और दिसंबर 2018 तक कंपनी को एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस दे दिया.

इसके बाद से वेदांता यह दावा करती रही है कि उसने सरकार की इजाजत के बिना कुछ भी नहीं किया है. हालांकि एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार साल 2008 में यूपीए सरकार ने भी कंपनी को क्लीयरेंस दिया था. वेदांता को तूतीकोरिन में इंडस्ट्रियल पार्क के नाम पर क्लीयरेंस दिया था जिसमें जन सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ती है.  

वेदांता से मिला बीजेपी-कांग्रेस को चंदा  

बीजेपी और कांग्रेस दोनों को वेदांता से चंदा मिलता रहा है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी के बिना वेदांता को विस्तार के लिए मंजूरी क्यों दी गई और इस निर्णय से किसने लाभ उठाया?  रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और कई अदालत के रिकॉर्डों की जानकारी से पता चलता है कि एनडीए सरकार ने दिसंबर 2014 में हरित नियमों की व्याख्या की थी, जिसने प्रोजेक्ट प्रभावित क्षेत्र के लोगों से परामर्श किए बिना थूथुकुड़ी में वेदांता की मदद की.

जनवरी 2013 में भारत सरकार के पूर्व सचिव ईएएस शर्मा और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक पीआईएल दायर किया और दावा किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने यूके स्थित वेदांता समूह से पीपुल्स एक्ट 1951 और एफसीआर अधिनियम 1976 और 2010 का उल्लंघन किया.

इस पीआईएल में दावा किया गया कई साल 2004 से 2015 के बीच स्टरलाइट इंडिया लिमिटेड ने कांग्रेस को 6 करोड़ का चंदा दिया. जबकि साल 2004 से 2015 के बीच वेदांता मद्रास अलुमिनियम कंपनी ने बीजेपी को 3.50 करोड़ का चंदा दिया. यही नहीं इस दौरान वेदांत ग्रुप बीजेपी और कांग्रेस को चंदा देने वाला सबसे बड़ा कॉर्पोरेट घराना था.

ये भी पढ़ें :Make In India से जुड़े 13 हजार करोड़ के ठेके सरकार ने क्यों बदल दिए ?

First published: 25 May 2018, 13:41 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी