Home » बिज़नेस » Catch Hindi: if indian economy is booming then why indians are not buying home
 

'सबसे तेजी से' बढ़ती अर्थव्यवस्था में घर लेने से कतरा रहे हैं लोग

नीरज ठाकुर | Updated on: 26 December 2015, 18:34 IST
QUICK PILL
  • भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर में आई मंदी कुछ और ही कहानी कहती है.
  • विशेषज्ञ मानते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी तभी आएगी जब अर्थव्यवस्था में वास्तविक सुधार दिखे. इसके लिए प्रापर्टी की कीमत और कर्ज की ब्याज दरों को कम करना होगा.
किसी अर्थव्यवस्था की हालात का पता इससे भी चलता है कि कितने लोग नए घर ख़रीद रहे हैं. भारत सरकार के आंकड़ों की मानें तो भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है. 

सरकार ने अर्थव्यवस्था की विकास दर 7-7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. अगर सरकारी आंकड़ें और अनुमान में कुछ सच्चाई है तो इसे रियल एस्टेट सेक्टर में भी नज़र आना चाहिए.

पढेंः क्या डीजल और पेट्रोल को डी-रेगुलेट करने से सचमुच फायदा हुआ है?

लेकिन भारत का रियल एस्टेट सेक्टर बेहाल क्यों नज़र आ रहा है?

प्रापर्टी कंसल्टेंट नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2015 की पहली छमाही में भारत के आठ बड़े शहरों में सात लाख से अधिक घर नहीं बिके हैं.

ये आठ बड़े शहर हैं- दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बैंगलुरु, पुणे, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और अहमदाबाद.

रिपोर्ट के अनुसार इन घरों को बिकने में अभी तीन साल लगेंगे.

एनसीआर में दिल्ली, गुड़गांव, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद आते हैं. इस साल इस इलाक़े में घरों की बिक्री आधी हो कर 14,250 इकाई तक सिमट गयी. एनसीआर में करीब 1.9 लाख घर बिकने के लिए पड़े हुए हैं.

एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2015 की पहली छमाही में भारत के आठ बड़े शहरों में सात लाख से अधिक घर नहीं बिके हैं

घरों की बिक्री में आयी कमी को लेकर रियल एस्टेट कारोबारियों का आत्मविश्वास डिग गया है. साल 2015 की पहली छमाही में केवल 95,400 घर लॉन्च किए गये जबकि पिछले साल इस वक्फे में 1.6 लाख घर लॉन्च किए गये थे. यानी एक साल में 40 फ़ीसदी की गिरावट आ गयी.

साल 2015 की दूसरी छमाही के आंकड़े अभी नहीं आए हैं लेकिन नाइट फ्रैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और निदेशक सामंतक दास कहते हैं को दूसरी छमाही को लेकर भी हम आशावान नहीं हैं. नाइट फ्रैंक साल 2015 के पूरे साल की रिपोर्ट जनवरी, 2016 के तीसरे हफ़्ते में जारी करेगा.

पढेंः जीएसटी का जंजला, किसी का बोझ किसी के सिर

दास ने कैच न्यूज़ से कहा, "हम कह सकते हैं कि साल 2015 रियल एस्टेट के लिए बहुत बुरा रहा. इसकी शुरुआत साल 2014 में हुई जब घरों की बिक्री गिरनी शुरू हुई. साल 2015 का हाल साल 2014 से भी ख़राब रहा. ये साफ़ है कि ख़रीदारों का घर ख़रीदने का आत्मविश्वास गिरा है. हमारा अनुमान है कि 2014 की तुलना में 2015 में 5-6 प्रतिशत कम बिक्री होगी."

देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हाउसिंग सेक्टर का 5-6 प्रतिशत योगदान है. फिर भी भारतीय घर क्यों नहीं ख़रीद रहे हैं?

एक रियल एस्टेट कंपनी में मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव सुनील बंसल कहते हैं, "घरों के बारे में लोग काफ़ी पूछताछ कर रहे हैं, करीब करीब पिछले साल जितना ही लेकिन बात इसके आगे नहीं बढ़ पा रही है. जो भी वजह हो लेकिन घर ख़रीदने के मामले में लोगों की क्रय शक्ति घटी है."

निर्माण क्षेत्र उन 14 सेक्टरों में तीसरे स्थान पर है जिनका अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टरों पर असर होता है

बंसल ने इसकी वजह समझाते हुए डिन्क का जिक्र करते हैं. डिन्क यानी डबल इनकम नो किड. बंसल मानते हैं कि डिन्क के कारण पिछले कुछ सालों में रियल स्टेट में तेज उछाल आयी. वो कहते हैं, "बाज़ार में अब ऐसे लोग पर्याप्त नहीं है जिनके पास काफ़ी पैसा है लेकिन जिम्मेदारी कोई नहीं. जिन लोगों ने पांच साल पहले घर ख़रीदा था अब अपनी सारी जमापूंजी ख़र्च कर चुके हैं. और नई पीढ़ी की इतनी कमाई नहीं है कि वो घर ख़रीदने जैसा बड़ा निवेश कर सके.

रियल एस्टेट में आई मंदी के पीछे एक और कारण दास बताते हैं. वो कहते हैं, "लोगों का रियल एस्टेट डेवलपर्स से भरोसा उठ गया है. ज़्यादातर प्रोजेक्ट दो साल या उससे अधिक समय पीछे चल रहे हैं. ग्राहक अब अपने निवेश को लेकर बहुत सजग हो चुका है. अब लोग ऐसे प्रोजेक्ट में निवेश कर रहे हैं जिनका तुरंत अधिग्रहण किया जा सके या जो क़रीब 90 फ़ीसदी तैयार हों."

पढ़ेंः वेदांता के विलय के पीछ अनिल अग्रवाल की मंशा क्या है?

रियल एस्टेट में आई मंदी का दूसरे सेक्टर पर भी असर पड़ रहा है.

इस साल जून के तिमाही की तुलना में सितंबर की तिमाही में सीमेंट उद्योग में महज 1.6 फ़ीसदी का विकास हुआ. इससे पहले की तिमाही में भी इस क्षेत्र में नाम मात्रा का विकास देखा गया था.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के अनुसार जिन 32 कपंनियों ने 2015 के दूसरी तिमाही के अपने आंकड़े जारी किए हैं उनमें से 20 ने बिक्री कम होने की बात कही है.

प्रॉपर्टी की क़ीमत और ब्याज दर को कम होना ही चाहिए लेकिन आर्थिक सुधार का कोई शॉर्ट कट नहीं होता

सीएमआईई ने 10 सितंबर को अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, "रियल एस्टेट में बिक्री गिरने के लिए सीमेंट और निर्माण क्षेत्र में मांग में आयी सुस्ती जिम्मेदार है. सेंट्रल स्टैटिस्टिकल ऑर्गेनाइजेशन द्वारा जारी किए गये सीमेंट उत्पादन के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं. इन आंकड़ों के अनुसार साल 2015 की जून तिमाही में 6.89 करोड़ टन सीमेंट उत्पादन हुआ यानी इसमें 0.4 प्रतिशत की गिरावट आयी."

ऐसे में सवाल ये है कि क्या साल 2016 रियल एस्टेट के लिए बेहतर होगा? विशेषज्ञों के अनुसार ये तीन बातों पर निर्भर है-

  • दाम में कमी
  • ब्याज दर में कमी
  • अर्थव्यवस्था में वास्तविक विकास

अंशुमान मैगज़ीन रियल स्टेट से जुड़ी कंपनी सीबी रिचर्ड एलिस साउद एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन हैं. अंशुमान कहते हैं, "प्रॉपर्टी की क़ीमत और ब्याज दर को कम होना ही चाहिए. लेकिन आर्थिक सुधार का कोई शॉर्ट कट नहीं होता. तेज़ आर्थिक विकास से लोगों में ख़रीदारी के लिए ज़रूरी आत्मविश्वास बढ़ता है."

साल 2016 में जो होगा वो तो अनुमान की बात है. लेकिन अब तक का सच यही है कि 'सबका साथ सबका विकास' वाली 'सबसे तेज़' बढ़ती अर्थव्यवस्था में लोग 'घर' लेने से कतरा रहे हैं.

पढ़ेंः बुलेट ट्रेन को पटरी से उतार सकते हैं देवेंद्र फडनवीस

पढ़ेंः मोदी सरकार की गलत नीतियों से बढ़ने लगा बेरोजगारी का संकट

First published: 26 December 2015, 18:34 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी