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अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिंस कीमत में उछाल ज्यादा टिकाऊ नहीं

नीरज ठाकुर | Updated on: 9 March 2016, 20:36 IST

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में पिछले एक महीने में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हुई है.

सोमवार को विश्व बाजार में लौह अयस्क की कीमत में 19 प्रतिशत का उछाल आया. इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिंस के मूल्यों में सुधार आएगा.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौह अयस्क की कीमतों में तेजी के बाद बाद मंगलवार को इंडियन मेटल स्टॉक में भी उछाल दिखा. 

ये तेजी देश की प्रमुख स्टील कंपनियों सेल (8.11 प्रतिशत), एनएमडीसी (6.12 प्रतिशत), जिंदल स्टील (4.9 प्रतिशत) और हिंडालको (4.73 प्रतिशत) के शेयर में आई उछाल में साफ दिखी.

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बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के मेटल इंडेक्स में पिछले कुछ समय की सबसे ज्यादा बढ़ोतरी (8.26 प्रतिशत) देखी गयी, जबकि सेंसेक्स में केवल 1.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.

चार मार्च को बीएसई मेटल इंडेक्स पिछले एक तिमाही में 4.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ अधिकतम स्तर पर पहुंचा,   जबकि सेंसेक्स में इस दौरान 3.87 प्रतिशत गिरावट आई.

लेकिन क्या सचमुच ये सुधार के लक्षण हैं?

आम तौर पर लौह अयस्क और कच्चे तेल जैसे जिंस की कीमत में बढ़ोतरी को वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती मांग का सूचक माना जाता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार की जिंस कीमत में हुई हालिया वृद्धि टिकाऊ नहीं है

चीन दुनिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क खरीदार है क्योंकि उसकी स्टील उत्पादन क्षमता सबसे अधिक है. लौह अयस्क की कीमत बढ़ने से चीन में मांग बढ़ने का संकेत मिलता है.

हालांकि निवेशक बैंक गोल्डमैन सैक्स ने सचेत किया है कि जिंस की कीमतें बढ़ने से हमें ज्यादा उम्मीदें नहीं पालनी चाहिए.

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संस्था के अनुसार लौह अयस्क की कीमत में उछाल इसलिए आया है क्योंकि चीन में इस समय निर्माण कार्य में बहुत तेजी आ जाती है.

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में कहा गया है, "स्टील की मांग में आयी कमी तत्कालीन है, जो जल्द ही पूरी हो जाएगी. इसके बाद स्टील में मुनाफे बहुत कम हो जाएगा जिसका दबाव लौह अयस्क की कीमत की पर पड़ेगा."

गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान लगाया है कि साल के अंत तक लौह अयस्क की कीमत करीब 35 डॉलर प्रति टन होगी. अगर ऐसा होता है तो ये कीमत मौजूदा दर से 44 प्रतिशत कम हो जाएगी.

चीन में स्टील की मांग में आयी फौरी बढ़त से लौह अयस्क की कीमत में बढ़ोतरी दिख रही है

सोसाइटे जनरैल के विश्लेषक रॉबिन भर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया है, "इस थोड़ी देर की उछाल से हमें लंबे दौर में जिंस की कीमत में सुधार के सबूत नहीं मिलते."

चीन ने भी हाल ही में स्टील उत्पादन में 10-15 करोड़ टन की कटौती करने की घोषणा की है. अगर ऐसा हुआ तो इससे चार लाख नौकरियां जाने की आशंका है.

कंपनियां बाजार से जुड़े अस्थायी अनुमानों के आधार पर नौकरी में कटौती नहीं करतीं.

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कच्चे तेल की कीमत पर निवेश बैंक मैक्वारी ने कहा कि कच्चे तेल के बाजार में आयी उछाल स्थायी नहीं है. हो सकता है कि कच्चे तेल की कीमत फिर गिरकर 30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच जाए.

गौल्डमैन सैक्स ने भी कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर बहुत उत्साह नहीं दिखाया है.

हो सकता है कि कुछ लोगों को जिंस कीमत में बढ़ोतरी से तत्कालीन लाभ मिल जाए लेकिन लंबे दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार आने की ज्यादा गुंजाइश नहीं दिख रही. शायद ये वजह है कि बड़े निवेशक बड़े दांव नहीं लगा रहे हैं.

First published: 9 March 2016, 20:36 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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